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शिव आरती - ॐ जय शिव ओंकारा (Shiv Aarti - Om Jai Shiv Omkara Lyrics in Hindi ) - Bhakti lok

48 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव आरती: दिव्य कृपा का स्तोत्र

शिव आरती का जाप भक्तों के लिए मोक्ष और सुख-समृद्धि का मार्ग संप्रदान करता है।

ॐ जय शिव ओंकारास्वामी जय शिव ओंकारा।ब्रह्मा विष्णु सदाशिवअर्द्धांगी धारा ॥ॐ जय शिव ओंकारा...॥एकानन चतुराननपंचानन राजे ।हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे ॥ॐ जय शिव ओंकारा...॥दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे ।त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे ॥ॐ जय शिव ओंकारा...॥अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी ।चंदन मृगमद सोहैभाले शशिधारी ॥ॐ जय शिव ओंकारा...॥श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे ।सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे ॥ॐ जय शिव ओंकारा...॥कर के मध्य कमंडलचक्र त्रिशूलधारी ।सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी ॥ॐ जय शिव ओंकारा...॥ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका ।प्रणवाक्षर में शोभितये तीनों एका ॥ॐ जय शिव ओंकारा...॥त्रिगुणस्वामी जी की आरतिजो कोइ नर गावे ।कहत शिवानंद स्वामीसुख संपति पावे ॥ॐ जय शिव ओंकारा...॥लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा ।पार्वती अर्द्धांगीशिवलहरी गंगा ॥ॐ जय शिव ओंकारा...॥पर्वत सोहैं पार्वतीशंकर कैलासा ।भांग धतूर का भोजनभस्मी में वासा ॥ॐ जय शिव ओंकारा...॥जटा में गंग बहत हैगल मुण्डन माला ।शेष नाग लिपटावतओढ़त मृगछाला ॥जय शिव ओंकारा...॥काशी में विराजे विश्वनाथनंदी ब्रह्मचारी ।नित उठ दर्शन पावतमहिमा अति भारी ॥ॐ जय शिव ओंकारास्वामी जय शिव ओंकारा।ब्रह्मा विष्णु सदाशिवअर्द्धांगी धारा ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान शिव की स्तुति करना है। पहले पद में, शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है, "ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा।" यहाँ शिव को त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो एक साथ संसार का संचालन करते हैं। शिव को सृष्टि, पालन और संहार का कारक माना जाता है, और इन तीनों का एकत्व प्रकट करते हुए कहा गया है कि 'प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका'। यह संकेत करता है कि शिव ही अंत में सभी का आधार हैं। इसके अलावा, अर्धांगिनी का उल्लेख करते हुए देवी पार्वती की उपस्थिति भी दर्शाई गई है, जो शिव के साथ एकत्व को दर्शाती हैं।

दूसरे पद में भगवान शिव के विभिन्न रूपों का वर्णन किया गया है, जैसे ‘एकानन चतुराननपंचानन’ जो उनके अनेकों रूप और स्वरूप को दर्शाता है। शिव का हंसासन, गरूड़ासन और वृषवाहन जैसे वाहन प्रभावी रूप से उनके आध्यात्मिक और प्राकृतिक शक्तियों का प्रतीक हैं। जहाँ एक ओर 'दुखहारी' का अर्थ है दुःख समाप्त करने वाला, वहीं 'सुखकारी' उनका कल्याणकारी स्वरूप है। इस आरती के माध्यम से भक्त अपने जीवन में सुख और शांति की प्राप्ति की कामना करते हैं। यह भजन केवल शिव के गुणों की महिमा का गान नहीं है, बल्कि भक्तों को मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी दिखाता है।

भगवान शिव की उपासना का यह पाठ भक्तों को भक्ति मार्ग (Bhakti marg) में प्रेरित करता है। भक्ति का अर्थ है पूर्ण समर्पण और श्रद्धा। शिव की आरती गाते समय एक भक्त का मन पूरी तरह से भगवान में लीन होता है, जो उसे सांसारिक बंधनों से मुक्त करता है। यह भजन हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में कठिनाइयाँ हों या सुख, शिव हमेशा हमारे साथ हैं। उन्होंने हमें सिखाया है कि कैसे साधना के माध्यम से हम अपने भीतर के सकारात्मक गुणों का विकास कर सकते हैं और सच्चे भक्त बन सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव आरती 'ॐ जय शिव ओंकारा' का धार्मिक महत्व अद्भुत है। यह आरती पूरी तरह से भगवान शिव की महिमा के चारों ओर केंद्रित है, जिसे हिंदू धर्म के शास्त्रों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। स्कंदपुराण, शिव पुराण और रुद्रयामल Tantra में शिव के विभिन्न रूपों और स्वरूपों की व्याख्या की गई है। शिव को अज्ञेय और अनंत माना गया है, जिनका ज्ञान समस्त एकता में देखा जाता है। इस भजन को गाते समय भक्त शिव के समस्त रूपों का ध्यान करते हैं, और यही ध्यान उन्हें आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करता है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस आरती का जाप मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करता है। नियमित रूप से इस भजन का गान करने से भक्त में आंतरिक शक्ति बढ़ती है तथा समस्त दुख दूर होते हैं। यह भजन भक्त को आत्मिक उन्नति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है और तात्कालिक समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस आरती का जाप सुबह या संध्या काल में करना श्रेष्ठ होता है। पूजा करते समय स्वच्छ स्थान पर बैठकर दीया जलाना चाहिए और भगवान शिव को धतूरा, भांग, या सफेद फूल अर्पित करना चाहिए। मन में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ आरती गाना चाहिए। शांति से मन को केंद्रित करके, प्रेम और भक्ति के साथ शिव की प्रार्थना करनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शिव आरती 'ॐ जय शिव ओंकारा' का महत्व क्या है?

यह आरती भगवान शिव के विभिन्न रूपों और स्वरूपों की स्तुति करती है, जो भक्तों को मानसिक शांति, सुख और समृद्धि प्रदान करती है।

इस आरती का पाठ करते समय विशेष ध्यान कब करना चाहिए?

आरती का पाठ सुबह या शाम को किया जाना चाहिए, और इसे श्रद्धा के साथ गाना चाहिए, जिससे लाभ मिलता है।

क्या इस आरती का पाठ किसी विशेष विधि से करना चाहिए?

हाँ, इस आरती का पाठ करते समय भगवान शिव के लिए दीप जलाना और फल-फूल चढ़ाना चाहिए, जिससे भक्त की प्रार्थनाएँ सफल होती हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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