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ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे - Zara Murli Baja O Sanwre Lyrics in Hindi (Krishna Bhajan)

187 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🎶 ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे – मोहन की मुरली की मीठी पुकार

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(Zara Murli Baja O Sanwre) – श्री कृष्ण भजन

✍️ लोक भक्ति रचना (सार्वजनिक प्रेम गीत)

📖 परिचय – मुरलीधर के प्रति मन की व्याकुलता

ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे” – यह केवल एक भजन नहीं, बल्कि हर कृष्ण भक्त के हृदय की वह तीव्र पुकार है, जो श्याम सुंदर से उनकी मधुर मुरली बजाने का आग्रह करती है। यह गीत भक्त और भगवान के उस अनोखे प्रेम संवाद को दर्शाता है, जहाँ भक्त खुद को गोकुल, राधा, ग्वालिन और माखन चोर के इतना समीप पाना चाहता है। हर पंक्ति में कान्हा की लीलाओं, उनकी मुरली, नैनों, गायों, सखियों और राधा के प्रति अद्भुत आसक्ति दिखती है।

इस लेख में हम आपको इस भजन की सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी में, प्रत्येक पंक्ति का भावार्थ, इसके पीछे की कथा, आध्यात्मिक संदेश और जीवन में इसकी प्रासंगिकता से रूबरू कराएँगे। आइए, इस मुरलीधर भजन में झूमें।

📜 भजन लिरिक्स – ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे

ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा... ओ साँवरे
ओ साँवरे मेरे, ओ साँवरे
तान, मीठी सुना... ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा...

तेरे, नैना, गज़ब के, ओ साँवरे
ज़रा, हमसे लड़ा... ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा...

तेरी, मुरली गज़ब की, ओ साँवरे
ज़रा, हमको, सुना... ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा...

तेरी, गऊयाँ गज़ब की, ओ साँवरे
हमें, ग्वालिन बना... ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा...

तेरी, सखियां गज़ब की, ओ साँवरे
रास, हमसे रचा... ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा...

तेरी, राधा गज़ब की, ओ साँवरे
ज़रा, हमसे, मिला... ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा...

तेरी, गोकुल गज़ब की, ओ साँवरे
हमें, गोकुल बुला... ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा...

तेरे, भक्त निराले... ओ साँवरे
हमें, गीता सुना... ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा...

तेरा, झूला गज़ब का, ओ साँवरे
हमें, झूला झुला... ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा...

तेरा, माखन गज़ब का, ओ साँवरे
हमें, मिश्री बना... ओ साँवरे
मेरे, घर आ के खा... ओ साँवरे
ज़रा, मुरली बजा...
राधे राधे

✍️ रचनाकार :- लोक भक्ति (अज्ञात, परंपरागत)

🔍 भजन का अर्थ – प्रत्येक पंक्ति की व्याख्या

यह भजन भक्त के मन की गहरी लालसा को व्यक्त करता है। हर पंक्ति में भक्त कृष्ण से कुछ न कुछ माँगता है:

  • ज़रा मुरली बजा ओ साँवरे: हे साँवले रंग वाले कान्हा, कृपया अपनी मुरली बजाओ। मुरली की ध्वनि भक्त के लिए सबसे प्रिय संगीत है।
  • तान, मीठी सुना... ओ साँवरे: मीठी तान सुनाओ, जो कानों को सुख दे और मन को भावविभोर कर दे।
  • तेरे, नैना, गज़ब के, ओ साँवरे – ज़रा, हमसे लड़ा: तुम्हारी आँखें अद्भुत हैं, हमसे थोड़ी लड़ाई करो (प्रेमपूर्ण झगड़ा)।
  • तेरी, मुरली गज़ब की – ज़रा, हमको सुना: तुम्हारी मुरली अद्भुत है, हमें वह सुनाओ।
  • तेरी, गऊयाँ गज़ब की – हमें, ग्वालिन बना: तुम्हारी गायें अनोखी हैं, हमें अपनी ग्वालिन (गोपी) बना लो।
  • तेरी, सखियां गज़ब की – रास, हमसे रचा: तुम्हारी सखियाँ अद्भुत हैं, हमारे साथ रास रचाओ।
  • तेरी, राधा गज़ब की – ज़रा, हमसे मिला: तुम्हारी राधा अनुपम है, हमें उससे (या हमसे) मिला दो।
  • तेरी, गोकुल गज़ब की – हमें, गोकुल बुला: तुम्हारा गोकुल अद्भुत है, हमें वहाँ बुलाओ।
  • तेरे, भक्त निराले – हमें, गीता सुना: तुम्हारे भक्त विलक्षण हैं, हमें गीता का उपदेश सुनाओ।
  • तेरा, झूला गज़ब का – हमें, झूला झुला: तुम्हारा झूला अद्भुत है, हमें झूला झुलाओ।
  • तेरा, माखन गज़ब का – हमें, मिश्री बना, मेरे घर आ के खा: तुम्हारा माखन अद्भुत है, हमें अपनी मिश्री (मीठा) बनाओ और मेरे घर आकर खाओ।
  • राधे राधे: यह राधा नाम का जयघोष है, जो भक्ति की पराकाष्ठा है।

