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Parvati Stotram

दामोदर अष्टकम (Damodar astakam in Hindi ) - Bhakti lok

62 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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दिव्य प्रेम का स्तोत्र: दामोदर अष्टकम

भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं की महिमा को बयां करने वाला यह भजन हृदय को प्रफुल्लित करता है।

 दामोदर अष्टकम (Damodar astakam in Hindi ) - Bhakti lok दामोदर अष्टकम (Damodar astakam in Hindi ) - नमामीश्वरं सच्-चिद्-आनन्द-रूपंलसत्-कुण्डलं गोकुले भ्राजमनम्यशोदा-भियोलूखलाद् धावमानंपरामृष्टम् अत्यन्ततो द्रुत्य गोप्या ॥ १॥रुदन्तं मुहुर् नेत्र-युग्मं मृजन्तम्कराम्भोज-युग्मेन सातङ्क-नेत्रम्मुहुः श्वास-कम्प-त्रिरेखाङ्क-कण्ठस्थित-ग्रैवं दामोदरं भक्ति-बद्धम् ॥ २॥इतीदृक् स्व-लीलाभिर् आनन्द-कुण्डेस्व-घोषं निमज्जन्तम् आख्यापयन्तम्तदीयेषित-ज्ञेषु भक्तैर् जितत्वंपुनः प्रेमतस् तं शतावृत्ति वन्दे ॥ ३॥वरं देव मोक्षं न मोक्षावधिं वान चन्यं वृणे ‘हं वरेषाद् अपीहइदं ते वपुर् नाथ गोपाल-बालंसदा मे मनस्य् आविरास्तां किम् अन्यैः ॥ ४॥इदं ते मुखाम्भोजम् अत्यन्त-नीलैर्वृतं कुन्तलैः स्निग्ध-रक्तैश् च गोप्यामुहुश् चुम्बितं बिम्ब-रक्ताधरं मेमनस्य् आविरास्ताम् अलं लक्ष-लाभैः ॥ ५॥नमो देव दामोदरानन्त विष्णोप्रसीद प्रभो दुःख-जालाब्धि-मग्नम्कृपा-दृष्टि-वृष्ट्याति-दीनं बतानुगृहाणेष माम् अज्ञम् एध्य् अक्षि-दृश्यः ॥ ६॥कुवेरात्मजौ बद्ध-मूर्त्यैव यद्वत्त्वया मोचितौ भक्ति-भाजौ कृतौ चतथा प्रेम-भक्तिं स्वकां मे प्रयच्छन मोक्षे ग्रहो मे ‘स्ति दामोदरेह ॥ ७॥नमस् ते ‘स्तु दाम्ने स्फुरद्-दीप्ति-धाम्नेत्वदीयोदरायाथ विश्वस्य धाम्नेनमो राधिकायै त्वदीय-प्रियायैनमो ‘नन्त-लीलाय देवाय तुभ्यम् ॥ ८॥दामोदर अष्टकम मूल श्लोक ( Damodar Ashtam Mool Shlok ) - नमामीश्वरं सच्चिदानंदरूपंलसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानंयशोदाभियोलूखलाद्धावमानंपरामृष्टमत्यं ततो द्रुत्य गोप्या ॥ १॥रुदन्तं मुहुर्नेत्रयुग्मं मृजन्तम्कराम्भोज-युग्मेन सातङ्क-नेत्रम्मुहुः श्वास-कम्प-त्रिरेखाङ्क-कण्ठस्थित-ग्रैवं दामोदरं भक्ति-बद्धम् ॥ २॥इतीदृक् स्वलीलाभिरानंद कुण्डेस्व-घोषं निमज्जन्तम् आख्यापयन्तम्तदीयेशितज्ञेषु भक्तिर्जितत्वमपुनः प्रेमतस्तं शतावृत्ति वन्दे ॥ ३॥वरं देव! मोक्षं न मोक्षावधिं वान चान्यं वृणेऽहं वरेशादपीहइदं ते वपुर्नाथ गोपाल बालंसदा मे मनस्याविरास्तां किमन्यैः ॥ ४॥इदं ते मुखाम्भोजम् अत्यन्त-नीलैःवृतं कुन्तलैः स्निग्ध-रक्तैश्च गोप्यामुहुश्चुम्बितं बिम्बरक्ताधरं मेमनस्याविरास्तामलं लक्षलाभैः ॥ ५॥नमो देव दामोदरानन्त विष्णोप्रभो दुःख-जालाब्धि-मग्नम्कृपा-दृष्टि-वृष्ट्याति-दीनं बतानुगृहाणेष मामज्ञमेध्यक्षिदृश्यः ॥ ६॥कुबेरात्मजौ बद्ध-मूर्त्यैव यद्वत्त्वया मोचितौ भक्ति-भाजौ कृतौ चतथा प्रेम-भक्तिं स्वकां मे प्रयच्छन मोक्षे ग्रहो मेऽस्ति दामोदरेह ॥ ७॥नमस्तेऽस्तु दाम्ने स्फुरद्-दीप्ति-धाम्नेत्वदीयोदरायाथ विश्वस्य धाम्नेनमो राधिकायै त्वदीय-प्रियायैनमोऽनन्त-लीलाय देवाय तुभ्यम् ॥ ८॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

