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ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे - Zara Murli Baja O Saanwre Lyrics in Hindi (Krishna Bhajan)

165 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे – कन्हैया की मीठी पुकार

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Zara Murli Baja O Saanwre) – कृष्ण भजन

✍️ पारंपरिक लोक भजन (Traditional Krishna Bhajan)

📖 परिचय – मुरली वाले के प्रति मोहक प्रार्थना

ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे” – यह एक मधुर कृष्ण भजन है, जो भक्त के मन की व्याकुलता को दर्शाता है। जब भी कान्हा अपनी मुरली उठाते हैं, सारा ब्रह्मांड मदमस्त हो जाता है। यह भजन उसी आनंदमयी पुकार का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ भक्त श्याम सुंदर से निवेदन करता है कि वह अपनी मुरली बजाएँ, और अपनी मीठी तान से सबका मन मोह लें।

इस भजन की हर पंक्ति में कृष्ण के विभिन्न स्वरूपों – उनकी गायें, सखियाँ, राधा, गोकुल, झूला, माखन – के प्रति अनुराग और समर्पण झलकता है। भक्त कहता है कि हे साँवरे, तुम्हारी आँखें अद्भुत हैं, तुम्हारी मुरली अद्भुत है, तुम्हारी गोकुल अद्भुत है; बस तुम एक बार मुरली बजाओ, और हमें अपनी भक्ति में डुबो दो। यह भजन न केवल श्रद्धालुओं को भाव-विभोर करता है, बल्कि उन्हें कृष्ण-लीलाओं के रंग में रँग देता है।

इस लेख में हम आपको इस लोकप्रिय कृष्ण भजन की सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी और रोमन लिपि में, इसका गहरा भावार्थ, इसके पीछे की भक्ति-कथा, आध्यात्मिक संदेश, और अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब प्रस्तुत करेंगे। आइए, मुरलीधर के इस सुमधुर भजन में खो जाएँ।

📜 भजन लिरिक्स (हिंदी एवं रोमन लिपि)

॥ स्थायी / टेक ॥

ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे
zara murli baja o saanwre

ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे
zara murli baja o saanwre

ज़रा, मुरली बजा... ओ साँवरे ॥
zara, murli baja... o saanwre

ओ साँवरे मेरे, ओ साँवरे ॥
o saanwre mere, o saanwre

तान, मीठी सुना... ओ साँवरे ॥
taan, meethi suna... o saanwre

ज़रा, मुरली बजा...
zara, murli baja...

॥ अंतरा १ ॥

तेरे, नैना, गज़ब के, ओ साँवरे ॥
tere, naina, gazab ke, o saanwre

ज़रा, हमसे लड़ा... ओ साँवरे ॥
zara, humse lada... o saanwre

ज़रा, मुरली बजा...

॥ अंतरा २ ॥

तेरी, मुरली गज़ब की, ओ साँवरे ॥
teri, murli gazab ki, o saanwre

ज़रा, हमको, सुना... ओ साँवरे ॥
zara, humko, suna... o saanwre

ज़रा, मुरली बजा...

॥ अंतरा ३ ॥

तेरी, ग‌ऊयाँ गज़ब की, ओ साँवरे ॥
teri, gaoyan gazab ki, o saanwre

हमें, ग्वालिन बना... ओ साँवरे ॥
hamein, gwaalin bana... o saanwre

ज़रा, मुरली बजा...

॥ अंतरा ४ ॥

तेरी, सखियां गज़ब की, ओ साँवरे ॥
teri, sakhiyan gazab ki, o saanwre

रास, हमसे रचा... ओ साँवरे ॥
raas, humse racha... o saanwre

ज़रा, मुरली बजा...

॥ अंतरा ५ ॥

तेरी, राधा गज़ब की, ओ साँवरे ॥
teri, radha gazab ki, o saanwre

ज़रा, हमसे, मिला... ओ साँवरे ॥
zara, humse, mila... o saanwre

ज़रा, मुरली बजा...

॥ अंतरा ६ ॥

तेरी, गोकुल गज़ब की, ओ साँवरे ॥
teri, gokul gazab ki, o saanwre

हमें, गोकुल बुला... ओ साँवरे ॥
hamein, gokul bula... o saanwre

ज़रा, मुरली बजा...

॥ अंतरा ७ ॥

तेरे, भक्त निराले... ओ साँवरे ॥
tere, bhakt nirale... o saanwre

हमें, गीता सुना... ओ साँवरे ॥
hamein, geeta suna... o saanwre

ज़रा, मुरली बजा...

