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Parvati Stotram

जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते | Jeete Jeete Tere Dam Par Jeete Shyam Bhajan | by Harsh Vashisht - Bhaktilok

76 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री श्याम भजन: जीवन की हर साँस में प्रेम

इस भजन में श्री श्याम की भक्ति का अद्भुत संचार है, जो हर हृदय को व्याकुलता से राहत देता है।

जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते | जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते | पहले तुमने दिया है हमें जीने का सलीका | जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते | नित नये रूप में तू करता है अवतार | जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते | तू है सच्चा, तू है सच्चा साईं | जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते | संसार से तेरा नाता है बड़ा ही गहरा | जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते | करता है जो तेरा भजन, वो ही है शंकर | जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते | सच्चे प्रेम में हर एक है समाहित | जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते | कर्मों का मान, तेरा ही आश्रय | जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते |

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के मुख्य संदेश में जीवन के अनंत स्रोत स्वरूप भगवान श्री श्याम की महिमा का गुणगान है। 'जीते जीते जीते तेरे दम पे जीते' की पंक्ति इस भाव को स्पष्ट करती है कि भगवती कृपा से ही मनुष्य का जीवन संपूर्ण होता है। भक्त अपनी सभी कठिनाइयों को भूलकर भगवान में आश्रय लेते हैं। भजन का आरंभ प्रेम और समर्पण से होता है, जिसमें प्रवाहपूर्ण भावनाएँ समाहित हैं। जब भक्त कहता है, 'पहले तुमने दिया है हमें जीने का सलीका', तब यह दर्शाया गया है कि जीवन का वास्तविक सुख और खुशहाली केवल ईश्वर से प्राप्त होती है।

भजन के भावार्थ में भक्त की गहरी भावनाएँ व्यक्त होती हैं। यहाँ भक्त श्री श्याम को न केवल भगवान बल्कि उनके साथ की अनुपम अनिवार्यता के रूप में देखता है। 'तू है सच्चा, तू है सच्चा साईं' इस पंक्ति में भक्त को विश्वास है कि भगवान ही उनके सभी विपत्तियों का हल हैं। भावों का यह गहराई में प्रवेश करता है, जब भक्त भाव-विभोर होकर जीवन की संजीवनी शक्ति के रूप में अपने इष्ट देवता की महिमा बयान करता है। इस तरह, यह भजन कठिनाइयों में जीने की प्रेरणा देता है, यही तो सच्चा भक्ति मार्ग है।

भक्ति मार्ग का यह भजन सिखाता है कि जीवन में संपूर्णता केवल ईश्वर में विश्वास के द्वारा ही प्राप्त होती है। हर सांस में अगर भगवती का नाम होगा तो जीवन में अनेकों बुराइयों और समस्याओं से निजात मिल सकता है। संत वांग्विशारद के सन्देश के अनुसार, भगवान का नाम लेने से ही भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह भजन हमें यह समझाता है कि जीवन में उत्पन्न सभी सांसारिक दुःखों के साए में भी यदि हम ईश्वर की भक्ति में लीन रहें तो आत्मा को शांति और ज्योति प्राप्त होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व धार्मिक मान्यता और भक्ति परंपरा में गहराई तक फैला हुआ है। इसे गाते समय भक्त अपने जीवन में सुख और साधना की भावना विकसित करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में आचार्य बताते हैं कि भगवान श्री श्याम, जो अनंत प्रेम और पारस्परिकता के प्रतीक हैं, अपने भक्तों के प्रति अनुग्रह रखते हैं। धार्मिक ग्रंथों जैसे पुराणों में यह वर्णित है कि श्याम भक्तों की आस्था और श्रद्घा को अनंत शक्ति देने में सक्षम होते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मन में शांति, आत्मविश्वास, और सकारात्मकता का संचार होता है। मानसिक तनाव के समय इस भजन का समर्पण व्यक्ति को मानसिक दृढ़ता प्रदान करता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह भजन ईश्वर के प्रति निबद्धता और प्रेम को गहराई से महसूस कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

यह भजन सुबह या शाम के समय गाने की आदर्श है, जब मन शांत और एकाग्र हो। ध्यान मुद्रा में बैठकर या एक diya जलाकर इस भजन का पाठ करना चाहिए। भजन का गायन करते समय भक्त को अपने हृदय में पूरी श्रद्धा और समर्पण रखना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि जीवन की मुख्य शक्ति केवल भगवान श्री श्याम की कृपा से ही मिलती है। भक्त जो श्री श्याम की भक्ति करता है, उसे सभी विकट समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

कैसे इस भजन का जाप हमारे जीवन में बदलाव ला सकता है?

इस भजन का जाप नियमित रूप से करने से मन में शांति, विश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है। यह भक्तों को अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है।

क्या यह भजन किसी विशेष अवसर पर गाया जा सकता है?

जी हां, यह भजन विशेष अवसरों जैसे पूजा, संक्रांति, या किसी धार्मिक आयोजन पर गाने के लिए आदर्श है। इससे भक्तों की भक्ति और श्रद्धा प्रकट होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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