आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२३ PM | सूर्यास्त: ०५:४४ AM
Parvati Stotram

Shree Vindheshwari Mata Chalisa l माँ विन्धेश्वरी चालीसा - BhaktiLok

71 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें



वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

Shree Vindheshwari Mata Chalisa l माँ विन्धेश्वरी चालीसा - BhaktiLok


Shree Vindheshwari Mata Chalisa l माँ विन्धेश्वरी चालीसा

 दोहा || नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब। सन्तजनों के काज में करती नहीं विलम्ब॥ || चौपाई || जय जय जय विन्ध्याचल रानी। आदि शक्ति जगबिदित भवानी॥ सिंह वाहिनी जय जगमाता। जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता॥ 1॥ कष्ट निवारिनि जय जग देवी। जय जय संत असुर सुरसेवी॥ महिमा अमित अपार तुम्हारी। सेष सहस मुख बरनत हारी॥ 2॥ दीनन के दु:ख हरत भवानी। नहिं देख्यो तुम सम कोउ दानी॥ सब कर मनसा पुरवत माता। महिमा अमित जगत विख्याता॥ 3॥ जो जन ध्यान तुम्हारो लावे। सो तुरतहिं वांछित फल पावे॥ तू ही वैस्नवी तू ही रुद्रानी। तू ही शारदा अरु ब्रह्मानी॥ 4॥ रमा राधिका स्यामा काली। तू ही मात संतन प्रतिपाली॥ उमा माधवी चंडी ज्वाला। बेगि मोहि पर होहु दयाला॥ 5॥ तुम ही हिंगलाज महरानी। तुम ही शीतला अरु बिज्ञानी॥ तुम्हीं लक्ष्मी जग सुख दाता। दुर्गा दुर्ग बिनासिनि माता॥ 6॥ तुम ही जाह्नवी अरु उन्नानी। हेमावती अंबे निरबानी॥ अष्टभुजी बाराहिनि देवा। करत विष्णु शिव जाकर सेवा॥ 7॥ चौसट्टी देवी कल्याणी। गौरि मंगला सब गुन खानी॥ पाटन मुंबा दंत कुमारी। भद्रकाली सुन विनय हमारी॥ 8॥ बज्रधारिनी सोक नासिनी। आयु रच्छिनी विन्ध्यवासिनी॥ जया और विजया बैताली। मातु संकटी अरु बिकराली॥ 9॥ नाम अनंत तुम्हार भवानी। बरनै किमि मानुष अज्ञानी॥ जापर कृपा मातु तव होई। तो वह करै चहै मन जोई॥ 10॥ कृपा करहु मोपर महारानी। सिध करिये अब यह मम बानी॥ जो नर धरै मातु कर ध्याना। ताकर सदा होय कल्याणा॥ 11॥ बिपत्ति ताहि सपनेहु नहि आवै। जो देवी का जाप करावै॥ जो नर कहे रिन होय अपारा। सो नर पाठ करे सतबारा॥ 12॥ नि:चय रिनमोचन होई जाई। जो नर पाठ करे मन लाई॥ अस्तुति जो नर पढै पढावै। या जग में सो बहु सुख पावै॥ 13॥ जाको ब्याधि सतावै भाई। जाप करत सब दूर पराई॥ जो नर अति बंदी महँ होई। बार हजार पाठ कर सोई॥ 14॥ नि:चय बंदी ते छुटि जाई। सत्य वचन मम मानहु भाई॥ जापर जो कुछ संकट होई। नि:चय देबिहि सुमिरै सोई॥ 15॥ जा कहँ पुत्र होय नहि भाई। सो नर या विधि करै उपाई॥ पाँच बरस सो पाठ करावै। नौरातर महँ बिप्र जिमावै॥ 16॥ नि:चय होहि प्रसन्न भवानी। पुत्र देहि ताकहँ गुन खानी॥ ध्वजा नारियल आन चढावै। विधि समेत पूजन करवावै॥ 17॥ नित प्रति पाठ करै मन लाई। प्रेम सहित नहि आन उपाई॥ यह श्री विन्ध्याचल चालीसा। रंक पढत होवै अवनीसा॥ 18॥ यह जनि अचरज मानहु भाई। कृपा दृष्टि जापर ह्वै जाई॥ जय जय जय जग मातु भवानी। कृपा करहु मोहि पर जन जानी॥ 19॥ || इति श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा समाप्त 

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "Shree Vindheshwari Mata Chalisa l माँ विन्धेश्वरी चालीसा - BhaktiLok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!