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Parvati Stotram

मत घबरा मन बाँवरे है श्याम तेरा रखवाला |Mat Ghabra Man Bawre Hai Shyam Tera Rakhwala | Upasana Mehta-Bhaktilok

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम का रखवाला: आस्था और संजीवनी

हर हृदय को शान्ति और प्रेम से भरने वाला यह भजन मन को समर्पित है।

मत घबरा मन बाँवरे है श्याम तेरा रखवाला |मत घबरा मन बाँवरे है श्याम तेरा रखवाला |मत घबरा मन बावरे,है श्याम तेरा रखवाला,है श्याम तेरा रखवाला,साथ तुम्हारा कभी ना छोड़े,मोहन मुरली वाला,मत घबरा मन बावरे,है श्याम तेरा रखवाला,है श्याम तेरा रखवाला।।करे कृपा जब सांवरा,सब संकट कट जाए,आग लगी चहुँ ओर हो,तुझपर आंच ना आए,करुणा की जब वर्षा होती,क्या कर सकती ज्वाला,मत घबरा मन बावरें,है श्याम तेरा रखवाला,है श्याम तेरा रखवाला।।जग वाले मुँह मोड़ ले,दुश्मन बने जमाना,ये तू निश्चय जान ले,निर्बल का बल कान्हा,तुफानो में दीपक जलता,कौन बुझाने वाला,मत घबरा मन बावरें,है श्याम तेरा रखवाला,है श्याम तेरा रखवाला।।तू कमजोर नहीं है,तेरे साथ कन्हैया,तेरे ऊपर पड़ रही,मोर मुकुट की छैया,‘बिन्नू’ इस शीतल छैया में,फेर श्याम की माला,मत घबरा मन बावरें,है श्याम तेरा रखवाला,है श्याम तेरा रखवाला।।मत घबरा मन बावरे,है श्याम तेरा रखवाला,है श्याम तेरा रखवाला,साथ तुम्हारा कभी ना छोड़े,मोहन मुरली वाला,मत घबरा मन बावरें,है श्याम तेरा रखवाला,है श्याम तेरा रखवाला।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय है भक्त का अपने भगवान श्याम पर अटूट विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव। "मत घबरा मन बावरे" से यह बात स्पष्ट होती है कि भक्त किसी भी प्रकार की कठिनाई में जब मन से डरता है, तब श्याम भगवान की कृपा उसके लिए आश्रय का कार्य करती है। इस भजन में कहा गया है कि जब श्याम, या श्रीकृष्ण, कृपा करते हैं तो संकट दूर हो जाते हैं। यहाँ यह भी बताया गया है कि अगर चारों ओर आग लगी हो, तब भी आंच भक्त पर नहीं आती। इस स्थिति में भक्त का अपने भगवान के प्रति भरोसा दृढ़ हो जाता है। यह विश्वास सामाजिक और व्यक्तिगत समस्याओं में शांति प्रदान करने वाला होता है।

इस भजन का भावार्थ भक्त की वह भावना है जिसमें वह अधिकतर जीवन के उतार-चढ़ाव देख रहा होता है। यहाँ भक्त को यह बात समझाते हैं कि श्याम का साथ हमेशा बना रहता है। भले ही दुनिया उसके खिलाफ हो जाए, पर यह जान लेना चाहिए कि कन्हैया निर्बल का बल है। यह समझाते हुए, "तू कमजोर नहीं है" का संदेश दिया जाता है जिससे भक्त को आत्मविश्वास और आशा मिलती है। यह भजन वास्तव में जीवन की कठिनाइयों में एक आत्म-संवाद की तरह है, जिसमें भक्त की व्यथा और भगवान के प्रति अपार प्रेम को दर्शाया गया है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का गहनता से अनुसरण करते हुए भक्तों को सिखाया जाता है कि भगवान की कृपा से हर संकट का सामना किया जा सकता है। यह भक्ति का एक रूप है जिसमें प्रेम, विश्वास और भक्ति का तत्व प्रधान है। श्याम या श्री कृष्ण, जो कि प्रेम और करुणा के प्रतीक हैं, भक्तों के प्रति अपनी संवेदनाओं को प्रदर्शित करते हैं। जब भक्त श्याम को याद करता है, तब निराशा और कठिनाई से भरे समय में भी वह आंतरिक संतोष और साहस प्राप्त करता है। यहां भक्ति एक साधना है, जो आत्मा को शुद्ध करती है और जीवन में सुख-शांति लाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संदर्भ उपासना और भक्ति की परंपराओं से जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि जब भक्त अपने हृदय में श्याम के प्रति भक्ति भाव से इस भजन का जाप करते हैं, तो उन्हें शांति और संतोष की अनुभूति होती है। प्राचीन ग्रंथों जैसे भागवत पुराण और रामायण में श्री कृष्ण की लीलाओं और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। इस भजन में श्याम के प्रति असीम विश्वास दर्शाने से भक्त को सभी प्रकार की बाधाओं को पार करने में सहायता मिलती है, जैसा कि भगवद गीता में भी कृष्ण भक्तों को यह भरोसा दिलाते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह आत्मविश्वास को बढ़ाता है और मन मस्तिष्क में बुरे विचारों को दूर करता है। भक्ति के इस रूप से प्रत्येक भक्त को एक प्रकार की आंतरिक संतोष और शक्ति की अनुभूति होती है। सतत जाप से हृदय में प्रेम और करुणा के भाव विकसित होते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय करना सबसे उत्तम है, जब मन शांत और शुद्ध होता है। दीप जलाकर और भगवान के सामने फूल चढ़ाकर इसके साथ ध्यान लगाना चाहिए। भक्त को ध्यान केंद्रित करना चाहिए और भगवान की मूरत की ओर देखकर हृदय से प्रार्थना करनी चाहिए। इस समय सकारात्मक भावना से भरा मन इस भजन के पाठ को और भी प्रभावशाली बनाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि भगवान श्याम, अर्थात श्री कृष्ण, हर भक्त का रक्षक हैं। भक्त को कठिनाइयों में घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि श्याम हमेशा उनके साथ हैं।

इस भजन का कोई विशेष समय है, जब इसे गाया जाए?

इस भजन का जाप सुबह या संध्या के समय करना उत्तम होता है, जब मन अधिक शांत होता है। यह विशेष रूप से ध्यान के समय का संतुलन बनाने में सहायक होता है।

क्या इससे मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है?

हाँ, इस भजन का जाप मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह चिंता और तनाव को कम करने में मदद करता है और भक्त को आत्मिक शांति प्रदान करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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