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तुलसी माता के भजन (Tulsi Mata Ke Bhajan Lyrics in Hindi) - Anu Dubey Tulasi Mata Bhajan - BhaktiLok

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

तुलसी माता के भजन  (Tulsi Mata Ke Bhajan Lyrics in Hindi) - Anu Dubey Tulasi Mata Bhajan - BhaktiLok


तुलसी माता के भजन  (Tulsi Mata Ke Bhajan Lyrics in Hindi) - Anu Dubey Tulasi Mata Bhajan - BhaktiLok


सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

तुलसी माता के भजन  (Tulsi Mata Ke Bhajan Lyrics in Hindi) - 


जय जय तुलसी माता
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता
सबकी वर माता ॥
जय तुलसी माता…


सब योगों से ऊपर
सब रोगों से ऊपर ।
रज से रक्ष करके
सबकी भव त्राता ॥
जय तुलसी माता…

बटु पुत्री है श्यामा
सूर बल्ली है ग्राम्या ।
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे
सो नर तर जाता ॥
जय तुलसी माता…

तुलसी महारानी है भजन

हरि के शीश विराजत
त्रिभुवन से हो वंदित ।
पतित जनों की तारिणी
तुम हो विख्याता ॥
जय तुलसी माता…

लेकर जन्म विजन में
आई दिव्य भवन में ।
मानव लोक तुम्हीं से
सुख-संपति पाता ॥
जय तुलसी माता…

हरि को तुम अति प्यारी
श्याम वर्ण सुकुमारी ।
प्रेम अजब है उनका
तुमसे कैसा नाता ॥
हमारी विपद हरो तुम
कृपा करो माता ॥…२ ….
जय तुलसी माता…

हे तुलसी मैया सदा कृपा बनाये रखना लिरिक्स
जय जय तुलसी माता
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता
सबकी वर माता||

जय तुलसी माता…

Tulsi Vivah Bhajan Lyrics
तुलसी रानी का विवाह है
सब बधाई गाओ री हां बधाई गाओ री।
शनिग्राम जी को फूलो से
सजाकर लाओ जी।
शनिग्राम जी को फूलो से
सजाकर लाओ जी।।

तुलसी रानी का विवाह है
सब बधाई गाओ री हां बधाई गाओ री ।
शनिग्राम जी को फूलो से सजाकर लाओ री ।
शनिग्राम जी को फूलो से सजाकर लाओ री ।
सजाकर लाओ री  हां सजाकर लाओ री ।।

तुलसी रानी का विवाह है
सब बधाई गाओ री हां बधाई गाओ री ।
शनिग्राम जी को फूलो से सजाकर लाओ री ।
शनिग्राम जी को फूलो से सजाकर लाओ री ।।

कार्तिक मास ऐकादशी शुभघड़ी आई ।
कार्तिक मास ऐकादशी शुभघड़ी आई ।
हरी भरी धरती भी मन ही मन हरसाई ।
हरी भरी धरती भी मन ही मन हरसाई ।।

कार्तिक मास ऐकादशी शुभघड़ी आई ।
हरी भरी धरती भी मन ही मन हरसाई ।
हरी पटरानी अब यू ना शरमाओ री
ना तुम लहराई री ।
शनिग्राम जी को फूलो से सजाकर लाओ री ।।

मंगल कलश लिए सखी द्वारे पर है डोले ।
मंगल कलश लिए सखी द्वारे पर है डोले ।
तुलसी देवी तुम्हे नमन है हम सब अब ये बोले ।
तुलसी देवी तुम्हे नमन है हम सब अब ये बोले ।।

मंगल कलश लिए सखी द्वारे पर है डोले ।
तुलसी देवी तुम्हे नमन है हम सब अब ये बोले ।
सजके अंगना में सदा दरश दिखलाओ री
दरश दिखलाओ री ।
शनिग्राम जी को फूलो से सजाकर लाओ री ।
सजाकर लाओ री  सजाकर लाओ री ।।

तुलसी रानी का विवाह है
सब बधाई गाओ री हां बधाई गाओ री ।
शनिग्राम जी को फूलो से सजाकर लाओ री ।
शनिग्राम जी को फूलो से सजाकर लाओ री ।
शनिग्राम जी को फूलो से सजाकर लाओ री ।।

Tulsi Mata Ke Bhajan Lyrics
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना 
पानी के बिना राधा रानी के बिना 
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना 
पानी के बिना राधा रानी के बिना ।।

मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना 
पानी के बिना राधा रानी के बिना 
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना 
पानी के बिना राधा रानी के बिना ।।

ताजा पानी की भरी ए बाल्टी 
ताजा पानी की भरी ए बाल्टी 
ताजा पानी की भरी ए बाल्टी 
ताजा पानी की भरी ए बाल्टी ।।

न्हावे ना श्याम राधा रानी के बिना 
न्हावे ना श्याम राधा रानी के बिना 
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना ।।

न्हावे ना श्याम राधा रानी के बिना 
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना
पानी के बिना राधा रानी के बिना 
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना ।।

मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना
पानी के बिना राधा रानी के बिना ।।

पाट पटम्बर टसरी की धोती
पाट पटम्बर टसरी की धोती
पहरे ना श्याम राधा रानी के बिना
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना ।।

पहरे ना श्याम राधा रानी के बिना
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना 
पानी के बिना राधा रानी के बिना 
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना ।।

घिस घिस चन्दन भरी कटोरी
घिस घिस चन्दन भरी कटोरी
घिस घिस चन्दन भरी कटोरी
घिस घिस चन्दन भरी कटोरी ।।

तिलक ना लावे श्याम राधा के बिना
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना
तिलक ना लावे श्याम राधा के बिना।
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना।।

पानी के बिना राधा रानी के बिना
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना 
पानी के बिना राधा रानी के बिना ।।

माखन मिश्री की भरी कटोरी
भोग ना लावे राधा के बिना 
माखन मिश्री की भरी कटोरी
भोग ना लावे राधा के बिना 
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना ।।

भोग ना लावे राधा के बिना 
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना 
पानी के बिना राधा रानी के बिना
मेरी सूख गई तुलसा पानी के बिना ।।


🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "तुलसी माता के भजन (Tulsi Mata Ke Bhajan Lyrics in Hindi) - Anu Dubey Tulasi Mata Bhajan - BhaktiLok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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