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Parvati Stotram

तुम से लागी लगन... पारस प्यारा (Tumse Lagi Lagan Le Lo Apni Sharan Paras Pyara Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

110 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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पारस का भजन: अज्ञान से मोक्ष का मार्ग

इस भजन के माध्यम से भक्त पारस से प्रेम और शरण की कामना करते हैं, जो जीवन के संकटों से मुक्ति प्रदान करता है।

तुम से लागी लगन... पारस प्यारा तुम से लागी लगन ले लो अपनी शरण पारस प्यारा मेटो मेटो जी संकट हमारा। निशदिन तुमको जपूँ पर से नेह तजूँ जीवन सार तेरे चरणों में बीत हमारा ॥ टेक॥ अश्वसेन के राजदुलारे वामा देवी के सुत प्राण प्यारे। सबसे नेह तोड़ाजग से मुँह को मोड़ संयम धारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ इंद्र और धरणेन्द्र भी आए देवी पद्मावती मंगल गाए। आशा पूरो सदादुःख नहीं पावे कदासेवक थारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ जग के दुःख की तो परवाह नहीं है स्वर्ग सुख की भी चाह नहीं है। मेटो जामन मरण होवे ऐसा यतन पारस प्यारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ लाखों बार तुम्हें शीश नवाऊँ जग के नाथ तुम्हें कैसे पाऊँ । ‘पंकज’ व्याकुल भयादर्शन बिन ये जिया लागे खारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ तुम से लागी लगन ले लो अपनी शरण पारस प्यारा मेटो मेटो जी संकट हमारा।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन में भक्त शरणागत भाव से भगवान पारस की शरण में स्वयं को समर्पित करता है। 'तुम से लागी लगन' की पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त का अपने इष्ट देव के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति है। पारस के अर्थ में छिपा है 'सच्चे प्रेम' और 'अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाने वाली शक्ति', इसलिए भक्त उनकी शरण में जाने की प्रार्थना करता है। 'मेटो मेटो जी संकट हमारा' में भक्त अपनी कठिनाइयों को दूर करने की प्रार्थना कर रहा है। यह स्पष्ट है कि भक्ति और प्रेम से अनेक संकटों का समाधान संभव है।

भजन की पंक्तियाँ भावार्थ में गहरी संवेदनाएँ समाहित करती हैं। जब भक्त कहता है 'निशदिन तुमको जपूँ', तब वह यह दर्शाता है कि उसे अपनी दैनिक जीवन की गतिविधियों में भी अपने इष्ट का स्मरण आवश्यक समझता है। इस प्रेम में एक पवित्रता है, जहां भक्त अपने जीवन की सारी समस्याओं को भगवान में समर्पित करता है, उन्हें नकारता नहीं बल्कि अपने संकटों के समाधान के लिए पूजा कराता है। यह भक्ति का एक ऊंचा स्वरूप है जहां भक्ति सिर्फ सुख के लिए नहीं, बल्कि संभावित संकटों से मुक्ति पाने के लिए की जाती है।

इस भजन में मुख्य रूप से भक्ति मार्ग (Bhakti marg) का अर्थ स्पष्ट होता है। भक्त का पूर्ण समर्पण और विश्वास, भगवान पर उसकी निर्भरता दर्शाता है। 'मेटो जामन मरण' की पंक्ति यह संकेत करती है कि भक्त मरण और जन्म के चक्र से मुक्त होना चाहता है, और इसके लिए भगवान पारस का सहारा लेता है। यह भक्ति के मूल तत्वों में से एक है। इस भजन से यह स्पष्ट होता है कि भक्त का प्रेम केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए नहीं, अपितु आत्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन, भक्तिपूर्ण श्रद्धा के साथ सुनने और गाने का एक माध्यम है, जो भारतीय पूर्णानिक परंपराओं से प्रभावित है। पारस का उल्लेख जनसंस्कृति में एक अत्यधिक प्रभावशाली रूपक है, जिसे कई पुराणों में वर्णित किया गया है। ये प्रार्थनाएँ दैवीय कृपा की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं। महाभारत और अन्य पुराणों में यह देखा गया है कि जब भक्त भगवान की शरण में जाते हैं, तब उनकी समस्याएँ स्वतः हल हो जाती हैं। यह भजन हमारे भीतर दिव्य प्रेम और भक्ति का संचार करता है, जिससे आत्मा को शांति प्राप्त होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागृति के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह भक्त को संकटों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है और जीवन में संतुलन लाता है। नियमित रूप से इसका जाप करने से आंतरिक शक्ति और सकारात्मकता बढ़ती है, जिससे भक्त की आत्मिक यात्रा को बल मिलता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना उत्तम होता है। सायंकाल की आरती के समय, दीया जलाकर, फुलों का भोग समर्पित करना चाहिए। उचित मुद्रा में बैठकर, ध्यान केंद्रित करके इसे गाना चाहिए। भक्त का मन एकाग्र रहना बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि भजन के भावों को सही अर्थ में ग्रहण किया जा सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में विशेष रूप से किस देवी या देवता की पूजा की जाती है?

इस भजन में मुख्य रूप से पारस का स्मरण किया गया है, जिसे दिव्यता और संकट समाधान का प्रतीक माना जाता है।

भजन का पाठ करने से भक्त को क्या लाभ मिलता है?

भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, संकटों से मुक्ति, और आत्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह भक्ति का शक्ति संचायक साधन है।

क्या इस भजन में कोई विशेष भावना व्यक्त की गई है?

हां, इस भजन में भक्त की अटूट भक्ति, प्रेम और शरणागति की भावना व्यक्त की गई है, जो संकटों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 30 Aug 2026

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