॥ अंतरा ८ ॥

तेरा, झूला गज़ब का, ओ साँवरे ॥
tera, jhula gazab ka, o saanwre

हमें, झूला झुला... ओ साँवरे ॥
hamein, jhula jhula... o saanwre

ज़रा, मुरली बजा...

॥ अंतरा ९ ॥

तेरा, माखन गज़ब का, ओ साँवरे ॥
tera, makhan gazab ka, o saanwre

हमें, मिश्री बना... ओ साँवरे ॥
hamein, mishri bana... o saanwre

मेरे, घर आ के खा... ओ साँवरे ॥
mere, ghar aa ke kha... o saanwre

ज़रा, मुरली बजा...


राधे राधे

🔍 भजन का अर्थ (लाइन-बाय-लाइन व्याख्या)

इस कृष्ण भजन में भक्त बार-बार “साँवरे” (श्याम सुंदर) से मुरली बजाने का आग्रह करता है। आइए प्रत्येक पंक्ति का अर्थ समझें:

  • ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे: हे साँवले रंग वाले कान्हा, कृपया थोड़ी देर के लिए अपनी मुरली बजाओ। यह व्याकुलता और प्रेम का भाव है।
  • तेरे नैना गज़ब के, ज़रा हमसे लड़ा: तुम्हारी आँखें अद्भुत हैं, हे कृष्ण, हमसे (प्रेम से) थोड़ी नोक-झोंक करो।
  • तेरी मुरली गज़ब की, ज़रा हमको सुना: तुम्हारी मुरली की तान अद्भुत है, हमें वह मीठी धुन सुनाओ।
  • तेरी गौयाँ गज़ब की, हमें ग्वालिन बना: तुम्हारी गायें अद्भुत हैं, हमें भी अपनी ग्वालिन (गोपी) बना लो।
  • तेरी सखियाँ गज़ब की, रास हमसे रचा: तुम्हारी सखियाँ अद्भुत हैं, हमारे साथ रास रचाओ।
  • तेरी राधा गज़ब की, ज़रा हमसे मिला: तुम्हारी राधा अद्भुत है, हमें उनसे (या हमसे) मिला दो। यहाँ “हमसे मिला” का अर्थ भक्त अपने आपको राधा के समान कृष्ण से मिलाने की प्रार्थना करता है।
  • तेरी गोकुल गज़ब की, हमें गोकुल बुला: तुम्हारा गोकुल अद्भुत है, हमें वहाँ बुला लो।
  • तेरे भक्त निराले, हमें गीता सुना: तुम्हारे भक्त अद्वितीय हैं, हमें गीता का उपदेश सुनाओ।
  • तेरा झूला गज़ब का, हमें झूला झुला: तुम्हारा झूला अद्भुत है, हमें अपने झूले पर झुलाओ।
  • तेरा माखन गज़ब का, हमें मिश्री बना, मेरे घर आ के खा: तुम्हारा माखन अद्भुत है, हमें मिश्री बना दो और मेरे घर आकर खाओ। अर्थात हमें तुम्हारा प्रेम-मिश्री बनने दो, और तुम हमारे हृदय-रूपी घर आकर उस प्रेम का आनंद लो।

📖 भजन की प्रेरणा और पृष्ठभूमि

यह भजन ब्रज की पावन धरती पर सदियों से गाया जाता रहा है। कहते हैं कि एक बार एक साधारण ग्वालिन को कृष्ण से इतना प्रेम था कि वह रोज मुरली की तान सुनने के लिए यमुना के किनारे बैठ जाती। एक दिन उसने कान्हा से प्रार्थना की – “ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे”। कृष्ण उसकी भक्ति से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने उसे दर्शन दिए और कहा कि तुम्हारी यह पुकार हर भक्त के हृदय की आवाज़ बनेगी। तब से यह भजन ब्रजवासियों की रास-लीला, झूला उत्सव, और जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष रूप से गाया जाता है। आज यह पूरे भारत में कृष्ण भक्ति का एक अभिन्न अंग बन चुका है।

🌟 एक प्राचीन कथा: मुरली बजाने वाले का आगमन

एक बार नंदगाँव में घोर सूखा पड़ा। सबने इंद्र देवता की पूजा शुरू कर दी, लेकिन कृष्ण ने कहा कि हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। तब सभी ने कृष्ण की बात मानी और गोवर्धन पूजा की। इंद्र क्रोधित हुए और उन्होंने भारी वर्षा की। तब कृष्ण ने अपनी मुरली बजाई और गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। उस समय ग्वाल-बालों ने कृष्ण से प्रार्थना की – “ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे, हमें इस आपदा से बचाओ।” कृष्ण की मुरली की ध्वनि से सारी नकारात्मक शक्तियाँ नष्ट हो गईं।

