मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं (Kabhi Pyase Ko Pani Pilaya Nahi Lyrics in Hindi) - Bhakti Songs - BhaktiLok
कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं (Kabhi Pyase Ko Pani Pilaya Nahi Lyrics in Hindi) - Bhakti Songs -
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं
कभी प्यासे को पानी पिलाया नहींबाद अमृत पिलाने से क्या फायदाकभी गिरते हुए को उठाया नहींबाद आंसू बहाने से क्या फायदाकभी प्यासे को पानी पिलाया नहींबाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।।ओ ओ ओ…मैं तो मंदिर गया पूजा आरती कीपूजा करते हुए ये ख्याल आ गयामैं तो मंदिर गया पूजा आरती कीपूजा करते हुए ये ख्याल आ गयाकभी माँ बाप की सेवा की ही नहींसिर्फ पूजा के करने से क्या फायदाकभी प्यासे को पानी पिलाया नहींबाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।।मैं तो सतसंग गया गुरूवाणी सुनीगुरू वाणी को सुनकर ख्याल आ गयाहो हो हो…मैं तो सतसंग गया गुरूवाणी सुनीगुरू वाणी को सुनकर ख्याल आ गयाजन्म मानव का लेके दया न करीफिर मानव कहलाने से क्या फायदाकभी प्यासे को पानी पिलाया नहींबाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।।ओ ओ ओ…मैंने दान किया मैंने जपतप कियादान करते हुए ये ख्याल आगयाहो मैंने दान किया मैंने जपतप कियादान करते हुए ये ख्याल आगयाकभी भूखे को भोजन खिलाया नहींदान लाखो का करने से क्या फायदाकभी प्यासे को पानी पिलाया नहींबाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।।गंगा नहाने हरिद्वार काशी गयागंगा नहाते ही मन में ख्याल आ गयाहो ओ…हो गंगा नहाने हरिद्वार काशी गयागंगा नहाते ही मन में ख्याल आ गयातन को धोया मगर मन को धोया नहींफिर गंगा नहाने से क्या फायदाकभी प्यासे को पानी पिलाया नहींबाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।।मैने वेद पढ़े मैने शास्त्र पढ़ेशास्त्र पढते हुए ये ख्याल आ गयाहो ओ…मैने वेद पढ़े मैने शास्त्र पढ़ेशास्त्र पढते हुए ये ख्याल आ गयामैने ज्ञान किसी को बांटा नहींफिर ज्ञानी कहलाने से क्या फायदाकभी प्यासे को पानी पिलाया नहींबाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।।ओ ओ ओ…मात पिता के चरणों में चारो धाम हैंआजा आजा यही मुक्ति का धाम हैमात पिता के चरणों में चारो धाम हैंआजा आजा यही मुक्ति का धाम हैपिता माता की सेवा की ही नहींफिर तिरथो मे जाने से क्या फायदाकभी प्यासे को पानी पिलाया नहींबाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।।कभी गिरते हुए को उठाया नहींबाद आंसू बहाने से क्या फायदा।।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं (Kabhi Pyase Ko Pani Pilaya Nahi Lyrics in Hindi) - Bhakti Songs - BhaktiLok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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