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O Maiya Taine Ka Thani Man Mein Lyrics (ओ मैया तैने का ठानी मन में) – Ravindra Jain Ram Vanvas Bhajan 2026 | Ram Siya Bhej Diye Re Van Mein

93 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 ओ मैया, तैने का ठानी मन में – राम सिया भेज दिए री वन में

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

(O Maiya Taine Ka Thani Man Mein Lyrics In Hindi) – Ravindra Jain Ram Vanvas Bhajan 2026

गीतकार एवं संगीतकार: रवीन्द्र जैन || राम वनवास भजन

📝 भजन विवरण

✍️ गीतकार/संगीतकार: रवीन्द्र जैन (Ravindra Jain)
🏷️ श्रेणी: राम भजन / राम वनवास भजन
📍 भाव: करुणा, वेदना, राम वनवास की व्यथा

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

ओ मैया, तैने का ठानी मन में,
राम सिया भेज दिए री वन में॥

॥ अंतरा १ ॥

जद्यपि भरत तेरो ही जायो,
तेरी करनी देख लजायो,
अपनों पद तैने आप गँवायो,
भरत की नज़रन में।
राम सिया भेज दिए री वन में॥

॥ अंतरा २ (हठीली) ॥

हठीली तैने का ठानी मन में,
राम सिया भेज दिए री वन में॥

॥ अंतरा ३ ॥

महल छोड़ वहाँ नहीं रे मड़ैया,
सिया सुकुमारी संग दोऊ भैया,
काहू वृक्ष तर भीजत होंगे,
तीनों मेहन में।
राम सिया भेज दिए री वन में॥

॥ अंतरा ४ (दीवानी) ॥

दीवानी तैने का ठानी मन में,
राम सिया भेज दिए री वन में॥

॥ अंतरा ५ ॥

कौसल्या की छिन गई वाणी,
रोए न सकी उर्मिल दीवानी,
कैकेयी तू बस एक ही रानी,
रह गई महलन में।
दीवानी तैने का ठानी मन में,
राम सिया भेज दिए री वन में॥

ओ मैया, तैने का ठानी मन में,
राम सिया भेज दिए री वन में॥

✍️ गीतकार एवं संगीतकार :- रवीन्द्र जैन (Ravindra Jain)

राम वनवास पर आधारित मार्मिक भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत मार्मिक भजन "ओ मैया, तैने का ठानी मन में" रवीन्द्र जैन की अमर रचना है। यह गीत कैकेयी की माँ (प्रति) के प्रति एक भक्त की व्यथा-पूर्ण पुकार है, जो राम और सीता को वनवास भेजने के लिए उन्हें उलाहना देता है।

"ओ मैया, तैने का ठानी मन में, राम सिया भेज दिए री वन में" – यह मुखड़ा बार-बार आता है। "मैया" कैकेयी के लिए प्रयुक्त है। भक्त उनसे पूछता है कि तुमने मन में क्या ठान लिया था कि राम और सीता को वन में भेज दिया?

"जद्यपि भरत तेरो ही जायो, तेरी करनी देख लजायो" – यद्यपि भरत तुम्हारा ही पुत्र है, लेकिन तुम्हारी इस करनी को देखकर वह लज्जित हो गया।

"अपनों पद तैने आप गँवायो, भरत की नज़रन में" – तुमने अपना ही पद (राज्य) गँवा दिया, वह भी अपने पुत्र भरत की नज़रों में।

"हठीली तैने का ठानी मन में" – कैकेयी को हठीली (हठ करने वाली) कहकर संबोधित किया गया है।

"महल छोड़ वहाँ नहीं रे मड़ैया, सिया सुकुमारी संग दोऊ भैया" – महल छोड़कर अब वहाँ (वन में) कोई मड़ैया (झोपड़ी) भी नहीं है। सीता सुकुमारी हैं, उनके साथ दोनों भाई (राम और लक्ष्मण) वन में हैं।

