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जिसकी नैया राम भरोसे (Jiski Naiya Ram Bharose) - Devendra Pathak Ram Bhajan - Bhaktilok

108 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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राम भक्तों के लिए अमृत: नैया पार करने का भजन

भगवान राम की शरण में आने से हर संकट का समाधान होता है। इस भजन को गाने से भक्ति की ऊर्जा प्राप्त करें।

जिसकी नैया राम भरोसे उसकी नैया पार हो। जिसकी नैया राम भरोसे उसकी नैया पार हो।। जो भी संकट में हैं, वो निकल जाएं कार surrounds। जिसकी नैया राम भरोसे उसकी नैया पार हो।। कृपा कर दो लाल कन्था, जय जय जय राम। भगवान श्रीराम की कृपा पे कर लो ध्यान।। जिसकी नैया राम भरोसे उसकी नैया पार हो।। संकट से वो पार होगा, भक्त जन भगवान बनेगा। जिसको भी संकट हो उठाओ राम नाम।। जिसकी नैया राम भरोसे उसकी नैया पार हो।। राम नाम जपे जो, सुख में वो न लगे। इतने दुख सहकर भी, हर भक्त का हो पुण्य।। जिसकी नैया राम भरोसे उसकी नैया पार हो।। जिनका भक्ति का सागर, है सदा भरपूर। उनकी नैया राम भरोसे, पार क्रुझे सजग।। जिसकी नैया राम भरोसे उसकी नैया पार हो।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय है कि हमें अपने जीवन की नैया, अर्थात् जीवन के सभी संकटों और परेशानियों को भगवान राम के भरोसे छोड़ देना चाहिए। 'जिसकी नैया राम भरोसे उसकी नैया पार हो' का भावार्थ है कि जब हम श्री राम की शरण में जाते हैं, तब हमें अपने संकटों से पार लगाने के लिए उनके न्यास पर विश्वास करना चाहिए। इस भजन में यह संदेश देना है कि भक्ति के द्वारा और भगवान के नाम को स्मरण करते हुए हम किसी भी निराशा और दुःख से पार जा सकते हैं। भजन में भक्तों को यह बताने का प्रयास किया गया है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, यदि हमारी आस्था राम में है तो वह संकट हमें पार कर देंगे।

भजन में भावनाओं का गहन समावेश है, जिसमें भक्तों का राम जी पर अटूट विश्वास व्यक्त किया गया है। 'कृपा कर दो लाल कन्था, जय जय जय राम' जैसे शब्द यह दर्शाते हैं कि भक्त राम जी से कृपा की याचना कर रहे हैं। यह सरलता से यह दर्शाता है कि जीवन के कठिन समय में विश्वास और धैर्य बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। संकट में फंसे भक्तों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि सच्चे मन से राम को पुकारने पर उनकी नैया पार अवश्य होगी। यह भाव किसी भी भक्त के मन में ऊर्जा और साहस भर देता है, जिससे वह संकट का सामना कर सके।

इस भजन का मुख्य दार्शनिक तत्व भक्ति मार्ग की श्रेष्ठता का प्रचार करना है। भक्ति मार्ग वह मार्ग है जो भक्त को सीधे भगवान से जोड़ता है। भजन में विविध भावनाएं जैसे विश्वास, असीम प्रेम, और समर्पण दर्शाई गई हैं। भक्त भगवान राम को संकटमोचन मानते हैं और उन पर भरोसा रखते हैं कि वे सच्चे मन से की गई प्रार्थनाओं का उत्तर अवश्य देंगे। इस मार्ग में विश्वास रखने से मानव का मनोबल बढ़ता है और उसे आत्मिक शांति मिलती है। यह भजन भक्ति और प्रेम के आधार पर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का इतिहास और इसकी महत्ता भारतीय धार्मिक साहित्य, विशेष रूप से रामायण के संदर्भ में समाहित है। भगवान राम को संकटों के समय सहारा देने वाले देवता माना जाता है। रामायण के अनुसार, उन्होंने अपने भक्तों की सहायता कई मौकों पर की है, जैसे कि भगवान राम का सीता माता को संकट से उबारा जाना। इस भजन के माध्यम से, भक्त उन मूल्यों की पुनर्स्थापना करते हैं जो राम का अनुसरण करते हुए हमें सिखाते हैं कि आपदाओं के समय धैर्य और भक्ति से न केवल आत्मा को शांति मिलती है बल्कि जीवन में भी अच्छे परिणाम मिलते हैं।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम का नाम जपने और इस भजन को गाने से मानसिक शांति व संतोष प्राप्त होता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मकता का संचार करता है। चित्त की शुद्धि होती है और भक्तों में धैर्य का विकास होता है। भक्ति भाव से इस भजन को गाने से आत्मिक संतोष और तनाव का कम होना निश्चित है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

'जिसकी नैया राम भरोसे' भजन की पूजा का सर्वोत्तम समय सुबह का है। इस समय दिन की शुरुआत राम नाम के जप के साथ करना पवित्र हो जाता है। श्रद्धा के साथ एक दीया जलाकर और कुछ पुष्प अर्पित करते हुए इस भजन का गायन करना चाहिए। मन की एकाग्रता बनाए रखने के लिए उचित आसन में बैठकर भजन का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के गाने से मानसिक शांति कैसे प्राप्त होती है?

भजन गाने से मन में सकारात्मकता का संचार होता है, जिससे चिंताओं और तनाव से राहत मिलती है। राम का नाम जपने से आत्मा को शांति मिलती है।

क्या इस भजन को केवल मंदिर में गाना चाहिए?

नहीं, यह भजन घर पर भी गाया जा सकता है। इसे सुबह के समय श्रद्धा से गाना लाभदायक होता है, जिससे दिन की शुरुआत अच्छी होती है।

क्या इस भजन में किसी विशेष पूजा विधि की आवश्यकता है?

विशेष पूजा विधि की आवश्यकता नहीं है। बस एक दीया जलाकर और सामान की अर्पण करके इसे मन से गाया जा सकता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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