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आरती: वैष्णो माता (Vaishno Mata Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

65 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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वैष्णो माता की आरती: मां का आशीर्वाद प्राप्त करे

इस आरती के माध्यम से वैष्णो माता का पूजन कर, दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें और भक्ति में लीन हो जाएं।

आरती: वैष्णो माता (Aarti: Vaishno Mata Lyrics in Hindi) - जय वैष्णवी मातामैया जय वैष्णवी माता ।हाथ जोड़ तेरे आगेआरती मैं गाता ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥शीश पे छत्र विराजेमूरतिया प्यारी ।गंगा बहती चरननज्योति जगे न्यारी ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारेशंकर ध्यान धरे ।सेवक चंवर डुलावतनारद नृत्य करे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥सुन्दर गुफा तुम्हारीमन को अति भावे ।बार-बार देखन कोऐ माँ मन चावे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥भवन पे झण्डे झूलेंघंटा ध्वनि बाजे ।ऊँचा पर्वत तेरामाता प्रिय लागे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥पान सुपारी ध्वजा नारियलभेंट पुष्प मेवा ।दास खड़े चरणों मेंदर्शन दो देवा ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥जो जन निश्चय करकेद्वार तेरे आवे ।उसकी इच्छा पूरणमाता हो जावे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥इतनी स्तुति निश-दिनजो नर भी गावे ।कहते सेवक ध्यानूसुख सम्पत्ति पावे ॥जय वैष्णवी मातामैया जय वैष्णवी माता ।हाथ जोड़ तेरे आगेआरती मैं गाता ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आरती: वैष्णो माता का गान, भक्तों के लिए उनकी कृपा और सुरक्षा का विशेष प्रतीक है। इस आरती में 'जय वैष्णवी माता' का उद्घोष करते हुए भक्त मां की महिमा का गुणगान करते हैं। पहली पंक्ति में मां के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव व्यक्त किया गया है, जिसमें भक्त हाथ जोड़कर आरती गा रहे हैं। आगे की पंक्तियों में, मां की मूरत जो अत्यंत प्यारी है, और उनके चरणों की ज्योति के बारे में उल्लेख किया गया है जो गंगा के जल के समान पवित्र और दिव्य है। यह आरती बिना किसी भेदभाव के हर एक भक्त के लिए है, जो मां से आशीर्वाद और सहायता की कामना करता है।

भावार्थ की दृष्टि से, यह आरती केवल भक्ति का एक साधन नहीं है, बल्कि यह भक्तों का मां की ओर अगाध प्रेम और निष्ठा का प्रतिबिंब है। जैसे-जैसे आरती आगे बढ़ती है, मां की सुंदरता और उनके निवास स्थान की भक्ति का वर्णन किया जाता है। मन को भाते हुए सुन्दर गुफा का उल्लेख, भक्तों के मन में उस दिव्यता को देखने की इच्छा को दर्शाता है। भक्त का मन बार-बार मां के दर्शन करने को तड़पता है, जिससे उनकी भक्ति की गहराई स्पष्ट होती है।

इस आरती में भक्ति मार्ग का दर्शन होता है, जहां भक्त पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास के साथ मां के चरणों में अपनी भावनाएं अर्पित करते हैं। भक्ति के इस मार्ग में, भक्त अपने सुख-दुख को मां के समक्ष रखता है, जिससे वह आध्यात्मिक समृद्धि की ओर अग्रसर होता है। 'जो जन निश्चय करके द्वार तेरे आवे' जैसे वाक्य इन भावनाओं को और मजबूत करते हैं, यह दर्शाते हुए कि मां हमेशा अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरण करने के लिए तत्पर रहती हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

वैष्णो माता की आरती का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में गहराई से निहित है। माता वैष्णो देवी का वर्णन विशेषकर ‘स्कंद पुराण’ में मिलता है, जहां उन्हें शक्ति, भक्ति और सिद्धि का प्रतीक माना गया है। भक्तों के लिए वे मनोकामनाएं पूरी करने वाली माता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त माता के दर पर सच्चे मन से आते हैं, उन्हें सदैव सुरक्षा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार इस आरती का पाठ भी भक्तों का मां के प्रति निष्ठा और श्रद्धा का प्रमाण है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। वैष्णो माता की आरती का पाठ करने से मानसिक शांति, भक्ति और संतोष की अनुभूति होती है। यह आरती न केवल आध्यात्मिक उत्थान के लिए है, बल्कि इसे गाने या सुनने से मानसिक तनाव में भी कमी आती है। भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें बाहरी जीवन में सच्चे सुख और संतोष की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस आरती को भक्ति के समय, विशेषकर सुबह और शाम के समय किया जाना अत्यंत लाभकारी होता है। पूजा के समय एक दिया प्रज़्वलित करना, फूल, नारियल, और मेवे तथा पान सुपारी की भेंट अर्पित करना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर ध्यान लगाने से दिमाग में स्थिरता आती है, और आरती का भावनात्मक अनुभव और भी प्रगाढ़ हो जाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या वैष्णो माता की आरती का पाठ सभी दिन किया जा सकता है?

जी हाँ, वैष्णो माता की आरती का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है। यह विशेषकर त्रिवेणी तट पर या मां के मंदिर में अधिक महत्व रखती है।

क्यों माता वैष्णो देवी को शक्ति की देवी माना जाता है?

माता वैष्णो देवी को शक्ति की देवी माना जाता है क्योंकि वे सृजन, संरक्षण और संहार की शक्ति की प्रतीक हैं। उन्हें इस त्रिदेवियों के समकक्ष भी देखा जाता है।

क्या इस आरती को गाने का कोई विशेष लाभ है?

इस आरती को गाने से मानसिक शांति और दिव्य अनुभूति होती है। भक्तों का ध्यान गहराई से मां की ओर जाता है, जो उन्हें सुख-समृद्धि और सफलता की ओर अग्रसर करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Aug 2026

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