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Parvati Stotram

श्याम प्रेमी की दर्द भरी पुकार...आजा श्याम | Aaja shyam | Khatu Shyam Sad Bhajan | Manish Bairagi - BhaktiLok

90 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें



सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

श्याम प्रेमी की दर्द भरी पुकार...आजा श्याम | Aaja shyam | Khatu Shyam Sad Bhajan | Manish Bairagi - BhaktiLok


श्याम प्रेमी की दर्द भरी पुकार...आजा श्याम | Aaja shyam | Khatu Shyam Sad Bhajan | Manish Bairagi

रोज़ नए भजन सुनने के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करे: https://ift.tt/30yw1ps For latest bhajan, aarti, chalisa. subscribe to our channel: https://ift.tt/30yw1ps Song: Aaja Shyam Singer: Manish Bairagi Lyricist: Ruby Garg (Ruby Ridham) 9717612115 Video: Anil Kumar Category: Hindi Devotional ( Shyam Bhajan) Producers: Amresh Bahadur, Ramit Mathur Label: Yuki ******************************************** Connect with us on : Facebook - https://ift.tt/2QHzI54 Youtube - https://www.youtube.com/c/YukiMusicCompany Twitter - https://twitter.com/YukiCassettes JioSaavn - https://ift.tt/2CcHMIU ******************************************** अपने रिकार्डेड भजन हमारे नेटवर्क से रिलीज़ करवाने के लिए हमे व्हाट्सप्प करे +91-9810017413 To release your recorded song on our network kindly whatsapp on +91-9810017413 Lyrics: दिल में कितने तूफ़ान रोज़ उठते मेरे क्या कहूं मन की पीड़ा को कब तक बता दे यूँ ही मैं सहुँ झूठा तेरा संसार देदे थोड़ा सा तू प्यार ओ श्याम मेरी बिगड़ी को आके बना जा हारे के सहारा आजा दिल रो रो पुकारे आजा विनती सुनलो सरकार आया हार के मैं द्वार हारे के सहारे आजा ............... आजा श्याम ......आजा श्याम........आजा श्याम ......आजा श्याम....... संभालना चाहूँ अगर मारता ठोकरें ये जहां लड़खड़ाता फिरूं क्यों ना देते हो तुम मुझपे ध्यान मेरा टूटा जाए धीर मेरे नैन बहाएं नीर ओ श्याम कोई राह तू ही बतला जा विनती सुनलो सरकार आया हार के मैं द्वार हारे के सहारे आजा ............... आजा श्याम ......आजा श्याम कुछ तो कह दे ज़रा कैसे होगी गुज़र सांवरे रस्ता सुनसान है संग जो तेरा नहीं सांवरे छाया घोर अन्धकार चलना हुआ दुश्वार ओ श्याम मेरी नैया को पार लगा जा विनती सुनलो सरकार आया हार के मैं द्वार हारे के सहारे आजा ............... आजा श्याम ......आजा श्याम........ तुझसे मिलने की चाह मेरे मन में बड़ी मेरे श्याम मेरे मुख में रहे हर घडी तेरा नाम तेरा नाम आता तेरे दरबार करता तेरी जय जैकार ओ श्याम रूबी रिधम को दरश दिखा जा विनती सुनलो सरकार आया हार के मैं द्वार हारे के सहारे आजा ............... आजा श्याम ......आजा श्याम........


🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "श्याम प्रेमी की दर्द भरी पुकार...आजा श्याम | Aaja shyam | Khatu Shyam Sad Bhajan | Manish Bairagi - BhaktiLok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 13 Aug 2026

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