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श्री सत्यनारायण जी आरती (Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti in Hindi ) - Bhakti lok

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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श्री सत्यनारायण जी आरती (Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti in Hindi ) - Bhakti lok


श्री सत्यनारायण जी आरती (Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti in Hindi ) - 


जय लक्ष्मी रमणा

स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।

सत्यनारायण स्वामी

जन पातक हरणा ॥


ॐ जय लक्ष्मी रमणा

स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।


रतन जड़ित सिंहासन

अदभुत छवि राजे ।

नारद करत नीराजन

घंटा वन बाजे ॥


ॐ जय लक्ष्मी रमणा

स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।


प्रकट भए कलिकारण

द्विज को दरस दियो ।

बूढ़ो ब्राह्मण बनकर

कंचन महल कियो ॥


ॐ जय लक्ष्मी रमणा

स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।


दुर्बल भील कठोरो

जिन पर कृपा करी ।

चंद्रचूड़ एक राजा

तिनकी विपत्ति हरि ॥


ॐ जय लक्ष्मी रमणा

स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।


वैश्य मनोरथ पायो

श्रद्धा तज दीन्ही ।

सो फल भाग्यो प्रभुजी

फिर स्तुति किन्ही ॥


ॐ जय लक्ष्मी रमणा

स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।


भव भक्ति के कारण

छिन-छिन रूप धरयो ।

श्रद्धा धारण किन्ही

तिनको काज सरो ॥


ॐ जय लक्ष्मी रमणा

स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।


ग्वाल-बाल संग राजा

बन में भक्ति करी ।

मनवांछित फल दीन्हो

दीन दयालु हरि ॥


ॐ जय लक्ष्मी रमणा

स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।


चढत प्रसाद सवायो

कदली फल मेवा ।

धूप-दीप-तुलसी से

राजी सत्यदेवा ॥


ॐ जय लक्ष्मी रमणा

स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।


सत्यनारायणजी की आरती

जो कोई नर गावे ।

ऋद्धि-सिद्ध सुख-संपत्ति

सहज रूप पावे ॥


जय लक्ष्मी रमणा

स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।

सत्यनारायण स्वामी

जन पातक हरणा ॥




🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "श्री सत्यनारायण जी आरती (Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti in Hindi ) - Bhakti lok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 17 Aug 2026

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