दामोदर अष्टकम ऐक भक्ति-स्तुति है जो भगवान श्री कृष्ण, जो दामोदर के नाम से भी जाने जाते हैं, की महिमा का वर्णन करती है। इस स्तोत्र में अलग-अलग भावनाओं का समावेश किया गया है, जैसे कि भगवान के बचपन की मासूमियत और यशोदा माता की चिंता। पहले श्लोक में कहा गया है कि "नमामीश्वरं सच्चिदानंदरूपं" अर्थात् हम ईश्वर को प्रणाम करते हैं जो सत्य, चित्त और आनंद का रूप है। इस स्तोत्र में भगवान कृष्ण को बंधन से मुक्त होने वाले, गोकुल में खेलने वाले एक छोटे से बच्चे के रूप में दर्शाया गया है। यशोदा माँ के साथ उनके खेल और उनकी जोश भरी लीलाओं का चित्रण किया गया है, जिसमें वे लुकलियों में भाग लेते हैं और अपनी शरारती हरकतों से सबको आनंदित करते हैं।

दामोदर अष्टकम के दूसरे श्लोक में भगवान को वर्णित किया गया है, जो दुखों में भी आनंद देने वाले हैं। यहाँ पर ध्यानित किया गया है कि भगवान अपनी लीलाओं में हमें मोहित करते हैं और हमारे भय और दुखों को दूर करते हैं। तीसरे श्लोक में भक्तों का यह अनुरोध है कि वे न केवल मोक्ष हेतु बल्कि प्रेम स्वरूप भी परिकल्पना किया जाये। यह एक गहरी भावना को दर्शाता है; भक्त केवल मोक्ष नहीं चाहते, बल्कि चाहते हैं कि भगवान का उन पर सदा ध्यान रहे। इसके साथ ही, भक्त प्रेम के माध्यम से भगवान को प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त करते हैं।

दामोदर अष्टकम में भक्ति मार्ग की गहराई का वर्णन देखने को मिलता है। यहां प्रेम के विविध रंगों को दर्शाया गया है, जिसमें भक्ति, समर्पण और भगवान में एकता का संदेश है। आखिरी श्लोक में राधा और कृष्ण के प्रेम को विशेष महत्व दिया गया है। यह भक्ति की गहराई और समर्पण का प्रतीक है, जहां भक्त भगवान को उनके अनंत लीलाओं के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं। भक्ति का यह मार्ग निश्चित रूप से एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो व्यक्ति को व्यक्तिगत और परमात्मिक रूप में जोड़ती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस प्रार्थना का संदर्भ शास्त्रों और पुराणों में मिलता है, खासकर भागवत पुराण में, जहाँ भगवान कृष्ण की लीलाओं का विस्तृत वर्णन है। दामोदर कुजय और प्रेम का प्रतीक हैं। यह स्तोत्र भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण साधना है, जो उन्हें भगवान श्री कृष्ण की अनंत कृपा प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है। त्रिपुरा रासा और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी भगवान कृष्ण के बाल्यकाल की लीलाओं का उल्लेख मिलता है, जहाँ वे एक साधारण बच्चे की तरह व्यवहार करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। दामोदर अष्टकम का पाठ मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक विकास में सहायक है। नियमित रूप से इसका जप करने से मन में सकारात्मकता आती है, तथा भक्त का आत्मविश्वास बढ़ता है। यह स्तोत्र ध्यान और ध्यान संकल्प में सहायता करता है, जिससे भक्त स्थिरता और संतोष अनुभव करते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्तोत्र का जप सुबह या संध्या समय करना विशेष फलदायक माना जाता है। जप से पहले एक दीप जलाना और आरती करना शुभ होता है। साधक को शांत मानसिकता और भक्ति भाव से साथ जप करना चाहिए। योग्य आसन पर बैठकर, संपूर्ण ध्यान के साथ इस भजन को गाें, तो लाभ अधिक होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दामोदर अष्टकम का क्या महत्व है?

यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए भक्त को उनके प्रति प्रेम और भक्ति का अनुभव कराता है, जो आत्मा की शुद्धि और सुख का कारण बनता है।

इस स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

दामोदर अष्टकम का पाठ प्रात:काल या संध्या बेला में करना विशेषलाभकारी माना जाता है। यह समय ईश्वर के साथ एकता के लिए सर्वोत्तम है।

इस स्तोत्र का प्रभाव क्या है?

दामोदर अष्टकम का जप करने से मन की शांति, आंतरिक आनंद और भक्ति में वृद्धि होती है, जिससे भक्त का जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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