रामायण आवाहन दोहे (Ramayan Aavahan Dohe Lyrics in Hindi) - एक दिव्य परिचय
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में महाकाव्य 'श्रीरामचरितमानस' या 'रामायण' का पाठ करना अत्यंत ही पुण्यदायी और मोक्षदायक माना गया है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस की कथा प्रारंभ करने से पूर्व अथवा किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, सुंदरकांड पाठ या रामायण पाठ के आरंभ में भगवान श्री राम, माता सीता, श्री हनुमान जी और समस्त आराध्य देवी-देवताओं का स्मरण करते हुए 'आवाहन दोहे' गाए जाते हैं। इन पावन दोहों के माध्यम से साधक अपने मन को एकाग्र कर भगवान के दिव्य स्वरूप का आह्वान करता है ताकि पूजा और पाठ में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। रामायण आवाहन दोहे (Ramayan Aavahan Dohe Lyrics in Hindi) का पाठ करने मात्र से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मन की दुर्बुद्धि और कलुषता का नाश होता है तथा जीवन में ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का प्रकाश फैलता है। भक्तजनों के बीच यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और प्रत्येक अनुष्ठान का श्रीगणेश इन्हीं पवित्र मंगलाचरण और आवाहन छंदों के साथ किया जाता है।
सम्पूर्ण रामायण आवाहन दोहे लिरिक्स | Complete Ramayan Aavahan Dohe Lyrics
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:
जेहि सुमिरत सिध्द होय गण नायक करिवर बदन ।
करहुँ अनुग्रह सोई बुध्दि राशि शुभ गुण सदन ॥
मूक होई वाचाल पंगु चढ़ई गिरिवर गहन ।
जासु कृपासु दयालु द्रवहॅुं सकल कलिमल दहन ॥
नील सरोरुह श्याम तरुन अरुन वारिज नयन ।
करहुँ सो मम उर धाम सदा क्षीर सागर सयन ॥
ह्लाुंँद - इंदु सम देह उमा रमन करुणा अयन ।
जाहिं दीन पर नेह करहुँ कृपा मर्दन मयन ॥
बंदहु गुरु पद कंज कृपा सिंधु नर रुप हरि ।
महा मोह तब पुंज जासु वचन रवि कर निकर ॥
बंदहु मुनि पद कंज रामायन जेहि निर मयऊ ।
सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दुषन सहित ॥
बंदहु चारहुं वेद भव वारिध वो हित सरिस ।जिनहिं न सपनेहु खेद वरनत रघुपति विमल यश ॥
वंदहु विधि पद रेनु भव सागर जिन कीन्ह यह ।
संत सुधा शशि धेनु प्रगटे खल विष वारुनी ॥
बंदहु अवध भुआल सत्य प्रेम जेहि राम पद ।
बिछुरत दीन दयाल प्रिय तनु तृन इव पर हरेऊ ॥
बंदहु पवन कुमार खल वन पावक ज्ञान घन ।
जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चापधर ॥
राम कथा के रसिक तुम, भक्ति राशि मति धीर ।
आय सो आसन लीजिये, तेज पुंज कपि वीर ॥
रामायण तुलसीकृत कहँऊ कथा अनुसार ।
प्रेम सहित आसन गहँऊ आवहँ पवन कुमार ॥
रामायण आवाहन दोहों का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth
रामायण आवाहन दोहे (Ramayan Aavahan Dohe Lyrics in Hindi) के प्रत्येक श्लोक और दोहे का दार्शनिक और आध्यात्मिक अर्थ अत्यंत गहरा है। इन दोहों में सबसे पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है, जो बुद्धि और शुभ गुणों के धाम हैं, ताकि कथा निर्विघ्न संपन्न हो। इसके पश्चात भगवान शिव और माता पार्वती का स्तवन किया जाता है, जिनकी कृपा से गूंगा व्यक्ति भी वाचाल (कुशल वक्ता) हो जाता है और लंगड़ा व्यक्ति भी गहरे पर्वतों को पार कर लेता है। ऐसे दयालु और कलि के पापों का नाश करने वाले प्रभु श्री राम का ध्यान किया जाता है जो नीलकमल के समान श्यामवर्ण और अरुण वारिज (लाल कमल) जैसे नेत्रों वाले हैं तथा क्षीर सागर में शयन करते हैं।
इसके साथ ही अपने गुरु चरणों की वंदना की जाती है जो साक्षात नर रूप में हरि (भगवान) के समान हैं और जिनके वचन रूपी सूर्य की किरणें महामोह के अंधकारमय पुंज का नाश कर देती हैं। वाल्मीकि, तुलसीदास और अन्य महर्षियों तथा रामायण की रचना करने वाले मुनियों के चरणों में नमन किया जाता है। वेदों, ब्रह्मा जी की चरण रज, अयोध्या के राजा दशरथ (जिन्होंने राम प्रेम में अपने प्राण त्याग दिए) और संकटमोचन पवनसुत हनुमान जी का आह्वान किया जाता है। अंत में भक्तगण अत्यंत प्रेम और भावुकता के साथ श्री हनुमान जी महाराज से प्रार्थना करते हैं कि वे रामकथा के सबसे बड़े रसिक और तेजपुंज हैं, अतः वे इस पवित्र अनुष्ठान में अपना स्थान ग्रहण करें। इस प्रकार इन दोहों का सामूहिक पाठ साधक के अंतःकरण को पूरी तरह से पवित्र और भक्तिमय बना देता है।
आवाहन दोहों की मुख्य विशेषताएं एवं आध्यात्मिक महत्व | Highlights & Significance
