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जयदेव जयदेव जय मंगल मूर्ति सुखकार्ता दुखर्त(Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti Sukhkarta Dukhharta Lyrics By Arijit Chakraborty)

207 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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जयदेव जयदेव जय मंगल मूर्ति सुखकार्ता दुखर्त(Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti Sukhkarta Dukhharta Lyrics By Arijit Chakraborty)

जयदेव जयदेव जय मंगल मूर्ति सुखकार्ता दुखर्त(Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti Sukhkarta Dukhharta By Arijit Chakraborty)


जयदेव जयदेव जय मंगल मूर्ति सुखकार्ता दुखर्त(Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti Sukhkarta Dukhharta Lyrics) -


सुख कर्ता दुख हरत

वार्ता विघ्नची

नूरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची

सरवंगी सुंदर उत्तीशेंदु रची

कांठी झलके माड़ मुक्ता पदंची

जय देव जय देवी

जय मंगल मूर्ति

दर्शन मार्ते मान कामना पूर्ति

जय देव जय देवी

रत्ना खाचिकाता पारा

सुखकार्ता दुखर्ता वार्ता विघ्नचि

नूरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची

सर्वांगी सुंदर उती शेंदुराची

कांति झलक मल मुक्ताफलांची

जय देव जय देवी

जय मंगल मूर्ति

दर्शन मार्ते मान कामना पूर्ति

जय देव जय देवी

रत्नाखचित फिर तुझ गौरीकुमरा

चंदनाची उती कुमकुम के शरण

किराया जदित मुकुट शोभतो बर

रुंझुनति नुपुरे चरनी घाघरिया

जय देव जय देवी

जय मंगल मूर्ति

दर्शन मार्ते मान कामना पूर्ति

जय देव जय देवी

लम्बोदर पीतांबर फणीवार वंदना

सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनायन

दास रमाचा वट पाए साधना

संकटी पाववे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना

जय देव जय देव 2

जय मंगल मूर्ति

दर्शन मार्ते मान कामना पूर्ति

जय देव जय देवी

शेंदूर लाल चड्ढायो अच्छा गजमुख को

डोंदिल लाल बिराजे सुत गौरीहार को

हाथ लिए गुड लड्डू सई सुखार को

महिमा कहे ना जाए लागत हुं पद को

जय जय जय जय जय

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारे दर्शन मेरा मत रमाता

जय देव जय देवी

आस्था सीधी दासी संकट को बैरी

विघ्न विनाश मंगल मूरत अधिकारी

कोटि सूरज प्रकाश ऐसी छबी तेरी

गंडास्थल मदमस्तक झूल शशि बिहारी

जय जय जय जय जय

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारे दर्शन मेरा मत रमाता

जय देव जय देवी

भावभगत से कोई शरणागत आवे

संतति संपत्ती सबाही भरपुर पावे

ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे

गोसावीनंदन निशिदीन गन गावे

जय जय जय जय जय

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारे दर्शन मेरा मत रमाता

जय देव जय देवी


🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "जयदेव जयदेव जय मंगल मूर्ति सुखकार्ता दुखर्त(Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti Sukhkarta Dukhharta Lyrics By Arijit Chakraborty)" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 14 Aug 2026

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