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Hanuman Bhajan

श्री हनुमान आरती | Shri Hanuman Aarti Lyrics in hindi

77 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री हनुमान आरती: संकट मोचन की प्रार्थना

श्री हनुमान आरती का पाठ करें और संकटों से मुक्ति की प्राप्ति के लिए हनुमान जी की कृपा प्राप्त करें।

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीश तिहुँ लोक उजागर। रामदूत अतुलित बल साथा, रामभक्त प्रिय हरषित जन। रामायाण पूजनीय रघुकुल नायक, महाभारत में भी दर्ज है सर्वश्रेष्ठ तायक। स्वर्ण महल में ये जोरू के नायक, ज्ञान सागर आप हैं, करता ये महाकाय। बुद्धि विद्या प्रदान करो हनुमान, संकट मोचन पर आपकी कृपा विशाल। जाकी कृपा से सब संकट टलेंगे, भक्त जन आपके चरणों में सदा में मिलेंगे। जय हनुमान, जय हनुमान, संकट मोचन आपके चरणों को छूता, सदा विनती करता। भक्तों के दुख दूर करो, हनुमान कृपा से नष्ट हों, हर्षित हों सब।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री हनुमान आरती में हनुमान जी की महानता और उनके गुणों का वर्णन किया गया है। 'जय हनुमान ज्ञान गुण सागर' वह उद्घोष है जो हनुमान जी की बेशुमार ज्ञान और गुणों का प्रतीक है। हनुमान जी न केवल अपने बल में अद्भुत हैं बल्कि वे ज्ञान और विवेक के भी सागर हैं। जब भक्त हनुमान जी की आरती करते हैं, तो वे अपनी तमनाई तिरछी करते हैं और उनके प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं। राम के प्रति उनकी अविश्वसनीय निष्ठा और पराक्रम इस आरती में विशेष रूप से दृश्य है। हनुमान जी को 'रामदूत' का नाम देकर राम जी के प्रति उनकी अनन्य भक्ति को दर्शाया गया है। हनुमान जी के गुणों की प्रशंसा करने से भक्तों में शक्ति का संचार होता है।

हनुमान जी की आरती में गहरी भावना का भावार्थ है। जब भक्त हनुमान जी की स्तुति करते हैं तो उनका मन और आत्मा आरती के हर बोल के साथ ऊँचाई पर पहुँचते हैं। यह आरती एक प्रकार का संगठन है, जहाँ भक्त अपनी सारी चिंताओं और दुखों को हनुमान जी के चरणों में अर्पित करते हैं। हनुमान जी संकट मोचन हैं, इसलिए उनका स्मरण करते ही भक्तों के मन में भय और चिंता का दूर होना स्वाभाविक है। इस आरती के माध्यम से उनके प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना प्रकट होती है। भक्तों का विश्वास है कि हनुमान जी की कृपा से कठिन से कठिन संकटों से मुक्ति पाई जा सकती है।

हनुमान आरती भक्ति मार्ग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भक्ति का अनुभव करने का अवसर प्रदान करती है, जहाँ भक्त अपने हृदय, मन और आत्मा को एकाग्र कर हनुमान जी की महिमा का गान करते हैं। इस आरती में हनुमान जी की उपासना के माध्यम से समझा जाता है कि भक्ति का मार्ग साधना और समर्पण से भरा होता है। भक्त जब हनुमान जी का स्मरण करते हैं तो उन्हें न केवल शक्ति बल्कि आध्यात्मिक जागृति भी मिलती है। हनुमान जी के प्रति यह भक्ति साधक को सदियों पुराने संतों के अनुभवों से जोड़ती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री हनुमान आरती का महत्व रामायण में विशेष रूप से प्रतिपादित है। हनुमान जी को संकट मोचन और अनन्य भक्ति के प्रतीक के रूप में माना जाता है। पुराणों में हनुमान जी की कथा का उल्लेख किया गया है जहाँ उन्होंने भगवान राम की सहायता की और रावण से सीता माता को बचाया। महाभारत में भी हनुमान जी की महिमा और योग्यता का वर्णन मिलता है। इस आरती का पाठ भक्तों को आंतरिक शक्ति और मानसिक शांति प्रदान करता है, और संकटों से मुक्ति के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। श्री हनुमान आरती का नियमित पाठ मानसिक तनाव को कम करता है, आत्मविश्वास में वृद्धि करता है और भक्ति में एकाग्रता लाता है। यह न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुधारता है। भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और संकटों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री हनुमान आरती का पाठ सुबह या शाम के समय करना उत्तम होता है। पूजा के लिए पहले स्नान करें, फिर हनुमान जी के तस्वीर के आगे दीपक जलाएँ और फूल-फruits अर्पित करें। ध्यान मुद्रा में बैठकर मन को एकाग्र करें और हनुमान जी का स्मरण करते हुए आरती का पाठ करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान आरती का अर्थ क्या है?

हनुमान आरती में हनुमान जी के गुणों और शक्तियों की स्तुति की जाती है। यह उनके प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

आरती का पाठ किस समय करें?

हनुमान आरती का पाठ सुबह या शाम करनी चाहिए, जब मन एकाग्रता में हो। यह विशेष रूप से शांति और ध्यान के लिए उत्तम समय है।

हनुमान जी की आरती का मानसिक लाभ क्या है?

हनुमान जी की आरती का पाठ मानसिक तनाव को कम करता है, आत्मविश्वास को बढ़ाता है, और भक्तों को अद्भुत मानसिक शक्ति प्रदान करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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