सनातन संस्कृति में किसी भी बड़े धार्मिक ग्रंथ या कथा के पाठ से पूर्व 'मंगलाचरण' या 'आवाहन' का विशेष विधान है। रामचरितमानस के आरंभ में गोस्वामी तुलसीदास जी ने इन मंगलाचरण श्लोकों और दोहों की रचना करके यह संदेश दिया है कि बिना गुरु, गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव, वेदों और हनुमान जी की कृपा के अध्यात्म के मार्ग पर आगे बढ़ना असंभव है। रामायण आवाहन दोहे (Ramayan Aavahan Dohe Lyrics in Hindi) के माध्यम से साधक अपनी समस्त अहंकार और बाधाओं को त्यागकर ईश्वर के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाता है। इन दोहों का नियमित स्मरण करने से मानसिक तनाव दूर होता है, घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है तथा भगवान श्री राम की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है। भक्त लोग श्री हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ से पहले भी इन आवाहन दोहों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण करते हैं।
पाठ करने का सही समय, नियम एवं विधि | Recitation Method & Rules
राamaayan Aavahan Dohe का पाठ करने के लिए कुछ विशिष्ट नियमों और पवित्रता का ध्यान रखना आवश्यक होता है:
- समय: प्रातःकाल स्नान करने के पश्चात शुद्ध वस्त्र धारण करके इन दोहों का पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है। संध्याकाल में भी दीपक प्रज्वलित करके इनका पाठ किया जा सकता है।
- स्थान: घर के पूजा गृह में, मंदिर में अथवा किसी भी पवित्र अनुष्ठान, सुंदरकांड पाठ, या रामायण पाठ के ठीक आरंभ में इसे पढ़ा जाता है।
- आसन: कुशा या ऊनी आसन पर बैठकर रीढ़ की हड्डी सीधा रखते हुए शांत चित्त से पाठ करना चाहिए।
- सामग्री: पाठ के दौरान सामने भगवान श्री राम, माता सीता और हनुमान जी का चित्र या विग्रह रखकर दीप, ध्रुव, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करना चाहिए।
- उच्चारण: शब्दों का उच्चारण शुद्ध और स्पष्ट होना चाहिए ताकि मन में सकारात्मक स्पंदन और भक्ति का भाव जागृत हो सके।
रामायण आवाहन दोहे से जुड़े प्रमुख देवी-देवता एवं संत | Associated Deities & Saints
इन पावन दोहों में कई प्रमुख दिव्य सत्ताओं और संतों का एक साथ स्मरण किया जाता है, जो इस प्रकार हैं:
- गणेश जी: विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता, जो किसी भी कार्य को बिना बाधा के पूरा करते हैं।
- उमा-महेश्वर (शिव-पार्वती): करुणा के सागर और समस्त चराचर जगत के माता-पिता।
- गुरुदेव: ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले और अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करने वाले मार्गदर्शक।
- वेद और ब्रह्मा जी: सृष्टि और ज्ञान के मूल स्रोत।
- राजा दशरथ (अवध भुआल): सत्य और प्रेम के प्रतीक जिन्होंने राम वियोग में प्राण त्यागे।
- पवनसुत हनुमान जी: ज्ञान, बल और रामभक्ति के महानायक जो कथा के मुख्य संरक्षक माने जाते हैं।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द / पद | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| गण नायक करिवर बदन | हाथी के मुख वाले गणेश जी | विघ्न विनाशक देवता |
| मूक होई वाचाल | मूक (गूँगा) व्यक्ति बोलने वाला हो जाता है | ईश्वर की कृपा की महिमा |
| पंगु चढ़ई गिरिवर गहन | लंगड़ा व्यक्ति गहरे पहाड़ पर चढ़ जाता है | असंभव कार्य संभव होना |
| कलिमल दहन | कलिकाल के पापों को जलाने वाले | पापनाशक श्री राम |
| वारिज नयन | कमल के समान नेत्र वाले | भगवान राम का सौंदर्य |
| वोधित सरिस | नाव के समान | भवसागर पार कराने वाले वेद |
| तेज पुंज कपि वीर | तेज के पुंज हनुमान जी | राम भक्त हनुमान |
एक नजर में रामायण आवाहन दोहे की जानकारी | Quick Information
| रचना का नाम | रामायण आवाहन दोहे (Ramayan Aavahan Dohe) |
|---|---|
| मुख्य ग्रंथ | श्रीरामचरितमानस (बालकांड मंगलाचरण) |
| रचनाकार | गोस्वामी तुलसीदास जी |
| भाषा | अवधि एवं ब्रज मिश्रित संत भाषा |
| मुख्य आराध्य | भगवान श्री राम, माता सीता, श्री हनुमान जी एवं गुरुजन |
| उद्देश्य / थीम | कथा आरंभ से पूर्व विघ्ननाश और देवताओं का आह्वान |
| उपयुक्त अवसर | रामायण पाठ, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा या दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत रामायण आवाहन दोहे (Ramayan Aavahan Dohe Lyrics in Hindi) को प्रामाणिक धार्मिक ग्रंथों एवं पारंपरिक रामायण प्रतियों के आधार पर शुद्ध देवनागरी लिपि में संकलित किया गया है ताकि पाठकों को शत-प्रतिशत सटीक और भक्तिमय सामग्री प्राप्त हो सके।
स्रोत एवं संदर्भ
- श्रीरामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास (गीता प्रेस, गोरखपुर संस्करण)
- वाल्मीकि रामायण एवं पारंपरिक सनातन कथा पद्धतियाँ
- भक्ति साहित्य एवं लोक परंपरा संकलन
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