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जय गणेश जय गणेश लिरिक्स हिंदी (Jai Ganesh Jai Ganesh Jay Ganesh Deva Lyrics in Hindi )

62 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश वंदना: विघ्नहर्ता की विशेष कृपा

भगवान गणेश की महिमा को प्रकट करने वाला यह भजन, विघ्नों को दूर कर समृद्धि लाने का साधन है।

जय गणेश जय गणेश लिरिक्स हिंदी (Jai Ganesh Jai Ganesh Jay Ganesh Deva Lyrics in Hindi )जय गणेश जय गणेश लिरिक्स हिंदी (Jai Ganesh Jai Ganesh Jay Ganesh Deva LyricsLyrics in Hindi )जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥एक दन्त दयावंत, चार भुजा धारी।माथे पर तिलक सोहे, मुसे की सवारी॥पान चढ़े फुल चढ़े, और चढ़े मेवा।लडुवन का भोग लगे, संत करे सेवा॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥सुर श्याम शरण आये, सफल किजे सेवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥व्रकतुंड महाकाय, सूर्यकोटी समप्रभाः।निर्वघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य tema भगवान गणेश की वंदना है, जिनकी महिमा हर एक क्षेत्र में विघ्नहर्ता के रूप में स्थापित है। 'जय गणेश, जय गणेश' की उद्घोषणा से भावनाओं का संचार होता है, जो भक्तों को गणेश जी के प्रति असीम श्रद्धा और भक्ति का एहसास कराती है। पार्वती माता एवं भगवान शिव के पुत्र गणेश को 'एक दन्त' कहा गया है, जो इस बात का प्रतीक है कि वे केवल एक ही वास्तविकता, एक ही शक्ति को प्रदर्शित करते हैं। एक दांत के साथ उनकी स्वरूपिता उन्हें विशिष्ट बनाती है, जैसे कि उनका व्यापक ज्ञान और उन्हें प्राप्त आशीर्वाद। भगवान गणेश की चार भुजाएं उनके संपूर्णता और शक्ति को संदर्भित करती हैं। उनके माथे पर तिलक, उन्हें विशेष गरिमा प्रदान करता है और भक्तों के दिलों में विश्वास की किरण जगाता है।

इस भजन के भावार्थ में, भक्त गणेश जी से विलक्षण कृपा की प्रार्थना करते हैं। 'अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया' इस पंक्ति में भगवान गणेश द्वारा दिए जा रहे आशीर्वादों का उल्लेख है, जो भक्ति के फलस्वरूप होते हैं। भक्तजन यह मानते हैं कि गणेश जी की सेवा से उनके जीवन में अनेक समस्याओं का समाधान हो सकता है। यहां यह बताया गया है कि गणेश जी मात्र भौतिक वरदान देने वाले नहीं हैं, बल्कि वे मानसिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी सहायता करते हैं। जब भक्त उनकी शरण में आते हैं, तब उनकी कृपा से असंभव साधन भी संभव हो जाते हैं।

गणेश जी की पूजा भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखती है। वे अधिकतर सभी शुभ कार्यों की शुरुआत में पूजे जाते हैं। यह भजन भक्तिमार्ग का प्रतीक है, जहां भक्त केवल आस्था और श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करते हैं। 'निर्वघ्नं कुरु मे देव' से यह सिद्ध होता है कि भक्त गणेश जी से संतोष, शांति और सफलता की प्रार्थना करते हैं। वे न केवल भक्ति का संचार करते हैं बल्कि भक्तों को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं। इसका तात्पर्य है कि यदि भक्त सच्चे मन से उन्हें पूजते हैं, तो संपूर्ण जीवन में सफलताओं का अनुभव कर सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान गणेश का उल्लेख विभिन्न पुराणों, जैसे कि गणेश पुराण और कर्म पुराण में मिलता है। महाभारत में भी उनका पूजन किया गया है, जिसमें वे समस्त विघ्नों को नष्ट करने वाले भाग्य के प्रतीक माने जाते हैं। उनके पूजन से घर में सुख और समृद्धि बढ़ती है। 'व्रकतुंड महाकाय' की पंक्ति से यह सिद्ध होता है कि गणेश जी की महिमा सूर्य की किरणों के समान विस्तारित है, जिसका लाभ सभी भक्त लेना चाहेंगे। उनकी आराधना से भक्तों का जीवन सुख और शांति से परिपूर्ण हो जाता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश भजन का नियमित पाठ मानसिक तनाव को दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह भक्ति के साथ मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। तनाव और निराशा से मुक्ति के लिए गणेश जी की आराधना एक शक्तिशाली साधन है, जो आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता को बढ़ाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

गणेश वंदना का सही समय भोर या सांझ का होता है। पूजा करते समय एक दीपक जलाना चाहिए और मीठे पकवान या लडुवन का भोग लगाना चाहिए। सुखद स्थिति में बैठकर मन को शुद्ध रखते हुए भगवान की महिमा का स्मरण करना चाहिए। भक्त को मन में श्रद्धा और भक्ति समेटे इस भजन का उच्चारण करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश जी की पूजा का समय कब होना चाहिए?

गणेश जी की पूजा भोर के समय या शाम को की जानी चाहिए, जब वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है।

क्या गणेश भजन सुनने से कोई लाभ होता है?

हां, गणेश भजन सुनने से मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो विघ्नों को दूर करता है।

गणेश जी को किस प्रकार का भोग लगाना चाहिए?

गणेश जी को मीठे पकवान जैसे लडुवन, फल और मेवे चढ़ाने चाहिए, क्योंकि ये उन्हें प्रिय हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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