नैतिक शिक्षा: जब भी जीवन में संकट आए, तो हमें कृष्ण की मुरली (भक्ति और स्मरण) का सहारा लेना चाहिए। उनकी एक पुकार सब कष्ट हर लेती है।

🤝 इस भजन का वास्तविक जीवन में महत्व

आज के व्यस्त जीवन में, जब हर कोई तनाव और चिंता से घिरा है, “ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे” भजन मानसिक शांति और आनंद प्रदान करता है। इस भजन को गाने या सुनने से मन में एक अलौकिक शीतलता का अनुभव होता है। यह हमें याद दिलाता है कि ठीक वैसे ही जैसे कृष्ण की मुरली गायों, ग्वालों और गोपियों को आकर्षित करती थी, वैसे ही भगवान का नाम हमारे मन को सच्चे मार्ग की ओर आकर्षित करता है। यह भजन विशेष रूप से जन्माष्टमी, होली, और झूला उत्सव पर परिवार और समुदाय के साथ गाया जाता है, जिससे आपसी प्रेम और भक्ति का वातावरण बनता है।

🕉️ श्रीमद्भागवत से प्रेरक श्लोक

॥ वेणु-गीतम् – श्रीमद्भागवत महापुराण ॥

वेणुं क्वणन्तमरविन्ददलायताक्षं
बर्हावतंसमसिताम्बुदसुन्दराङ्गम् ।
कन्दर्पकोटिकमनीयविशेषशोभं
गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि ॥

अर्थ: जो बाँसुरी बजाते हैं, जिनके नेत्र कमल-पत्तल के समान हैं, जो मोर-मुकुट धारण करते हैं, जिनका शरीर नीले बादल के समान सुंदर है, जिनकी शोभा करोड़ों कामदेवों से भी अधिक मनोहर है, उस आदिपुरुष गोविन्द की मैं भजता हूँ।


यह श्लोक कृष्ण की मुरली और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। मुरली केवल एक वाद्य नहीं, बल्कि ईश्वर का आह्वान है जो हर जीव के हृदय को छू जाता है।

✨ इस भजन का आध्यात्मिक संदेश

इस मधुर भजन के माध्यम से हम निम्नलिखित आध्यात्मिक शिक्षाएँ ग्रहण कर सकते हैं:

  • ईश्वर के प्रति व्याकुलता: “ज़रा मुरली बजा” बार-बार कहने से स्पष्ट होता है कि भक्त को ईश्वर के सानिध्य की तीव्र प्यास है। यही सच्ची भक्ति है।
  • सर्वस्व समर्पण: भक्त कहता है – हमें ग्वालिन बना, हमें मिश्री बना, हमें अपने झूले पर झुला। अर्थात हम आपकी इच्छा के अनुसार कुछ भी बनने को तैयार हैं।
  • भगवान की लीला में डूबना: रास, गोकुल, गायें – ये सब कृष्ण-लीला के अंग हैं। इस भजन को गाने का अर्थ है कि हम भी उस लीला में सम्मिलित होना चाहते हैं।
  • मुरली की ध्वनि – चित्त की शुद्धि: कृष्ण की मुरली की तान सुनकर ही सभी ब्रजवासी अपना सब कुछ भूल जाते थे। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर-नाम-स्मरण ही सच्चा आनंद है।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। राधे राधे ।।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: इस भजन के रचयिता कौन हैं?

उत्तर: यह एक पारंपरिक लोक भजन है, जिसका श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। यह ब्रज की लोक-चेतना से उत्पन्न हुआ है और सदियों से मौखिक रूप से प्रचलित है।

प्रश्न 2: किस अवसर पर यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है?

उत्तर: यह भजन जन्माष्टमी, झूला उत्सव, होली, और राधा अष्टमी के अवसर पर तथा कृष्ण भक्ति सभाओं में अत्यधिक लोकप्रिय है।

प्रश्न 3: “साँवरे” शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर: “साँवरे” या “साँवरा” कृष्ण के श्यामल (नीले-बादल जैसे) रंग के लिए प्रयुक्त होता है। यह उनके लिए एक प्यारा संबोधन है।

प्रश्न 4: क्या मैं इस भजन को अपने घर पर गा सकता हूँ?

उत्तर: बिल्कुल। इसे शुद्ध भक्ति भाव से गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, प्रेम और शांति का संचार होता है।

🔗 संबंधित कृष्ण भजन (Related Krishna Bhajans)

॥ इति कृष्ण भजनम् ॥
॥ श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी ।। आप सब पर राधे-कृष्ण की कृपा बनी रहे ।।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 16 Aug 2026

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