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भक्ति रस काव्य व भजन

Bula Ke Hamko Banke Bihari Lyrics - बुला के हमको बांके बिहारी

15 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: भक्तिलोक टीम
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Bula Ke Hamko Banke Bihari Lyrics - बुला के हमको बांके बिहारी

बुला के हमको बांके बिहारी भजन भक्तों के दिल की गहराई को छूता है।

बुला के हमको बांके बिहारी , छुप गए क्यों मुरारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है !
दिखा दो हमको सूरत प्यारी , आये शरण तुम्हारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है !!

ओ रे संवरिया मेरे, मैं तो रंगा हूँ तेरे रंग में , हा रंग में ,
मुझसे मिला के नज़रे , चल दो बिहारी मेरे संग में , हा संग में ,
सेवा करूँगा मैं भी तुम्हारी , बन के तेरा पुजारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ,

ओ रे संवरिया मेरे, दिल में छुपे हैं कई राज रे, कई राज रे ,
कैसे बताऊ मोहन तुमको दिल की सारी बात रे ,सारी बात रे,
दिल में मेरे तुम रहते हो , ओढ़ के कामल कारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है , हुए
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ,

हँसने लगे हैं मुझपे दुनिया के सारे लोग रे , सारे लोग रे ,
कैसा लगाया तुमने मुझको मुरारी ये रोग रे , ये रोग रे,
रोग ये दिल का तुमने लगाया , सुना के बंशी प्यारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान श्री कृष्ण की कृपा और उनके दर्शन की इच्छा है। 'बुला के हमको बांके बिहारी' पंक्ति में भक्त भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि वो उन्हें बुलाए। भक्त का मन भगवान की सूरत देखने के लिए तड़पता है। यह भजन भक्त की आस्था और प्रेम को व्यक्त करता है। इसके माध्यम से भक्त भगवान के प्रति अपनी गहरी भावनाओं का इजहार कर रहे हैं। भगवान श्री कृष्ण को मुरारी के नाम से भी जाना जाता है, जो उनके लीला और माया का प्रतीक है। यह भजन भक्त के मन में भगवान के प्रति अपार प्रेम का संकेत देता है।

भावार्थ में, 'ये पर्दा क्यों किया है' का अर्थ है कि भक्त भगवान से पूछ रहा है कि क्यों उन्होंने अपने दर्शन से उन्हें छिपा रखा है। यह पंक्ति भक्त की बेचैनी को दर्शाती है। भक्त भगवान के रंग में रंगा हुआ है और चाहता है कि भगवान उसे अपने साथ ले चलें। यहां पर भक्त की भक्ति और समर्पण की भावना स्पष्ट होती है। जब भक्त कहता है कि 'दिल में छुपे हैं कई राज', तो वह भगवान को अपने दिल की सारी बातें बताने की इच्छा व्यक्त कर रहा है। यह प्रेम और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है जो भक्त और भगवान के बीच के संबंध को दर्शाता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का पालन करते हुए भक्त भगवान के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को दर्शा रहा है। भक्त का मन भगवान की कृपा और उपस्थिति की कामना करता है। यह भजन दर्शाता है कि कैसे भक्ति में एक गहराई होती है जो भक्त को भगवान की ओर खींचती है। भक्त के मन में भगवान के प्रति सच्ची भक्ति और प्रेम की भावना होती है, जो उसे हर स्थिति में भगवान की ओर खींचती है। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति का मार्ग हमेशा प्रेम और समर्पण से भरा होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है। यह भजन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। भगवान श्री कृष्ण की महिमा को दर्शाते हुए, यह भजन भक्तों में एकता और प्रेम की भावना को बढ़ाता है। इसे सुनने और गाने से भक्तों को मानसिक शांति और संतोष मिलता है। जैसे-जैसे भक्त इस भजन को गाते हैं, वे भगवान के साथ एक गहरे संबंध का अनुभव करते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों में इस भजन का स्थान महत्वपूर्ण है, और इसे विशेष अवसरों पर गाया जाता है।

इस भजन का जाप करने से मन की शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। भक्तों का मन भगवान की भक्ति में लीन हो जाता है, जिससे उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इस भजन का नियमित पाठ करने से भक्तों की आस्था और विश्वास मजबूत होते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन की साधना सुबह या शाम के समय की जा सकती है। भक्त को एक शांत स्थान पर बैठकर ध्यान लगाना चाहिए और भजन को ध्यानपूर्वक गाना चाहिए। इस समय भक्त को अपने मन में भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना रखनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का कोई विशेष अर्थ है?

हाँ, इस भजन में भगवान श्री कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति की भावना व्यक्त की गई है।

कब इस भजन का पाठ करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना सबसे अच्छा होता है।

क्या इस भजन को सुनने से कोई लाभ होता है?

इस भजन को सुनने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Aug 2026

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