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Hanuman Bhajan

कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही, हनुमान तुम्हारा क्या कहना – Kalyug Mein Siddh Ho Dev Tum Hi, Hanuman Tumhara Kya Kehna (Lakkha Bhajan) Lyrics in Hindi

622 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही, हनुमान तुम्हारा क्या कहना

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

(Kalyug Mein Siddh Ho Dev Tum Hi, Hanuman Tumhara Kya Kehna) – Lakkha Bhajan

🎤 गायक: लक्खा (Lakkha) | प्रचलित लोक भजन

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: लक्खा (Lakkha)
🏷️ श्रेणी: हनुमान भजन / लोक भजन
📍 भाव: शक्ति, भक्ति, सिद्धि, समर्पण
📖 विशेष: कलियुग में हनुमान जी की सिद्धता और महिमा का वर्णन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना।

॥ अंतरा १ ॥

तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी शक्ति का क्या कहना।
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी शक्ति का क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना॥

॥ अंतरा २ ॥

सीता की खोज करी तुमने,
तुम सात समंदर पार गए।
सीता की खोज करी तुमने,
तुम सात समंदर पार गए।
लंका को, लंका को
किया श्मशान प्रभु,
बलवान तुम्हारा क्या कहना।
लंका को किया श्मशान प्रभु,
बलवान तुम्हारा क्या कहना।
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी शक्ति का क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना॥

॥ अंतरा ३ ॥

जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगी,
तुम धौलागिरी पर्वत लाए।
जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगी,
तुम धौलागिरी पर्वत लाए।
लक्ष्मण के, लक्ष्मण के बचाए आ करके
सब प्राण तुम्हारा क्या कहना।
लक्ष्मण के बचाए आ करके
सब प्राण तुम्हारा क्या कहना।
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी शक्ति का क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना॥

॥ अंतरा ४ ॥

तुम भक्त शिरोमणि हो जग में,
तुम वीर शिरोमणि हो जग में।
तुम भक्त शिरोमणि हो जग में,
तुम वीर शिरोमणि हो जग में।
तेरे रोम-रोम में, तेरे रोम-रोम में बसते हैं
सियाराम, तुम्हारा क्या कहना।
तेरे रोम-रोम में बसते हैं
सियाराम, तुम्हारा क्या कहना।
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी शक्ति का क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना॥
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना॥

🎤 गायक :- लक्खा (Lakkha)

✍️ रचनाकार :- प्रचलित लोक भजन (अज्ञात)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह शक्तिशाली हनुमान भजन कलियुग में हनुमान जी की सिद्धता और महिमा का गुणगान करता है। “कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही” – अर्थात कलियुग में आप ही सिद्ध देव (प्रत्यक्ष फल देने वाले) हैं। हनुमान जी को युग-प्रतियुग अमर और सिद्ध माना गया है – वे भक्तों की तुरंत सहायता करते हैं।

भजन में हनुमान जी के प्रमुख कार्यों का वर्णन है – सीता की खोज में सात समुद्र पार करना, लंका दहन करना, लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लाना (धौलागिरी पर्वत उठाना)। “तेरी भक्ति का क्या कहना, तेरी शक्ति का क्या कहना” – यह पंक्ति हनुमान जी की अपरंपार भक्ति और अद्वितीय शक्ति को नमन करती है।

भजन के अंत में कहा गया है – “तुम भक्त शिरोमणि हो जग में, तुम वीर शिरोमणि हो जग में” और “तेरे रोम-रोम में बसते हैं सियाराम”। यह हनुमान जी की सर्वोच्च रामभक्ति को दर्शाता है। यह भजन भक्तों को विश्वास दिलाता है कि कलियुग में हनुमान जी की उपासना से सभी संकट दूर हो सकते हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

कलियुग में हनुमान जी की सिद्धता: मान्यता है कि कलियुग में हनुमान जी सर्वाधिक सिद्ध और शीघ्र फलदायी देवता हैं। उनका नाम जपने से, भजन गाने से या चालीसा पढ़ने से भक्तों के संकट तुरंत दूर होते हैं। यह भजन उसी विश्वास को प्रबल करता है।

“लक्खा भजन” – लोकप्रियता: यह भजन राजस्थानी लोक गायक लक्खा (Lakkha) द्वारा गाया गया है, जो अपने भक्ति गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके गाए इस भजन ने काफी लोकप्रियता अर्जित की है।

रामभक्ति का उत्कर्ष: “तेरे रोम-रोम में बसते हैं सियाराम” – यह पंक्ति बताती है कि हनुमान जी का शरीर ही राम-सीता का मंदिर है। उनकी भक्ति इतनी गहरी है कि वे स्वयं राम के अंश हैं।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

कलियुग में भक्तों के लिए हनुमान जी सबसे सुलभ और सिद्ध देवता हैं। उनकी भक्ति, शक्ति और सियाराम के प्रति समर्पण अतुलनीय है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि हनुमान जी की शरण में जाने से हर संकट का समाधान संभव है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। “हनुमान तुम्हारा क्या कहना” – यह वाक्य हनुमान जी की महिमा के आगे सब कुछ नतमस्तक होने का भाव व्यक्त करता है।

🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय बजरंग बली ।। जय श्री राम ।।

॥ इति श्री हनुमान भजनम् ॥
॥ कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही, हनुमान तुम्हारा क्या कहना ॥
श्रेणियां: Hanuman Bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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