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रामचंद्र कह गए सिया से भजन लिरिक्स ( Ram Chandra Kah Gaye Siya Se Lyrics in Hindi ) - भक्ति लोक

104 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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रामचंद्र के प्रवचन: कलयुग का अनुसरण

यह भजन रामचंद्र के शिक्षाओं को दर्शाता है, जो हमें कलयुग में जीवन जीने का मार्ग दिखाता है।

रामचंद्र कह गए सिया से भजन लिरिक्स ( Ram Chandra Kah Gaye Siya Se Lyrics in Hindi ) - हे जी रेहे रामचंद्र कह गए सिया से रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा हंस चुगेगा दाना तुन काकौआ मोती खाएगा हे जी रेसिया ने पूछा 'भगवन!कलयुग में धर्म - कर्म कोकोई नहीं मानेगा?' तो प्रभु बोले 'धर्म भी होगा कर्म भी होगा परंतु शर्म नहीं होगी बात बात में मात-पिता को बेटा आँख दिखाएगा' हे रामचंद्र कह गए सिया से राजा और प्रजा दोनों में होगी निसिदिन खेचातानी कदम कदम पर करेंगे दोनों अपनी अपनी मनमानी हे जिसके हाथ में होगी लाठी जिसके हाथ में होगी लाठी भैंस वही ले जाएगा हंस चुगेगा दाना तुन काकौआ मोती खाएगा हे रामचंद्र कह गए सिया से सुनो सिया कलयुग में काला धन और काले मन होंगे काले मन होंगे चोर उच्चक्के नगर सेठ और प्रभु भक्त निर्धन होंगे निर्धन होंगे हे जो होगा लोभी और भोगी जो होगा लोभी और भोगी वो जोगी कहलाएगा हंस चुगेगा दाना तुन काकौआ मोती खरगहे रामचंद्र कह गए सिया से मंदिर सूना सूना होगा भरी रहेंगी मधुशाला मधुशाला पिता के संग संग भरी सभा में नाचेंगी घर की बाला घर की बालाहे केसा कन्यादान पिता ही केसा कन्यादान पिता ही कन्या का धन खाएगाहंस चुगेगा दाना तुन काकौआ मोती खाएगा हे जी रेहे मूरख की प्रीत बुरी जुए की जीत बुरी बुरे संग बैठ ते भागे ही भागे भागे ही भागे हे काजल की कोठरी में कैसे ही जतन करो काजल का दाग भाई लागे ही लागे रे भाई काजल का दाग भाई लागे ही लागे हे जी रेहे कितना जती को कोई कितना सती हो कोई कामनी के संग काम जागे ही जागे जागे ही जागे ऐ सुनो कहे गोपी राम जिसका है नाम काम उसका तो फंद गले लागे ही लागे रे भाई उसका तो फंद गले लागे ही लागे हे जी रे

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में रामचंद्र जी के द्वारा दिए गए उद्धरणों के माध्यम से कलयुग की विभिन्न समस्याओं और उनकी समाधान की बात की गई है। उद्घाटन में सिया के प्रति संवाद के माध्यम से प्रभु ने कलयुग के समय की वास्तविकताओं को स्पष्ट किया है। जैसे कि कहा गया है, 'राजा और प्रजा दोनों में निसिदिन खेचातानी होगी', यहाँ यह भावना व्यक्त की जा रही है कि कलयुग में सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों का ह्रास होगा और मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए माता-पिता जैसे साधारण रिश्तों को भी नकार देगा। इस प्रकार, भजन में व्यक्त किया गया है कि धर्म और कर्म दोनों ही रहेंगे लेकिन शर्म और संकोच का अभाव होगा।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि इसमें मानवता के प्रति चेतावनी है कि वे सतर्क रहें और अपने धर्म पर अडिग रहें। कलयुग में 'काला धन' और 'काले मन' को महत्वपूर्ण बताया गया है, जो हमारी वर्तमान सामाजिक स्थिति को दर्शाता है। साथ ही, 'लोभी और भोगी' का जिक्र करते हुए, यह संकेत मिलता है कि इस समय में मोक्ष पाने की राह कठिन होगी, क्योंकि भौतिकता को प्राथमिकता दी जाएगी। इस भजन में एक गहन सन्देश है कि भक्ति का मार्ग अपनाकर ही व्यक्ति इस कठिनाई से उबर सकता है।

यही वह तत्व है जो भक्ति मार्ग का आधार बनता है। रामचंद्र जी का यह उपदेश हमें बताता है कि भवान ने मानवता के उद्धार के लिए धरती पर अवतार लिया है, और हमें उनकी राह पर चलकर अपने जीवन में सुधार लाने का प्रयास करना चाहिए। समर्पण, भक्ति और प्रेम से हम अपने चारों ओर शांति और सद्भाव लाने में सक्षम होंगे। इस भजन में रामचंद्र जी की महिमा का विस्तार किया गया है, जो हमें एक सकारात्मक दृष्टि देता है। इस मार्ग पर चलकर ही हम अपने आत्मिक प्रतिभा को पहचान सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय धर्मशास्त्र में अत्यधिक है। यह रामायण की शिक्षाओं पर आधारित है, जहाँ भगवान राम ने अपने अनुशासन, धर्म और सच्चाई का पालन करते हुए मानवता की रक्षा की। इस भजन के माध्यम से भक्त जनों को चेतावनी दी जा रही है कि कलयुग में भक्ति और धर्म का पालन करने में कठिनाई होगी। पवित्र ग्रंथों जैसे रामायण और पुराणों में ऐसे समय का वर्णन है, जहाँ मनुष्य के ह्रदय में लोभ, द्वेष और अन्य पापी प्रवृत्तियों का आगमन होगा। इस दृष्टिकोण से यह भजन हमें सजग रहने की प्रेरणा देता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का प्रतिदिन सुनने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतुलन और समर्पण की भावना उत्पन्न होती है। यह भक्ति आत्मा को शुद्धता और ताजगी प्रदान करती है। भक्तों को निराशा और चिंता से मुक्त करने में यह भजन मदद करता है और उनके मन में सकारात्मकता को बल देता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय या संध्या आरती के समय सर्वश्रेष्ठ होता है। पूजा स्थल पर एक दीप जलाना चाहिए और ताजे फूल अर्पित करने चाहिए। सही मानसिकता के साथ, ध्यान लगाते हुए भजन का पाठ करना चाहिए, जिससे भक्ति में और भी अधिक गहराई आ सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

रामचंद्र कह गए सिया से भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि कलयुग में नैतिक मूल्यों का ह्रास होगा और मनुष्य स्वार्थी बन जाएगा। इसे सुनकर हम अपनी भक्ति को दृढ़ रहेने के लिए प्रेरित होते हैं।

क्या इस भजन का पाठ करने से आत्मा को शांति मिलती है?

हाँ, इस भजन का नियमित पाठ करने से आत्मा को शांति मिलती है और मानसिक तनाव से राहत मिलती है। यह भक्तों को एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है।

इस भजन का महत्व किस श्रुति या पुराण में मिलता है?

यह भजन रामायण की शिक्षाओं पर आधारित है और कलयुग में धर्म और नैतिकता की स्थिति का वर्णन करता है। यह भक्तों को सजग रहने की प्रेरणा देता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 30 Aug 2026

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