आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Holi Bhajan

Rang Barse Brij Mein Gulal Barse Lyrics (Holi Bhajan) – रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे हो रंग बरसे

337 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🎨 रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे – होली विशेष भजन

(Rang Barse Brij Mein Gulal Barse) – Holi Bhajan 2026

गायक : देवाशीष जी & निकिता जी || रचनाकार : राधेय संकीर्तन

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: देवाशीष जी & निकिता जी
✍️ लेखक: राधेय संकीर्तन
🏷️ श्रेणी: होली भजन / ब्रज होली

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे हो रंग बरसे,
होरी आई होरी आई होरी आई,
होरी आई होरी आई होरी आई॥

॥ अंतरा १ ॥

धूम मचावे देखो आए बनवारी,
मस्ती चढ़ी है आज रंग की फुवारी,
गोपी ग्वाला संग पूरो ब्रज मटके,
हो रंग बरसे...

॥ अंतरा २ ॥

लठमार खेले होरी खेलें लडुओं से,
डूबे बनवारी आज पूरे फूलन से,
शोर मचे हो हो होरी, हो रंग बरसे...

॥ अंतरा ३ ॥

कान्हा आए लेके टोली, मचो शोर है होरी होरी,
बिगरो मेरो श्याम सलोनो, बिगरी है ब्रजभानु किशोरी,
बरसाने में वृंदावन में होरी होरी होरी,
खेले नंद के लाला होरी, खेले होरी राधा गोरी॥

॥ अंतरा ४ ॥

नीले पीले लाल गुलाल मारे रसिया,
ऐसों डारे रंग के छूटे नाही रसिया,
मारी पिचकारी टेढ़ो करके, हो रंग बरसे...

॥ अंतरा ५ ॥

अबीर उड़ाके नाचे बनवारी,
झूमे गोपी ग्वाला सारे, झूमे गिरधारी,
आज गिरधारी ने अति ही कर डारी,
ऐसी खेली होरी मोहे रंग दई सारी॥

॥ अंतरा ६ ॥

ऐसे डूबे कान्हा संग सारे होरी में,
भूले कान्हा संग सब हारे होरी में,
बिछे रंग उड़े रंग, रंग चहुँ ओरी,
आज ब्रज मची है भारी होरी॥

॥ अंतरा ७ ॥

ब्रज की है होरी, ब्रजवासी पूरे होरी हो,
रंगे हैं रंगीले पूरे नाचे नर नारी हो,
नाचे है अबीर उड़ाके गिरधारी हो,
आज ब्रज में हो हो हो होरी हो॥

होरी है होरी है ब्रज पूरो गाए,
राधे-राधे नाम की रटना लगाएँ,
होरी में मगन होके नाचे सबरे हो रंग बरसे...
रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे हो रंग बरसे॥

🎤 गायक :- देवाशीष जी & निकिता जी

✍️ लेखक :- राधेय संकीर्तन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन ब्रज की होली के उल्लास, रंग-गुलाल, और राधा-कृष्ण के प्रेममय खेल का सजीव चित्रण करता है। “रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे” – अर्थात आज ब्रजधाम में चारों ओर रंग और गुलाल की बरसात हो रही है। होली आ गई है, और इस उमंग में गोपी-ग्वाले, कान्हा-बनवारी सभी डूबे हुए हैं।

“लठमार खेले होरी” से बरसाने की प्रसिद्ध लठमार होली की ओर संकेत है, जहाँ गोपियाँ कान्हा को लाठियों से मारती हैं और वे ढाल बचाकर रंग डालते हैं। “बरसाने में वृंदावन में होरी होरी” पंक्ति में दोनों धामों की होली के मिलन को दर्शाया गया है।

भजन में रंगों के माध्यम से भक्ति का अनूठा रस व्यक्त हुआ है – जैसे अबीर-गुलाल उड़े, वैसे ही भक्त के हृदय में प्रेम का रंग घोल दिया गया है। कान्हा की पिचकारी और टेढ़ी-बाँकी छवि ने सबको रंग दिया है। अंत में कहा गया है कि सारा ब्रज “राधे-राधे” के नाम में मगन होकर झूम रहा है।

🎉 ब्रज की होली – एक अलौकिक उत्सव

ब्रज की होली का अपना ही अलौकिक महत्व है। यह माना जाता है कि यहाँ होली का आरंभ स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। होली के अवसर पर वृंदावन, मथुरा, बरसाना, नंदगाँव में अलग-अलग प्रकार की होली खेली जाती है – फूलों की होली, लड्डुओं की होली, अबीर-गुलाल की होली और प्रसिद्ध लठमार होली।

बरसाने की लठमार होली विश्वविख्यात है, जहाँ गोपियाँ लाठियों से कृष्ण और उनके सखाओं को मारती हैं और वे ढाल बचाकर रंग डालते हैं। वृंदावन की होली में बैंकों बिहारी मंदिर में फूलों की होली होती है, जहाँ भक्त झूम उठते हैं।

यह भजन उसी दिव्य होली के रस में सराबोर कर देता है। “रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे” की धुन आज हर भक्त के मुँह पर गूँजती है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

💖 प्रेम और उल्लास का संगम

यह भजन केवल रंगों का गान नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के प्रेम और ब्रजवासियों की अनन्य भक्ति की अभिव्यक्ति है। होली के रंगों में सब एक समान हो जाते हैं – चाहे गोपी हो या ग्वाला, नर हो या नारी।

✨ धार्मिक आस्था और संस्कृति

ब्रज की होली श्रद्धा और संस्कृति का अनूठा संगम है। लाखों भक्त होली पर ब्रज यात्रा करते हैं और इस भजन के माध्यम से उसी आनंद की अनुभूति घर बैठे होती है।

🎯 संदेश : जैसे ब्रज में रंग और गुलाल बरसता है, वैसे ही हमारे जीवन में भी प्रभु के प्रेम का रंग बरसे। सच्चे भाव से जो भी होली में रंगा, वह कान्हा का हो गया।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इति ब्रजहोलीभजनम् ॥
॥ राधे राधे बरसो रंग, बरसो गुलाल ॥

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });