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Parvati Stotram

ॐ जय जगदीश हरे आरती (lyrics for om jai jagdish hare) - Bhaktilok

62 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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ॐ जय जगदीश हरे: सच्चे भक्तों का संजीवनी मंत्र

यह आरती विश्व के पालनहार श्री जगदीश की कृपा में अपने मन की शांति और सुख की प्राप्ति के लिए गाई जाती है।

ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का। स्वामी दुःख बिनसे मन का। सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवेकष्ट मिटे तन का॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजास, तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। स्वामी तुम पालनकर्ता। मैं मूरख फलकामी, मैं सेवक तुम स्वामी। कृपा करो भर्ता॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ दीन-बन्धु दुःख-हर्ता, ठाकुर तुम मेरे। स्वामी रक्षक तुम मेरे। अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देव। स्वामी पाप(कष्ट) हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे। स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर कर।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस आरती का मुख्य विषय भगवान जगदीश की स्तुति और उनकी कृपा की कामना करना है। 'ॐ जय जगदीश हरे' के ध्वनि मंत्र में यह पता चलता है कि वह अनंत और सर्वशक्तिमान हैं। 'भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे' इस पंक्ति में उनके प्रति सच्ची भक्ति के बलिदान की भावना प्रकट होती है। यहां पर यह विश्वास व्यक्त किया गया है कि भगवान अपने भक्तों के दुखों को दूर करते हैं। 'जो ध्यावे फल पावे' की भावना यह बताती है कि सच्चे श्रद्धालु की भक्ति से वे अपने जीवन में सभी सुख और संपत्तियों को प्राप्त कर सकते हैं।

आरती के भावार्थ में श्री जगदीश को माता-पिता के समान बताने वाली पंक्तियाँ हैं, जो भक्तों के लिए शरण का द्वार खोलती हैं। जब भक्त कहते हैं 'तुम बिन और न दूजा' तो यह स्पष्ट करता है कि भगवान के बिना किसी अन्य शरण की कोई आवश्यकता नहीं है। यह भाव भक्त की पूर्ण समर्पणता को दर्शाता है। उन्होंने भगवान से अपनी मूर्खता को दूर करने और दया प्राप्त करने की प्रार्थना की है, जो भक्ति के मार्ग में परम आवश्यक है। यह भाव भक्त की निर्भरता का प्रतीक है और भगवान की अनुकंपा की आशा को व्यक्त करता है।

इस आरती में भगवान को 'पारब्रह्म परमेश्वर' के रूप में चित्रित किया गया है, जो सभी का स्वामी हैं और 'करुणा के सागर' हैं। यह दर्शाता है कि भगवान केवल भक्तों के कष्टों का निवारण ही नहीं करते, बल्कि उनकी जरूरतों को भीUnderstanding करते हैं। 'किस विधि मिलूं दयामय' की भावना यह है कि भक्त ने भगवान की भक्ति को अपने जीवन में सर्वोच्च स्थान दिया है। यह भक्ति मार्ग की एक गहरी समझ प्रदान करती है, जो भक्त के और भगवान के बीच एक गहरा संबंध स्थापित करती है। इसके माध्यम से भक्त परमात्मा की भक्ति में अडिग रहता है और सच्चे प्रेम के सिद्धांतों पर चलते हुए आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह आरती हिन्दू परंपरा में अत्यधिक महत्व रखती है। यह प्रत्येक भक्त के जीवन में संकट के समय आश्रय देती है। पुराणों में यह बताया गया है कि भगवान को सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने से भक्त के सभी दुःख दूर हो जाते हैं। इसके अलावा, इसे गाने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और बुराई से निजात मिलती है। उपनिषदों और भगवद गीता में भी भक्ति का महत्व बताया गया है, जो इस आरती के माध्यम से भी प्रकट होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस आरती के नियमित गान से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। यह साधक को सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक स्थिरता प्रदान करती है, जिससे वे जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए संतुलित रहते हैं। इसके अतिरिक्त, भक्ति की इस साधना से प्रेम और सहानुभूति का भाव जागृत होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस आरती का पाठ सुबह के समय या शाम के समय करना श्रेयस्कर है। पूजा स्थल पर एक दिया जलाकर उस पर फूल चढ़ाना चाहिए। भक्त को इस आरती का पाठ करते समय मन में एकाग्रता रखनी चाहिए और भगवान के प्रति श्रद्धा भाव से भरा होना चाहिए। आलसी और नकारात्मक विचारों को परे रखकर ध्यान लगाते हुए आरती का पाठ करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

ॐ जय जगदीश हरे आरती का महत्व क्या है?

यह आरती भगवान जगदीश की कृपा को पाने के लिए गाई जाती है। इसका महत्व भक्तों के संकट के समय में उनके दुखों को दूर करने में है।

क्या इस आरती का पाठ नियमित करना चाहिए?

हाँ, इस आरती का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति और भक्ति में वृद्धि होती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है।

इस आरती का पाठ करते समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए?

आरती के पाठ के दौरान एकाग्रता बनाए रखना और भगवान के प्रति श्रद्धा भाव से भरा होना बहुत आवश्यक है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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