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विन्ध्येश्वरी चालीसा (Vindhyeshvari Chalisa in Hindi ) - Bhakti lok

84 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें



विन्ध्येश्वरी चालीसा (Vindhyeshvari Chalisa in Hindi ) - Bhakti lok

विन्ध्येश्वरी चालीसा (Vindhyeshvari Chalisa in Hindi ) - Bhakti lok

॥ विन्ध्येश्वरी दोहा ॥

नमो नमो विन्ध्येश्वरी,

नमो नमो जगदम्ब ।

सन्तजनों के काज में,

करती नहीं विलम्ब ॥

विन्ध्येश्वरी चालीसा (Vindhyeshvari Chalisa ) 

जय जय जय विन्ध्याचल रानी।

आदिशक्ति जगविदित भवानी ॥


सिंहवाहिनी जै जगमाता ।

जै जै जै त्रिभुवन सुखदाता ॥


कष्ट निवारण जै जगदेवी ।

जै जै सन्त असुर सुर सेवी ॥


महिमा अमित अपार तुम्हारी ।

शेष सहस मुख वर्णत हारी ॥


दीनन को दु:ख हरत भवानी ।

नहिं देखो तुम सम कोउ दानी ॥


सब कर मनसा पुरवत माता ।

महिमा अमित जगत विख्याता ॥


जो जन ध्यान तुम्हारो लावै ।

सो तुरतहि वांछित फल पावै ॥


तुम्हीं वैष्णवी तुम्हीं रुद्रानी ।

तुम्हीं शारदा अरु ब्रह्मानी ॥


रमा राधिका श्यामा काली ।

तुम्हीं मातु सन्तन प्रतिपाली ॥


उमा माध्वी चण्डी ज्वाला ।

वेगि मोहि पर होहु दयाला ॥ 


तुम्हीं हिंगलाज महारानी ।

तुम्हीं शीतला अरु विज्ञानी ॥


दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता ।

तुम्हीं लक्ष्मी जग सुख दाता ॥


तुम्हीं जाह्नवी अरु रुद्रानी ।

हे मावती अम्ब निर्वानी ॥


अष्टभुजी वाराहिनि देवा ।

करत विष्णु शिव जाकर सेवा ॥


चौंसट्ठी देवी कल्यानी ।

गौरि मंगला सब गुनखानी ॥


पाटन मुम्बादन्त कुमारी ।

भाद्रिकालि सुनि विनय हमारी ॥


बज्रधारिणी शोक नाशिनी ।

आयु रक्षिनी विन्ध्यवासिनी ॥


जया और विजया वैताली ।

मातु सुगन्धा अरु विकराली ॥


नाम अनन्त तुम्हारि भवानी ।

वरनै किमि मानुष अज्ञानी ॥


जापर कृपा मातु तब होई ।

जो वह करै चाहे मन जोई ॥ 


कृपा करहु मोपर महारानी ।

सिद्ध करहु अम्बे मम बानी ॥


जो नर धरै मातु कर ध्याना ।

ताकर सदा होय कल्याना ॥


विपति ताहि सपनेहु नाहिं आवै ।

जो देवीकर जाप करावै ॥


जो नर कहँ ऋण होय अपारा ।

सो नर पाठ करै शत बारा ॥


निश्चय ऋण मोचन होई जाई ।

जो नर पाठ करै चित लाई ॥


अस्तुति जो नर पढ़े पढ़अवे ।

या जग में सो बहु सुख पावे ॥


जाको व्याधि सतावे भाई ।

जाप करत सब दूर पराई ॥


जो नर अति बन्दी महँ होई ।

बार हजार पाठ करि सोई ॥


निश्चय बन्दी ते छुट जाई ।

सत्य वचन मम मानहु भाई ॥


जापर जो कछु संकट होई ।

निश्चय देविहिं सुमिरै सोई ॥ 


जा कहँ पुत्र होय नहिं भाई ।

सो नर या विधि करे उपाई ॥


पाँच वर्ष जो पाठ करावै ।

नौरातन महँ विप्र जिमावै ॥


निश्चय होहिं प्रसन्न भवानी ।

पुत्र देहिं ता कहँ गुणखानी ॥


ध्वजा नारियल आन चढ़ावै ।

विधि समेत पूजन करवावै ॥


नित प्रति पाठ करै मन लाई ।

प्रेम सहित नहिं आन उपाई ॥


यह श्री विन्ध्याचल चालीसा ।

रंक पढ़त होवे अवनीसा ॥


यह जन अचरज मानहु भाई ।

कृपा दृश्टि जापर होइ जाई ॥


जै जै जै जग मातु भवानी ।

कृपा करहु मोहि निज जन जानी ॥ 


वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "विन्ध्येश्वरी चालीसा (Vindhyeshvari Chalisa in Hindi ) - Bhakti lok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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