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Bulake Hamko Banke Bihari Bhajan Lyrics - बुला के हमको बांके बिहारी

2 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: भक्तिलोक टीम
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Bulake Hamko Banke Bihari Bhajan Lyrics - बुला के हमको बांके बिहारी

बुला के हमको बांके बिहारी भजन भक्तों के दिलों में गहरी श्रद्धा जगाता है।

बुला के हमको बांके बिहारी , छुप गए क्यों मुरारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है !
दिखा दो हमको सूरत प्यारी , आये शरण तुम्हारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है !!

ओ रे संवरिया मेरे, मैं तो रंगा हूँ तेरे रंग में , हा रंग में ,
मुझसे मिला के नज़रे , चल दो बिहारी मेरे संग में , हा संग में ,
सेवा करूँगा मैं भी तुम्हारी , बन के तेरा पुजारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ,

ओ रे संवरिया मेरे, दिल में छुपे हैं कई राज रे, कई राज रे ,
कैसे बताऊ मोहन तुमको दिल की सारी बात रे ,सारी बात रे,
दिल में मेरे तुम रहते हो , ओढ़ के कामल कारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ,
हुए ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ,

हँसने लगे हैं मुझपे दुनिया के सारे लोग रे , सारे लोग रे ,
कैसा लगाया तुमने मुझको मुरारी ये रोग रे , ये रोग रे,
रोग ये दिल का तुमने लगाया , सुना के बंशी प्यारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त भगवान कृष्ण से एक गहरी भावनात्मक जुड़ाव व्यक्त कर रहे हैं। 'बुला के हमको बांके बिहारी' इस पंक्ति के माध्यम से भक्त भगवान से आग्रह करते हैं कि वे उन्हें बुलाएं। भक्त की यह इच्छा है कि भगवान उन्हें अपनी दिव्य सूरत दिखाएं। यह बात 'ये पर्दा क्यों किया है' द्वारा फिर से दोहराई गई है, जो भक्ति के मार्ग में आत्मा के पर्दे को दूर करने की इच्छा को दर्शाता है। कृष्ण की लीलाओं में खो जाना और उनकी उपस्थिति का अनुभव करना भक्त की सबसे बड़ी चाहत है।

भजन में 'ओ रे संवरिया मेरे' का प्रयोग भक्त की कृष्ण के प्रति गहरी प्रेम भावना को दर्शाता है। भक्त कहता है कि वह कृष्ण के रंग में रंगा हुआ है, जो एक गहरी भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। 'दिल में छुपे हैं कई राज रे' यह संकेत करता है कि भक्त के दिल में भगवान के प्रति प्रेम और उसके रहस्यों को जानने की इच्छा है। यह भक्ति के मार्ग में एक महत्वपूर्ण पहलू है, जहां भक्त अपने दिल की बात भगवान तक पहुंचाना चाहता है।

भजन की आखिरी पंक्तियों में, भक्त ने इस बात को उजागर किया है कि कैसे दुनिया के लोग उसकी भक्ति पर हंसते हैं। यह एक सामान्य भक्त के अनुभव को दर्शाता है, जो अपनी भक्ति को दुनिया के सामने रखता है। भक्त कहता है कि 'कैसा लगाया तुमने मुझको मुरारी ये रोग', यह संकेत करता है कि भगवान का प्रेम एक रोग की तरह है, जो मन को मोह लेता है। यह भक्ति मार्ग का एक गहरा और अंतर्निहित पहलू है, जहाँ भक्त भगवान के चरणों में समर्पित होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय भक्ति साहित्य में गहरा है। भगवान कृष्ण की लीलाएं और उनकी भक्ति की कहानियाँ भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। 'बुला के हमको बांके बिहारी' भजन भक्तों को भगवान कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम व्यक्त करने का एक अद्भुत माध्यम प्रदान करता है। यह भजन न केवल भक्ति को प्रकट करता है, बल्कि यह भक्त की आत्मा की गहराइयों में जाकर उसे आध्यात्मिकता का अनुभव कराता है।

इस भजन का जाप करने से भक्तों को मानसिक शांति, खुशी और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन होकर, व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मकता और प्रेम का संचार कर सकता है। यह भजन नकारात्मकता को दूर करने और भक्त के मन को शुद्ध करने में मदद करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या शाम को प्रार्थना के समय किया जा सकता है। भक्त को शांत मन और सरल हृदय के साथ इस भजन का जाप करना चाहिए। ध्यान केंद्रित करने के लिए, एक विशेष स्थान का चुनाव करें जहाँ शांति हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम को व्यक्त करना है। भक्त भगवान से अपने दिल की बात बताने की इच्छा रखते हैं।

क्या इस भजन का कोई विशेष महत्व है?

हाँ, यह भजन भक्तों को भगवान कृष्ण की लीलाओं में लीन होने और उनकी कृपा की प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है।

इस भजन का जाप कब करना चाहिए?

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना शुभ माना जाता है, जिससे मन को शांति और सुख मिलता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Aug 2026

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