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सुखकर्ता दुखहर्ता आरती (Sukhkarta Dukhharta Aarti With Lyrics By Vinay Mandke ) - Ganpati Aarti - Bhaktilok

150 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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सुखकर्ता दुखहर्ता आरती (Sukhkarta Dukhharta Aarti With Lyrics By Vinay Mandke ) -


वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ
Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा 
Nirvighnam Kurume Deva Sarva Karyeshu Sarvada.

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची
Sukh Karta Dukh Harta Varta Vighnachi 

नुर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
Nurvi Purvi Prem Kripa Jayachi 

सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची
Sarwangi Sundar Uti Shendurachi 

कंठी झरके माल मुक्ता फळाची 
Kanthi Jharke Maal Mukhta Phalachi

जय देव जय देव जय मंगल मूर्ती
Jai Dev Jai Dev Jai Mangal Murti

दर्शनमात्रे मना कामना पुरती 
Darshan Matre Mana Kamana Purti

रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा
Ratnakhachit Phara Tujh Gaurikumra 

चंदनाची उटी कुंकुम केशरा
Chandanachi Uti Kumkum Keshara 

हिरे जडित मुकुट शोभतो बरा
Hire Jadit Mukut Shobhato Bara 

रुणझुणती नुपुरे चरणी घागरिया 
Runjhunati Nupure Charani Ghagriya 

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती
Jai Dev Jai Dev Jai Mangal Murti

दर्शनमात्रे मनकामना पुरती 
Darshan Marte Maan Kamana Purti 

लंबोदर पितांबर फनीवर वंदना
Lambodar Pitambar Phanivar Vandana 

सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना
Saral Sond Vakratunda Trinayana

दास रामाचा वाट पाहे सदना
Das Ramacha Vat Pahe Sadna 

संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवंदना
Sankati Pavave Nirvani Rakshave Survar Vandana

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती
Jai Dev Jai Dev Jai Mangal Murti

दर्शनमात्रे मनकामना पुरती 
Darshan Marte Maan Kamana Purti 




🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "सुखकर्ता दुखहर्ता आरती (Sukhkarta Dukhharta Aarti With Lyrics By Vinay Mandke ) - Ganpati Aarti - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 17 Aug 2026

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