युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा लिरिक्स (Yuge Atthavis - Vitthal Aarti With Lyrics in Hindi) - Bhaktilok
युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा लिरिक्स (Yuge Atthavis - Vitthal Aarti With Lyrics in Hindi)
Language: Marathi
Artist: Sanjeevani Bhelande
Composer: Traditional
Lyrics: Traditional
Music Producer/Arranger: Surinder Sodhi
Sound Engineer: Mayur Bakshi
VFX Producer: Shravan Shah
Manager (Rajshri Music): Alisha Baghel
Producer: Rajjat barjatya
Copyrights and Publishing: Rajshri Entertainment Private Limited
युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा लिरिक्स (Yuge Atthavis - Vitthal Aarti With Lyrics in Hindi) : -
युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा ।
वामांगी रखुमाई दिसे दिव्य शोभा ॥
पुंडलिकाचे भेटी परब्रह्म आले गा ।
चरणीं वाहे भीमा उद्धरी जगा ॥
जय देव जय देव जय पांडुरंगा ।
रखुमाईवल्लभा, राईच्या वल्लभा पावे जिवलगा ॥
तुळसीमाळा गळा कर ठेवुनि कटी ।
कासे पीतांबर कस्तुरी लल्लाटी ॥
देव सुरवर नित्य येती भेटी ।
गरुड हनुमंत पुढे उभे रहाती ॥
धन्य वेणुनाद अनुक्षेत्रपाळा ।
सुवर्णाची कमळे वनमाळा गळा ॥
राई-रखुमाबाई राणीया सकळा ।
ओवाळीती राजा विठोबा सावळा ॥
ओवाळू आरत्या कुरवंड्या येती ।
चंद्रभागेमाजी सोडुनिया देती ॥
दिंड्या पताका वैष्णव नाचती ।
पंढरीचा महिमा वर्णाचा किती ॥
आषाढी कार्तिकी भक्तजन येती ।
चंद्रभागेमध्ये स्नाने जे करिती ॥
दर्शनहेळामात्रे तया होय मुक्ती ।
केशवासी नामदेव भावे ओवाळीती ॥
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा लिरिक्स (Yuge Atthavis - Vitthal Aarti With Lyrics in Hindi)" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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