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गणेश मंत्र लिरिक्स इन संस्कृत ( Ganesh Mantra Lyrics in sanskrit)

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश वन्दना: विघ्न नाशक मंत्र संग्रह

गणेश जी की कृपा से सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए यह भजन गाएं।

गणेश मंत्र लिरिक्स इन संस्कृत ( Ganesh Mantra Lyrics in sanskrit) - Bhaktilok वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:। निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदानमामि देवं सकलार्थदं तं सुवर्णवर्णं भुजगोपवीतम्। गजाननं भास्करमेकदन्तं लम्बोदरं वारिभावसनं च॥ एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्। विध्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥ विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं। नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥ द्वविमौ ग्रसते भूमिः सर्पो बिलशयानिवं। राजानं चाविरोद्धारं ब्राह्मणं चाप्रवासिनम्॥ गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥ रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्यरक्षकं। भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात्॥ केयूरिणं हारकिरीटजुष्टं चतुर्भुजं पाशवराभयानिं। सृणिं वहन्तं गणपं त्रिनेत्रं सचामरस्त्रीयुगलेन युक्तम्॥ गजाननाय महसे प्रत्यूहतिमिरच्छिदे। अपारकरुणापूरतरङ्गितदृशे नमः ॥ पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुद्रा। मायाविनां दुर्विभावयं मयूरेशं नमाम्यहम्॥ प्रातः स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुगमम्। उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्ड माखण्डलादिसुरनायकवृन्दवन्द्यम्॥ मूषिकोत्तममारुह्य देवासुरमहाहवे। जोद्धुकामं महावीर्यं वन्देऽहं गणनायकम्॥ अम्बिकाहृदयानन्दं मातृभिः परिवेष्टितम्। भक्तिप्रियं मदोन्मत्तं वन्देऽहं गणनायकम्॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

गणेश मंत्र का यह स्तोत्र भगवान गणेश के अद्वितीय गुणों और शक्तियों का वर्णन करता है। 'वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:' इस पंक्ति में गणेश के विशाल रूप और प्रकाश का उल्लेख किया गया है, जो सूर्य की किरणों के समान उज्ज्वल है। जब भक्त इस मंत्र का जाप करते हैं, तो वे भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वे उनके सभी कार्यों में अडचनों को निवारण करें। 'निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदान' का अर्थ है कि भक्त भगवान से निवेदन कर रहे हैं कि वे उन्हें प्रेमपूर्वक सहयोग दें और हर शुभ कार्य में कोई विघ्न न आने दें। इसके माध्यम से भक्ति का सच्चा भाव प्रकट होता है, जो भक्त की भक्ति को और सशक्त बनाता है।

इस भजन में 'गजानन' और 'लम्बोदर' जैसे नाम भगवान गणेश को क्षुद्र और महान शक्ति के रूप में प्रस्तुत करते हैं। भक्त भगवान गणेश को 'शोक विनाशक' बताकर उनकी करुणा और उदारता की प्रशंसा कर रहे हैं। यहाँ भावार्थ का एक गहरा संकेत है, कि जो भी भक्त सच्चे मन से गणेश जी की आराधना करते हैं, उनके समस्त दुखों का नाश होता है। 'उमासुतं' का अर्थ है, माँ पार्वती के पुत्र, यह दर्शाता है कि गणेश जी का अस्तित्व मातृ शक्ति से जुड़ा हुआ है। इसलिए भक्त अपनी माता के प्रति भी सम्मान प्रकट करते हैं।

इस मन्त्र में भक्ति मार्ग का गहरा अर्थ छिपा हुआ है। जैसा कि इस भजन में कहा गया है, 'गणनाथ नमो नमस्ते', यह दर्शाता है कि भक्त भगवान गणेश की स्तुति करते हैं और उनके प्रति अपार श्रद्धा व्यक्त करते हैं। यह भक्ति केवल व्यक्ति को ही नहीं, अपितु पूरे समाज को भी एकजुट करता है। अन्यथा 'नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय' जैसे वाक्य, यह दर्शाते हैं कि गणेश जी का स्वरूप अद्भुत और सर्वश्रेष्ठ है, उनके सामने सभी देवताओं का समर्पण होता है। यह भक्ति से जुड़े सभी लोगों को जीवन में सकारात्मक ऊर्जा देती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान गणेश का पूजा का विशेष महत्व है। पुराणों में वर्णित है कि भगवान गणेश को सभी विघ्नों का नाशक और हर प्रकार के शुभ कार्यों में सरलता लाने वाला माना जाता है। 'विघ्नेश्वर' कहकर उन्हें पूजा जाता है जिससे भक्तों को हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल सके। इसे दशावतार पुराण और श्रीमद्भागवत में भी उल्लेख किया गया है। जब भक्त गणेश जी का स्मरण करते हैं, तो उनके सभी कार्य सिद्ध होते हैं। महाभारत और रामायण में भी गणेश जी की अद्भुत लीलाओं का वर्णन मिलता है, जहाँ वे स्वयं साक्षी बनकर शक्तियों का साक्षात्कार करते हैं।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, स्थिरता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। जो व्यक्ति नियमित रूप से गणेश मंत्र का जाप करता है, उसे मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है। अध्यात्मिक दृष्टि से भी इसका बहुत महत्व है, क्योंकि इससे भक्त में भगवान के प्रति अधिक निष्ठा और प्रेम पैदा होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

गणेश मंत्र का जाप सुबह सूर्योदय से पहले या संध्या के समय करना अत्यंत लाभदायक है। पूजा स्थल पर एक दीया जलाना, फूलों और मेवे का भोग अर्पित करना चाहिए, साथ ही चंदन और अग्नि के सामने बैठकर ध्यान लगाना चाहिए। स्थिर अस posture में बैठकर और मन में भक्ति भाव लाकर इस मंत्र का जाप करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश मंत्र का जाप करते समय क्या आवश्यक है?

गणेश मंत्र का जाप करते समय मानसिक एकाग्रता जरूरी है। पूजा के समय स्वच्छ और पवित्र स्थान पर बैठना चाहिए।

गणेश मंत्र का प्रभाव क्या है?

गणेश मंत्र का प्रभाव विघ्नों को दूर करने और समस्त कार्यों में सफलता प्राप्त करने में होता है।

क्या गणेश मंत्र का जाप किसी विशेष दिन करना चाहिए?

गणेश मंत्र का जाप विशेष रूप से बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन करना अत्यंत फलदायक होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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