📖 प्रेरणा और पृष्ठभूमि – मुरली के पीछे की कहानी

यह भजन ब्रज की अनगिनत गोपियों के मन की वही व्यथा गाता है जो श्री कृष्ण की मुरली सुनकर उन्मत्त हो जाती थीं। कहा जाता है कि जब कृष्ण वृंदावन में मुरली बजाते थे, तो न केवल गोपियाँ, बल्कि पशु-पक्षी, नदियाँ, वृक्ष सब मंत्रमुग्ध हो जाते थे। यह गीत उसी मुरली के प्रति एक भक्त की तड़प को दर्शाता है, जो चाहता है कि कृष्ण उसके जीवन में भी उसी प्रकार मुरली बजाएँ और उसे अपनी लीला में डुबो दें।

🌟 कथा – जब भक्त ने सुनी मुरली

एक बार एक साधारण ग्वालिन को कृष्ण की मुरली सुनने की इतनी लालसा हुई कि वह दिन-रात रोती रही। उसने ठान लिया कि जब तक वह मुरली नहीं सुन लेती, वह अन्न-जल त्याग देगी। उसकी व्याकुलता देखकर नंदलाल प्रकट हुए और बोले, “तेरी भक्ति ने मुझे बाँध लिया।” फिर उन्होंने अपनी मुरली उठाई और ऐसी मीठी तान छेड़ी कि सारा ब्रज झूम उठा। उस ग्वालिन को मोक्ष की प्राप्ति हुई।

नैतिक शिक्षा: सच्ची लगन और प्रेम से पुकारने पर स्वयं भगवान अपनी मुरली लेकर प्रकट होते हैं। हमें बस उस व्याकुलता को जगाना है।

🤝 इस भजन का वास्तविक जीवन में महत्व

आज के भागदौड़ भरे जीवन में हर कोई किसी न किसी “मुरली” की तलाश में है – सुख, शांति, प्रेम की। यह भजन हमें याद दिलाता है कि वास्तविक आनंद तब आता है जब हम अपने अंतर्यामी कृष्ण से जुड़ते हैं। “मुरली बजाना” केवल बाँसुरी बजाना नहीं, बल्कि हमारे जीवन में दिव्य संगीत का संचार करना है। इसे गाने से मन में उत्साह, प्रेम और श्री कृष्ण के प्रति समर्पण का भाव जागता है।

🕉️ श्री कृष्ण श्लोक एवं मुरली का महत्व

॥ वेणु गीतम् – भागवत पुराण ॥

वेणुं क्वणन्तमरविन्ददलायताक्षम्
बर्हावतंसमसिताम्बुदसुन्दराङ्गम् ।
कन्दर्पकोटिकमनीयविशेषशोभम्
गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि ॥

अर्थ: जो बाँसुरी बजाते हैं, जिनके कमल के समान नेत्र हैं, जिनके सिर पर मोरपंख है, जिनका शरीर नीले बादल के समान सुंदर है, जो करोड़ों कामदेवों की शोभा रखते हैं, उस आदिपुरुष गोविंद को मैं भजता हूँ।


कृष्ण की मुरली केवल एक वाद्य यंत्र नहीं है – यह प्रेम, आकर्षण और परमानंद का माध्यम है। मुरली की ध्वनि सभी को अपनी ओर खींच लेती है, चाहे वह गोपी हो या गाय, पक्षी हो या नदी। इस भजन में “मुरली बजा” का बार-बार आग्रह इसी परम आकर्षण को प्राप्त करने की तीव्र अभिलाषा है।

✨ इस भजन का आध्यात्मिक संदेश

  • समर्पण का भाव: भक्त खुद को “ग्वालिन”, “मिश्री” बनने को तैयार है – पूर्ण समर्पण की यही भावना मोक्ष की कुंजी है।
  • भगवान से साक्षात् संवाद: यह गीत बताता है कि भक्ति में दूरी नहीं होती; भक्त कृष्ण से “लड़ना”, “मिलना”, “रास रचाना” चाहता है।
  • लीला में डूबना: कृष्ण की लीलाएँ केवल इतिहास नहीं, वे आज भी जीवित हैं। इस भजन को गाकर हम उन लीलाओं का हिस्सा बन सकते हैं।
  • स्वयं को मीठा बनाना: “हमें मिश्री बना” – अर्थात हमारे अहंकार को पिघलाकर प्रेम रूपी मिठास में बदल दो।

🙏 हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे ॥

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: इस भजन के रचयिता कौन हैं?

उत्तर: यह एक लोक भक्ति गीत है, जिसके रचनाकार अज्ञात हैं। यह उत्तर भारत में विशेषकर ब्रज क्षेत्र में पीढ़ियों से गाया जाता रहा है।

प्रश्न 2: क्या यह भजन किसी विशेष अवसर पर गाया जाता है?

उत्तर: यह भजन जन्माष्टमी, होली, राधाष्टमी और श्री कृष्ण से जुड़े किसी भी उत्सव में बड़े प्रेम से गाया जाता है।

प्रश्न 3: “साँवरे” शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर: “साँवरे” का अर्थ है “साँवले रंग वाले” – यह श्री कृष्ण का प्रिय विशेषण है, जो उनके नीले-श्याम वर्ण को दर्शाता है।

प्रश्न 4: क्या मैं इस भजन को अपने दैनिक भजन में शामिल कर सकता हूँ?

उत्तर: बिल्कुल। यह अत्यंत मधुर और सरल भजन है, जिसे सुबह-शाम गाने से मानसिक शांति और कृष्ण प्रेम में वृद्धि होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 15 Aug 2026

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