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अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो: भजन (Are Dwarpalo Kanhaiya Se Keh Do Lyrics in Hindi ) - Bhakti lok

93 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सुदामा की भक्ति: कृष्ण की अनुकम्पा

इस भजन के माध्यम से सुदामा की कृष्ण से अद्भुत प्रेम और भक्ति का अनुभव करें।

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो: भजन (Are Dwarpalo Kanhaiya Se Keh Do Lyrics in Hindi ) - देखो देखो यह गरीबी, यह गरीबी का हाल, कृष्ण के दर पे यह विशवास ले के आया हूँ। मेरे बचपन का दोस्त हैं मेरा श्याम, येही सोच कर मैं आस ले कर के आया हूँ ॥ अरे द्वारपालों कहना से कह दो, दर पे सुदामा गरीब आ गया है।, भटकते भटकते ना जाने कहाँ से, तुम्हारे महल के करीब आ गया है॥ ना सर पे हैं पगड़ी, ना तन पे हैं जामा, बतादो कन्हिया को नाम है सुदामा।, इक बार मोहन से जाकर के कहदो, मिलने सखा बदनसीब आ गया है॥ सुनते ही दोड़े चले आये मोहन, लगाया गले से सुदामा को मोहन।, हुआ रुकमनी को बहुत ही अचम्भा, यह मेहमान कैसा अजीब आ गया है॥ और बराबर पे अपने सुदामा बिठाये, चरण आंसुओं से श्याम ने धुलाये।, न घबराओ प्यारे जरा तुम सुदामा, ख़ुशी का समा तेरे करीब आ गया है।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में सुदामा की कथा का चित्रण है, जो भगवान कृष्ण के प्रति अपनी गहरी भक्ति और प्रेम को व्यक्त करता है। इस भजन का आरंभ सुदामा की गरीबी और दुख-दर्द के वर्णन से होता है। वह द्वारपालों से आग्रह करता है कि वे भगवान कृष्ण से कह दें कि उनका बचपन का मित्र, जो बहुत गरीब है, दर पर आया है। यहां गरीबी का हाल स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है, जिससे पता चलता है कि सच्ची भक्ति किसी भी परिस्थिति में स्थिर रह सकती है। सुदामा की यह भावना कि

इस भजन में भक्त की भावनाओं का अद्भुत चित्रण है। कृष्ण के दर पर पहुंचकर सुदामा का मन में होने वाला उत्साह और हिचकिचाहट, दोनों दिखती हैं। गरीबी से भरा जीवन जीते हुए भी वह अपने मित्र कृष्ण के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा नहीं भूलता। 'ना सर पे हैं पगड़ी, ना तन पे हैं जामा' पंक्तियाँ सुदामा की निराशा, लेकिन साथ ही साथ उसकी भक्ति को उजागर करती हैं। सुदामा केवल धन-वैभव की कामना नहीं करता, बल्कि अपने सच्चे मित्र से मिलन की आशा लिए आया है। इस भजन के माध्यम से भक्तों को यह सिखाया जाता है कि सच्चे प्रेम और भक्ति में ही सच्चा सुख निहित है।

इस भजन के माध्यम से भक्ति मार्ग की गहराई को दर्शाया गया है। भक्ति एक ऐसा मार्ग है जो व्यक्ति को उसके स्वाभाविक संबंध यानी भगवान के साथ जोड़ता है। सुदामा का कृष्ण से मिलना दर्शाता है कि भगवान अपने सच्चे भक्त की हर स्थिति में सहायता करते हैं। भक्ति का यह सम्बन्ध किसी भी प्रकार की भौतिक व सीमा से ऊपर है। इसे समझते हुए जब सुदामा दर पर पहुँचता है, तब उसे स्वीकार किया जाता है। यहां भगवान कृष्ण का प्रेम और करुणा प्रकट होती है, जो भक्त की आतंरिक स्थिति को समझते हैं। यह भजन हमें यह भी सिखाता है कि भक्ति में सादा जीवन जीना और धारित विश्वास बहुत महत्वपूर्ण है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

सुदामा और कृष्ण की भक्ति की कथा बहुत प्रसिद्ध है और यह भगवती भागवत में वर्णित है। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची मित्रता और प्रेम अटूट होते हैं। सुदामा का कृष्ण के पास आना और कृष्ण का सुदामा का स्वागत करना, हमें यह शिक्षा देता है कि सच्ची भक्ति और निस्वार्थ प्रेम के लिए धन और संपत्ति का कोई मोल नहीं। ये तत्व उपनिषदों और पुराणों में भी चर्चा में रहे हैं, जहां भक्ति और प्रेम को श्रेष्ठ माना गया है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से भक्त को मानसिक शांति और आत्मिक संतोष की प्राप्ति होती है। इससे व्यक्ति की आस्था मजबूत होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। यह भक्ति व्यक्ति को कठिनाइयों में धैर्य और साहस प्रदान करती है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से भक्ति में वृद्धि होती है और हर रोज ऐसा करना भक्त को कृष्ण की कृपा का अधिकारी बनाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय या संध्या के समय करना उत्तम माना जाता है। भक्त को चाहिए कि वह एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर भगवान कृष्ण की तस्वीर के सामने दीपक जलाए। भजन के दौरान मन को स्थिर रखते हुए पूर्ण श्रधान्नնդ के साथ अपने भाव प्रकट करने चाहिए, जिससे इस भजन का प्रभाव अधिकतम हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि सच्ची भक्ति और मित्रता धन-सम्पत्ति से परे है। सुदामा की कथा सिखाती है कि कृष्ण अपने भक्तों का सदा साथ देते हैं।

मैं इस भजन को कैसे पढ़ूं?

इस भजन को श्रद्धा से और मन की शांति के साथ पढ़ना चाहिए। बेहतर है कि इसे सामूहिक रूप से गाया जाए, जिससे और भी भक्ति का संचार हो सके।

क्या इस भजन से विशेष आशीर्वाद मिलता है?

जी हां, इस भजन का जाप करने से भक्त को मानसिक शांति और भगवान कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन की कठिनाईयाँ दूर हो सकती हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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