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Krishna Bhajan

O Bansi Wale Sawara Badi Der Lagaye Lyrics (ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए) – Shyam Bhajan 2026 | Bhakt Pukare Mere Shyam Kanhai

187 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 ओ बंसीवाले सांवरा – बड़ी देर लगाए

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(O Bansi Wale Sawara Badi Der Lagaye Lyrics In Hindi) – Shyam Bhajan 2026 | Bhakt Pukare Mere Shyam Kanhai

तर्ज: लम्बी जुदाई || भक्ति गीत

📝 भजन विवरण

🎤 शैली: श्याम भजन / कृष्ण भजन
🎵 तर्ज: लम्बी जुदाई (Lambi Judai)
🏷️ श्रेणी: विरह भजन / प्रार्थना
📍 भाव: विरह, व्याकुलता, भक्त की पुकार
🎨 विशेष: राधा-कृष्ण प्रेम का प्रतीक

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ दोहा ॥

बिछड़े अभी तो हम बस कल परसों,
जिऊंगी मैं कैसे इस हाल में बरसों,
राधा पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए॥

॥ स्थायी ॥

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए, देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई, आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए ॥

तर्ज – लम्बी जुदाई

॥ अंतरा १ ॥

एक तो श्याम मेरे पास नहीं रे,
दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे,
दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे,
उसपे ये सावन आया…हाय,
उसपे ये सावन आया,
आग लगायी,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,
देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए ॥

॥ अंतरा २ ॥

चिठ्ठीये नी दर्द फ़िराक़ वालिये,
ले जा ले जा संदेशा सोहणे श्याम दा,
तेनु वास्ता दिल दी पुकार दा,
ले जा ले जा संदेशा सोहणे श्याम दा ॥

॥ अंतरा ३ ॥

बाग उजड़ गए खिलने से पहले,
श्याम बिछड़ गए मिलने से पहले,
कोयल की कुक ने हुक लगाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,
देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए ॥

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए, देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई, आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए ॥

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह मार्मिक भजन "ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए" एक भक्त (राधा के रूप में) की श्याम (कृष्ण) से मिलन की व्याकुलता और प्रेम को दर्शाता है। भजन का मूल स्वर एक प्रेमी हृदय की पुकार है जो अपने प्रियतम के वियोग में तड़प रहा है।

"बिछड़े अभी तो हम बस कल परसों, जिऊंगी मैं कैसे इस हाल में बरसों" – प्रारंभिक दोहे में भक्त कहती है कि अभी तो बस कल-परसों बिछड़े हैं, लेकिन इस हाल में बरसों कैसे जिऊंगी। राधा पुकार रही हैं कि मेरे श्याम कन्हाई आ जाओ, देर लगा रहे हो।

"एक तो श्याम मेरे पास नहीं रे, दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे" – एक तो श्याम पास नहीं हैं, दूसरे मिलन की कोई आस नहीं है। उस पर यह सावन आ गया है, जिसने आग लगा दी है।

"चिठ्ठीये नी दर्द फ़िराक़ वालिये, ले जा ले जा संदेशा सोहणे श्याम दा" – यह पंक्तियाँ पंजाबी में हैं, जिसमें भक्त कहती है कि हे विरह के दर्द की चिट्ठी, तू सुन्दर श्याम का संदेशा ले जा। तेरा दिल की पुकार से वास्ता है।

"बाग उजड़ गए खिलने से पहले, श्याम बिछड़ गए मिलने से पहले" – बाग उजड़ गए खिलने से पहले ही, श्याम बिछड़ गए मिलने से पहले ही। कोयल की कूक ने हुक (चोट) लगाई है। भक्त बार-बार पुकारता है कि बंसीवाले सांवरा बहुत देर लगा रहे हो, आ जाओ।

🔍 इस भजन का विशेष महत्त्व

तर्ज "लम्बी जुदाई": यह भजन प्रसिद्ध फिल्मी गीत "लम्बी जुदाई" की धुन पर बनाया गया है। यह धुन विरह और व्याकुलता को बखूबी व्यक्त करती है, जो इस भजन के भावों को और गहरा करती है।

राधा-कृष्ण प्रेम का प्रतीक: हालाँकि इसमें "भक्त" शब्द आया है, लेकि राधा पुकारे और बंसीवाले सांवरा से यह राधा-कृष्ण के प्रेम को दर्शाता है। यह उस दिव्य प्रेम का प्रतीक है जहाँ प्रेमिका अपने प्रियतम के वियोग में व्याकुल है।

सावन और विरह: सावन का महीना प्रेम और विरह दोनों के लिए जाना जाता है। यहाँ "उसपे ये सावन आया, आग लगायी" कहकर सावन की बयार को विरह की आग बताया गया है।

पंजाबी-हिन्दी मिश्रण: भजन में पंजाबी पंक्तियों का समावेश इसे और अधिक भावप्रवण और विविधता प्रदान करता है। यह उत्तर भारत की साझा संस्कृति को दर्शाता है।

कोयल की कूक: "कोयल की कुक ने हुक लगाई" – कोयल की कूक भी प्रेमियों के लिए विरह की पीड़ा बढ़ाने वाली होती है। यहाँ कोयल की कूक ने भी हुक (चोट) लगाई है।

💖 विरह में भक्त की पुकार

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि भक्त का हृदय अपने आराध्य के बिना अधूरा है। चाहे वह राधा हो या कोई भी भक्त, जब प्रभु से मिलन नहीं होता, तो जीवन उजड़ जाता है। सावन, कोयल की कूक, बाग-बगीचे – सब उस विरह की याद दिलाते हैं। भक्त बार-बार पुकारता है कि बंसी वाले सांवरा, बहुत देर लगा रहे हो, आ जाओ।

✨ प्रतीकों की भाषा

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए केवल एक भजन नहीं, बल्कि विरह की अभिव्यक्ति का अद्भुत माध्यम है। इसमें प्रकृति के तत्व – सावन, कोयल, बाग – सब विरह को और गहरा करते हैं। चिट्ठी और संदेशा का प्रयोग उस पुरानी परंपरा को दर्शाता है जहाँ प्रेमी पत्रों के माध्यम से संदेश भेजते थे। यह भजन हर उस हृदय की आवाज़ है जो अपने प्रभु से बिछड़ा हुआ है और उनके आने का इंतज़ार कर रहा है।

🙏 ॐ श्री श्याम देवाय नमः || बंसीवाले सांवरा, आजा देर लगाए 🙏

॥ श्याम विरह भजन ॥
॥ भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई, आजा देर लगाए ॥

तर्ज: लम्बी जुदाई | Tune: Lambi Judai

॥ ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए ॥

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 15 Aug 2026

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