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मंत्र: प्रातः स्मरण - दैनिक उपासना (Pratah Smaran Dainik Upasana Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

62 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रातः स्मरण: सर्वोत्तम भक्ति का मंत्र

प्रातः स्मरण का यह मंत्र सुबह की साधना में परम महत्व रखता है। इसे नौग्रह तथा सप्तर्षियों का स्मरण करते हुए गजते हैं।

मंत्र: प्रातः स्मरण - दैनिक उपासना (Pratah Smaran Dainik Upasana Lyrics in Hindi) - Bhaktilokमंत्र: प्रातः स्मरण - दैनिक उपासना (Pratah Smaran Dainik Upasana Lyrics in Hindi) - प्रात: कर-दर्शनम्-कराग्रे वसते लक्ष्मी:, करध्ये सरस्वती ।कर मूले तु गोविन्द:, प्रभाते करदर्शनम ॥१॥पृथ्वी क्षमा प्रार्थना-समुद्रवसने देवि ! पर्वतस्तनमंड्ले ।विष्णुपत्नि! नमस्तुभ्यं पाद्स्पर्श्म क्षमस्वे ॥२॥त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण-ब्रह्मा मुरारीस्त्रिपुरांतकारीभानु: शाशी भूमिसुतो बुधश्च ।गुरुश्च शुक्र: शनि-राहु-केतवःकुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम ॥३॥सनत्कुमार: सनक: सन्दन:सनात्नोप्याsसुरिपिंलग्लौ च ।सप्त स्वरा: सप्त रसातलनिकुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम ॥४॥सप्तार्णवा: सप्त कुलाचलाश्चसप्तर्षयो द्वीपवनानि सप्तकुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम ॥५॥पृथ्वी सगंधा सरसास्तापथाप:स्पर्शी च वायु ज्वर्लनम च तेज: नभ: सशब्दम महता सहैवकुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम ॥६॥प्रातः स्मरणमेतद योविदित्वाssदरत: पठेत।स सम्यग धर्मनिष्ठ: स्यात्संस्मृताaअखंड भारत: ॥७॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रातः स्मरण का यह मंत्र सुबह की उपासना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें हम दैनिक जीवन में देवी-देवताओं का स्मरण करते हैं। पहले श्लोक में हाथ के अंगों के माध्यम से लक्ष्मी, सरस्वती, और गोविन्द का स्मरण किया जाता है। 'कराग्रे वसते लक्ष्मीं' अर्थात्, हमारे हाथों में देवी लक्ष्मी का निवास है, जो समृद्धि देने वाली हैं। इसके बाद, 'पृथ्वी क्षमा प्रार्थना' में धरती माता और नदियों का स्मरण करते हुए उनकी क्षमा मांगते हैं। इससे हम प्राकृतिक स्रोतों के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं। प्रत्येक श्लोक में न केवल देवी-देवताओं का स्मरण किया जाता है, बल्कि नवग्रहों एवं सप्तर्षियों का भी जिक्र किया गया है, जैसे कि सूर्य, चंद्र, गुरु और बुध। जब हम इन सबका स्मरण करते हैं, तो इसका अर्थ है कि हम अपने सुबह के समय को शुद्ध और पवित्र बनाते हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, यह मंत्र एक एकाग्रता और सकारात्मकता का संचार करता है। जब भक्त इस मंत्र को सुबह के समय उच्च स्वर में पाठ करते हैं, तो उनका मन भी सकारात्मक विचारों से भर जाता है। 'सर्वे मम सुप्रभातम' पंक्ति का अर्थ है, सभी तत्व मेरा शुभ प्रभात करें। इससे यह स्पष्ट होता है कि भक्त जप करते समय केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समस्त ब्रह्मांड के लिए भी मंगलकामना करते हैं। यह संदेश मानवता को एकजुट करता है और बताता है कि हम एक-दूसरे की भलाई के लिए भी सोचना चाहिए। यह मंत्र एक प्रार्थना है, जो केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करता है।

इस भक्ति मार्ग का अनुसरण करते हुए, भक्त आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करते हैं और अपने जीवन की दिशा को उज्ज्वल बनाते हैं। उपासना में गहरी आस्था, विशुद्धता और भक्ति की अनिवार्यता है। जब व्यक्ति इस मंत्र का श्रवण करता है, तो वह अपने भीतर के विकारों को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाता है। यह आत्मा को शुद्ध करने का एक माध्यम है, जो कि भक्ति मार्ग पर चलने वाले साधक को भारी आत्मिक संपूर्णता प्रदान करता है। संवाद और संकेतों के माध्यम से यह मंत्र आध्यात्मिक शांति और समृद्धि की प्राप्ति के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह प्रातः स्मरण का मंत्र भारतीय संस्कृति से गहरे जुड़े हुए धार्मिक ग्रंथों का हिस्सा है। इसका उल्लेख वेदों और पुराणों में किया गया है, विशेषकर गीता में जहाँ परमात्मा की महिमाओं का बखान होता है। यह दैवीय गुणों का समुच्चय है। भक्तों को यह विश्वास दिलाता है कि यदि वे ईश्वर का ध्यान कर सुबह की शुरुआत करते हैं, तो उनके समस्त कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। यह उपासना प्रक्रिया साधना के माध्यम से व्यक्तित्व विकास का स्त्रोत प्रदान करती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस मंत्र का जप करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि भक्त के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी होते हैं। सुबह के समय इसका उच्चारण मन को आनंदित करता है और नए शक्ति का संचार करता है। यह जीवन में समृद्धि और खुशहाली लाने का साधन माना जाता है, और आत्मिक उन्नति के लिए एक अति महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस मंत्र का जप सुबह के समय, सूर्योदय के साथ करना सर्वोत्तम होता है। भक्त को स्वच्छ वस्त्र पहनकर आसन पर बैठना चाहिए। पूजागृह में एक दीप जलाकर, भगवान का स्मरण करते हुए इस मंत्र का ध्यानपूर्वक जप करना चाहिए। सच्चे मन और श्रद्धा के साथ इसे पाठ करने से समस्त विघ्न समाप्त होते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रातः स्मरण का महत्व क्या है?

यह मंत्र सुबह के समय देवी-देवताओं का स्मरण करते हुए दिन की सकारात्मक शुरुआत करता है। यह जीवन में ऊर्जा और शांति लाता है।

इस मंत्र का पाठ कैसे करना चाहिए?

इसका पाठ सुबह के समय विशेष ध्यान और श्रद्धा के साथ करना चाहिए। सही आसन में बैठकर एकाग्रता से जप करना चाहिए।

इस मंत्र का जप करने से क्या लाभ होते हैं?

इस मंत्र का जप मानसिक शांति, समृद्धि और दिव्य कृपा का संचार करता है। यह आत्मिक उन्नति का सिद्धांत भी है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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