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शेर पे सवार होके आजा शेरावाली (Sher Pe Sawar Hoke Lyrics in Hindi) - Sonu Nigam Sherawali Bhajan -

45 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शेरावाली का अद्वितीय स्तुति: भक्तों का संबल

शेरावाली माँ की आराधना, भक्तों के हृदय में शक्ति और भक्ति जगाने का अद्भुत साधन है।

शेर पे सवार होके आजा शेरावाली (Sher Pe Sawar Hoke Lyrics in Hindi) - Sonu Nigam Sherawali Bhajan - Bhaktilोकशेर पे सवार होके आजा शेरावाली (Sher Pe Sawar Hoke Lyrics in Hindi) - Sonu Nigam Sherawali Bhajan - शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)सोये हुए भाग्य जगा जा शेरावालियेशेर पे सवार होके आजा शेरावालिये(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)शेरावालिये माँ ज्योतावालियेशेरावालिये माँ ज्योतावालियेरखियो माँ लाज इन अँखियों के तारों कीओ.. ओ..रखियो माँ लाज इन अँखियों के तारों कीडूबने न पाए नैयां हम बेसहारों कीओ..नैया को किनारे लगा जा शेरावालियेनैया को किनारे लगा जा शेरावालियेहाँ शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)शेरावालिये माँ ज्योतावालियेशेरावालिये माँ ज्योतावालियेसच्चे दिल से ध्यानु जी ने जब था बुलाया माँसच्चे दिल से ध्यानु जी ने जब था बुलाया माँकटा हुआ शीश तूने घोड़े का लगाया माँहो.. हो..भक्तों की आन को बचा जा शेरावालियेभक्तों की आन को बचा जा शेरावालियेहोई शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)शेरावालिये माँ ज्योतावालियेशेरावालिये माँ ज्योतावालियेशेर पे सवार होके आजा शेरावालिये(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)होई शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)(शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये)

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का प्रमुख विषय माँ दुर्गा की शरण में जाने का महत्व है, जो भक्तों के लिए शक्ति और साहस का स्रोत मानी जाती हैं। 'शेर पे सवार होके आजा' भक्ति की गहराई को दर्शाता है, जिस में माँ का अवतार एक शक्तिशाली शेरनी के रूप में है। यह भक्तों को जागृत करने का एक माध्यम है, जिससे वह अपने सोए हुए भाग्य को जगाने के लिए माँ से प्रार्थना करते हैं। भजन के भीतर छिपा एक तात्त्विक संदेश यह है कि जब भक्त पूरी निष्ठा से माँ को पुकारते हैं, तो वह उन्हें बिना किसी संकोच के अपनी कृपा प्रदान करती हैं। माँ 'ज्योतावाली' के रूप में श्रद्धा और भक्ति को जागृत करती हैं, जिससे भक्तों की अंतर्दृष्टि की ज्योति जगमगाती है।

भजन में 'सोये हुए भाग्य जगा जा' का अर्थ है, अपने दुर्बलता को छोड़कर खुद को संबलित करना। यहाँ शेरावाली माँ से बचाव और संरक्षण की प्रार्थना की जा रही है। 'नैया को किनारे लगा जा' यह दरशाता है कि जीवन में कष्ट और संकट के समय में माँ का सहारा सबसे महत्वपूर्ण होता है। माँ के प्रति यह श्रद्धा और उम्मीद भक्तों के मन में एक गहरी विषाद को उठाती है, जिससे उन्हें अपने दुःखों और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। इस प्रकार, भक्त अपने हृदय में माँ के प्रति अद्वितीय प्रेम को महसूस करते हैं, जो उन्हें कठिनाईयों से निकलने की प्रेरणा देती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग के सिद्धांतों को पूरी स्पष्टता के साथ दर्शाया गया है। इसे गाते समय भक्तों का भावपूर्ण समर्पण देवी के प्रति एक अटल विश्वास की स्वीकृति को दर्शाता है। तीव्रता से लय में बंधी आवाज़ें दर्शाती हैं कि माँ की आराधना मात्र एक याचना नहीं, बल्कि एक गहरा संबंध है। भक्ति मार्ग में भक्त का हर कदम माँ के चरणों में है, अपने मन से उसे समर्पित करते हुए। इसलिए, यह भजन ना केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शेरावाली माँ, जिन्हें दुर्गा या काली भी कहा जाता है, का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में बेहद गहरा है। देवी भगवती की उपासना की परंपरा पुरानी है, जिनका वर्णन वेदों और उपनिषदों में भी मिलता है। यह भजन विशेष रूप से दुर्गा पूजा और नवरात्रि जैसे पावन पर्वों में गाया जाता है। पुराणों में दर्शाया गया है कि माँ शक्ति ही संहारक और सृजनात्मक शक्तियों का प्रतीक हैं, और भक्तों को संकट के समय में सुरक्षा प्रदान करती हैं। यह भजन उस देवत्व का गुणगान करता है, जिसमें जगत की रक्षा की शक्ति निहित है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ मानसिक और आत्मिक शांति प्रदान करता है। भक्त इसे गाते समय आंतरिक संतुलन और ऊर्जा का अनुभव करते हैं। माता की कृपा से भय, असुरक्षा और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। इसे नियमित रूप से गाने से सकारात्मकता का संचार होता है और भक्ति से जीवन में सुख-संपत्ति का प्रवेश होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय, माँ दुर्गा की पूजा के बाद किया जाता है। भक्तों को पूजा स्थान पर एक दीया जलाना चाहिए और माँ को फूल अर्पित करने चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर मन को केंद्रित करना आवश्यक है। भक्त को अपने हृदय में माँ की कृपा के लिए विनम्रता और श्रद्धा का भाव रखना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का उद्देश्य माँ शेरावाली की कृपा को प्राप्त करना तथा भक्तों में साहस और शक्ति का संचार करना है।

शेरावाली माँ का क्या महत्व है?

शेरावाली माँ भारतीय पौराणिक कथाओं में शक्ति और संरक्षण का प्रतीक हैं, जो भक्तों को सहायता और सुरक्षा प्रदान करती हैं।

क्या इस भजन का पाठ केवल नवरात्रि में किया जाता है?

नहीं, इस भजन का पाठ साल भर किया जा सकता है, लेकिन नवरात्रि और दुर्गा पूजा के समय इसकी विशेष महत्ता होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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