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ओम जय लक्ष्मी माता | Om Jai Laxmi Matha | Mata Laxmi Full Aarti with Lyrics | Rashmi Arora - BhaktiLok

63 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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लक्ष्मी माता की अति पवित्र आरती

इस आरती के माध्यम से लक्ष्मी माता के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए हृदय से प्रार्थना करें।

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैं तेरी आरती उतारूं। तू है जग माता, मैं हर वक्त तेरा गुण गाऊं।। जीव हो या देव, सुख दे तू। जो तेरा ध्यान करे, उसे सुख दे तू।। तू धन की देवी, तू सुख की माता। जो तेरा पाठ करे, उसका कल्याण करे।। तेरे चरणों की पूजा, जो करे सच्चे मन से। उसका हर दुख दूर हो, तेरा आशीर्वाद मिले।। ॐ जय लक्ष्मी माता, मैं तेरी आरती उतारूं। तू है जग माता, मैं हर वक्त तेरा गुण गाऊं।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मूल विषय देवी लक्ष्मी की आराधना और उनकी कृपा प्राप्त करने की इच्छा पर केंद्रित है। पहले पद में 'ॐ जय लक्ष्मी माता' के मंत्र से देवी लक्ष्मी का स्मरण करते हुए, भक्त माता की शक्ति और अनुग्रह के लिए प्रार्थना करता है। माता लक्ष्मी को जगत की माता माना गया है, जो सभी जीवों को सुख और समृद्धि प्रदान करती हैं। भजन के दूसरे पद में सदगुणों की चर्चा की गई है, जिससे यह पता चलता है कि माता को ध्यान करने वाले भक्तों पर कृपा की वर्षा होती है। यह संकल्पित सच्चे मन से पूजा का महत्व को उजागर करता है, जिसमें भक्त अपने जीवन की आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

इस आरती का भावार्थ भक्त की मानसिक एवं भक्ति के क्षेत्र में गहराई को दर्शाता है। भक्त 'जीव हो या देव' की उपमा के द्वारा यह कहते हैं कि माता लक्ष्मी सभी जीवों को सुख दे सकती हैं, चाहे वह मनुष्य हों या देवता। यह विचार हमें सिखाता है कि देवी लक्ष्मी की कृपा से सिर्फ भौतिक सुख ही नहीं, अपितु मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। माता की उपासना भक्त की चित्त की शुद्धि और एकाग्रता की ओर इंगित करती है, जिससे वे अपने जीवन में समर्पण और भक्ति का अनुभव कर सकें।

इस भजन में भक्तिमार्ग की पवित्रता को भी दर्शाया गया है। भक्तों का ध्यान केवल धन और भौतिक संपदा की प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक कल्याण और सामाजिक सद्भाव हेतु भी होना चाहिए। देवी लक्ष्मी की आराधना करते समय भक्त केवल व्यक्ति के सुख का अनुभव नहीं करता, बल्कि वह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए भी सुख और समृद्धि की कामना करता है। यह हमें सिखाता है कि वास्तविक भक्ति का मार्ग केवल व्यक्तिगत समृद्धि की कामना करना नहीं है, बल्कि सर्व सेवा में तत्पर रहना, यह भी है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भक्ति की यह आरती देवी लक्ष्मी के प्रति श्रद्धा और भक्ति को अभिव्यक्त करती है, जो विभिन्न पुराणों जैसे विष्णु पुराण और देवी भागवत में भी वर्णित हैं। लक्ष्मी माता को धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी माना गया है। सामवार हो या दुर्गा पूजा, हर अवसर पर देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल भक्ति का साधन नहीं, अपितु उन्नति और ऐश्वर्य का मार्ग भी है। भक्तों के लिए यह आरती उनके जीवन में सुख और समृद्धि को आकर्षित करने के लिए आवश्यक है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस आरती का जाप करने से मानसिक शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्राप्ति होती है। यह भक्ति के माध्यम से भक्त का मन संतुलित और सकारात्मक बनाता है। नियमित रूप से लक्ष्मी माता की आरती करने से समस्त विघ्नों और बाधाओं का नाश होता है, और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

आरती का पाठ सूर्योदय के समय या शाम के समय करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पूजा के दौरान एक दीया जलाकर सूखे मेवे, फल या मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए। भक्त को शुद्ध मन और निस्वार्थ भाव से पूजा करनी चाहिए, साथ ही ध्यान की मुद्रा में बैठकर मन को शांत रखना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

लक्ष्मी माता की आरती का महत्व क्या है?

लक्ष्मी माता की आरती का महत्व भक्तों के जीवन में समृद्धि, धन, और शांति की प्राप्ति के लिए है। यह आरती देवी के प्रति समर्पण और उनकी कृपा की कामना करती है।

क्या लक्ष्मी माता की आरती सुबह करनी चाहिए या शाम को?

लक्ष्मी माता की आरती सुबह सूर्योदय के समय या शाम को करना सर्वोत्तम है। यह ध्यान और समर्पण का सही समय है।

आरती में शामिल होने के लिए कौन-कौन से सामान चाहिए?

आरती में एक दीया, फूल, फल, मिठाई और अगरबत्ती शामिल होना चाहिए। ये सब वस्तुएं माता लक्ष्मी को भोग अर्पित करने के लिए उपयोग होती हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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