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भक्ति रस काव्य व भजन

ये प्रार्थना दिल की बेकार नही होगी भजन लिरिक्स (Ye Prathna Dil Ki Bekar Nahi Hogi Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

171 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान की कृपा: हार का भय मिटाने का भजन

अपने आराध्य की भक्ति से सजीव विश्वास जगाएँ, ये प्रार्थना दिल की हर कठिनाई को दूर करने वाली है।

ये प्रार्थना दिल की बेकार नही होगी, पूरा है भरोसा, मेरी हार नही होगी, साँवरे जब तू मेरे साथ है, साँवरे सिर पे तेरा हाथ है।।मैं हार जाऊ ये, कभी हो नही सकता, बेटा अगर दुःख में, पिता सो नही सकता, बेटे की हार तुम्हे, स्वीकार नही होगी, पूरा है भरोसा, मेरी हार नही होगी, साँवरे जब तू मेरे साथ है, साँवरे सिर पे तेरा हाथ है।।तूफ़ान हो पीछे, या काल हो आगे, कह दूंगा मै उनसे, मेरा श्याम है सागे, ऐसे में भी जग की, दरकार नही होगी, पूरा है भरोसा, मेरी हार नही होगी, साँवरे जब तू मेरे साथ है, साँवरे सिर पे तेरा हाथ है।।घनघोर चले आंधी, सूने नज़ारे हो, गर्दिश में भी चाहे, मेरे सितारे हो, नैया कभी मेरी, मझधार नही होगी, पूरा है भरोसा, मेरी हार नही होगी, साँवरे जब तू मेरे साथ है, साँवरे सिर पे तेरा हाथ है।।श्रद्धा समर्पण हो, दिल में अगर प्यारे, ‘मोहित’ भगत के लिए, भगवान खुद हारे, इज्जत जमाने में, शर्मसार नही होगी, पूरा है भरोसा, मेरी हार नही होगी, साँवरे जब तू मेरे साथ है, साँवरे सिर पे तेरा हाथ है।।ये प्रार्थना दिल की, बेकार नही होगी, पूरा है भरोसा, मेरी हार नही होगी, साँवरे जब तू मेरे साथ है, साँवरे सिर पे तेरा हाथ है।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त की अनन्य भक्ति और विश्वास का उल्लेख किया गया है। यह विश्वास दर्शाता है कि जब भक्त अपने भगवान के साथ होता है, तब किसी भी विपत्ति का सामना करना संभव है। भजन की सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति, 'साँवरे जब तू मेरे साथ है', यह बताती है कि भगवान की उपस्थिति से भक्त को अद्वितीय शक्ति प्राप्त होती है। दूसरी पंक्ति, 'पूरा है भरोसा, मेरी हार नही होगी', यह विशेष रूप से बताती है कि जब एक भक्त अपने आराध्य के साथ होते हैं, तब वे हर स्थिति का सामना करने की क्षमता रखते हैं। भजन का आशय है कि विपरीत परिस्थितियों में भी, विश्वास और समर्पण से हार का सामना नहीं करना पड़ेगा।

इस भजन में भक्त द्वारा व्यक्त की गई गहरी भावना यह है कि भगवान का साथ होने पर सभी दुखों और कठिनाइयों को पार कर सकते हैं। 'बेटा अगर दुःख में, पिता सो नही सकता' की पंक्ति पिता और पुत्र के अटूट बंधन का संदर्भ देती है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि जब भक्त भगवान को अपने सहेज और संरक्षक के रूप में देखता है, तब उसे किसी भी चुनौतियों का सामना करने में डर नहीं लगता। इसके आगे 'तूफ़ान हो पीछे, या काल हो आगे' की पंक्ति जीवन की अनिश्चितताओं को दर्शाती है, और इसे समर्पण और विश्वास से पार करने की प्रक्रिया को बताती है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस भजन का आध्यात्मिक पहलू भक्ति मार्ग का सही सही चित्रण करता है। यहाँ पर ईश्वर को 'साँवरे' के रूप में लिखा गया है, जो भक्त के हृदय और आत्मा का निरंतर साक्षी है। भगवान की कृपा से हर भक्त की नैया संकटों से पार होकर सुअवसर का लाभ प्राप्त कर सकती है। इस भक्ति गीत में आत्मसमर्पण की गहरी भावना है, जो बताते हैं कि श्रद्धा और विश्वास के माध्यम से व्यक्ति को अपने आराध्य की असीम कृपा प्राप्त होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस प्रार्थना में निहित भावार्थ भारतीय पौराणिक कथाओं में देखने को मिलता है, विशेषकर महाभारत और रामायण में, जब भक्तों ने अपने ईश्वर पर अडि़ग विश्वास किया। उदाहरण के लिए, भगवान श्री राम के प्रति भगवान हनुमान की निष्ठा इसी प्रकार की प्रार्थना में सन्निहित है, जहाँ अद्वितीय प्रेम, भक्ति और समर्पण से भक्त ने हर चुनौती का सामना किया। यह भजन भी उसी प्रकार की भक्ति की प्रेरणा देता है कि ईश्वर के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्त हर परिस्थिति में विजयी होते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गान करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और समर्पण की भावना जागृत होती है। यह कठिनाइयों का सामना करने में साहस प्रदान करता है और अंतर्मुखी होकर ईश्वर से जुड़ने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त, शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार, तनाव में कमी, और ध्यान में गहराई भी अनुभव होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह या शाम के समय करना उत्तम रहता है। पूजा के स्थान पर दीप जलाना, फल, फूल अर्पित करना और भक्तिपूर्ण मनोदशा में रहना उचित है। आसीन मुद्रा में ध्यान केंद्रित करके भजन का पाठ करना, और हर पंक्ति पर ध्यान देकर गुनगुनाना, आत्मा को हल्का और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

ये भजन किस प्रकार की प्रार्थना है?

यह भजन भक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है, जो भक्त को सभी विपत्तियों के खिलाफ ईश्वर के साथ रहने के लिए प्रेरित करता है।

भजन गाने का सही समय क्या है?

सुबह या शाम का समय इस भजन का जप करने के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है, जब मन शांति में होता है।

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का केंद्रीय संदेश है कि भक्ति और विश्वास से हम भगवान के सानिध्य में किसी भी संकट को पार कर सकते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 17 Aug 2026

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