"काहू वृक्ष तर भीजत होंगे, तीनों मेहन में" – किसी वृक्ष के नीचे तीनों मेहन (बारिश) में भीग रहे होंगे।

"दीवानी तैने का ठानी मन में" – कैकेयी को दीवानी (पागल) कहकर संबोधित किया गया है।

"कौसल्या की छिन गई वाणी, रोए न सकी उर्मिल दीवानी" – कौसल्या की वाणी छिन गई (वह बोल नहीं पाई), और उर्मिला दीवानी रो भी नहीं सकी।

"कैकेयी तू बस एक ही रानी, रह गई महलन में" – अंत में कैकेयी को व्यंग्य से कहा गया है कि तू अब अकेली ही महल में रह गई – अपने पुत्रों और राजपाट से हाथ धो बैठी।

🔍 इस भजन का विशेष महत्व

रवीन्द्र जैन की अमर रचना: रवीन्द्र जैन भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकार और गीतकार थे। उनकी यह रचना राम वनवास की करुणा को अनूठे शब्दों में पिरोती है।

"हठीली" और "दीवानी" का प्रयोग: कैकेयी के लिए ये दो शब्द प्रयुक्त हुए हैं – हठीली उनकी दृढ़ता के लिए, और दीवानी उनके इस अंधे प्रेम के लिए।

भरत की लज्जा: "तेरी करनी देख लजायो" – यह पंक्ति भरत की उस स्थिति का वर्णन करती है जब उन्होंने माँ की इस चाल को देखा और स्वयं राज्य लेने से इन्कार कर दिया।

वनवास की यातना: "काहू वृक्ष तर भीजत होंगे, तीनों मेहन में" – यह पंक्ति राम, लक्ष्मण और सीता की वन की कठिनाइयों का मार्मिक चित्रण करती है।

कैकेयी का एकाकीपन: "कैकेयी तू बस एक ही रानी, रह गई महलन में" – यह व्यंग्यपूर्ण पंक्ति कैकेयी के उस दुख को रेखांकित करती है जहाँ उसने सब कुछ पाकर भी सब कुछ खो दिया।

💖 राम वनवास की करुण गाथा

🎯 संदेश

यह भजन हमें सिखाता है कि कैकेयी के हठ ने कितने लोगों का जीवन बर्बाद कर दिया। कौसल्या की वाणी छिन गई, उर्मिला रो नहीं सकी, सीता सुकुमारी को वन में भीगना पड़ा, और भरत अपनी माँ की करनी से लज्जित हुए। अंत में कैकेयी अकेली महलों में रह गई। यह गीत हमें संदेश देता है कि अहंकार और हठ से किसी का भला नहीं होता।

✨ रवीन्द्र जैन का अमर योगदान

ओ मैया, तैने का ठानी मन में केवल एक भजन नहीं, बल्कि राम वनवास की पीड़ा को आम जनता तक पहुँचाने वाली अमर रचना है। रवीन्द्र जैन ने अपनी सरल भाषा और मार्मिक शब्दों से इस प्रसंग को ऐसा जीवंत किया कि सुनने वाला सीधे उस दृश्य में खड़ा हो जाता है।

🙏 जय श्री राम || जय माता सीता || जय लक्ष्मण || राम वनवास की गाथा अमर रहे 🙏

॥ रवीन्द्र जैन कृत राम भजन ॥
॥ राम सिया भेज दिए री वन में ॥

गीतकार एवं संगीतकार: रवीन्द्र जैन | Lyricist & Composer: Ravindra Jain

॥ राम वनवास भजन – रामायण का करुण प्रसंग ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "O Maiya Taine Ka Thani Man Mein Lyrics (ओ मैया तैने का ठानी मन में) – Ravindra Jain Ram Vanvas Bhajan 2026 | Ram Siya Bhej Diye Re Van Mein" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ and अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 13 Aug 2026

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