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प्रार्थना - भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना (Bhagwan Meri Naiya) - PRAYER Bhajan - Bhaktilok

71 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान की कृपा से नैया पार लगाने की प्रार्थना

इस भजन के माध्यम से भगवान से अपनी नैया पार लगाने की प्रार्थना करें और आस्था जागृत करें।

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना हे भगवान, मेरी नैया उस पार लगा देना। जिसका तू है सहारा, त्रिभुवन में कोई न हमारा। हे भगवान, मेरी नैया उस पार लगा देना। कई दुःख से जूझती, फिर भी मैं हंसती। हर परिस्थिति, हर खतरे में, तू ही है जो संजीवनी। हे भगवान, मेरी नैया उस पार लगा देना। जब जीवन में हो दुश्वारियाँ, तू बिन और कोई ना सहारा। तेरे बिना मेरा क्या है, सब लुट गया बेकार। हे भगवान, मेरी नैया उस पार लगा देना। भावना भक्ति की, तेरा ही का ध्यान। तेरे बिना, कुछ भी नहीं, जीवन का क्या है मान। हे भगवान, मेरी नैया उस पार लगा देना।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन में भगवान से प्रार्थना की जा रही है कि वह भक्त की नैया को संकट के समय सुरक्षित रूप से पार लगा दें। यह नैया विषम परिस्थितियों को दर्शाती है, जहाँ भक्त हर दिन के जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करता है। 'जिसका तू है सहारा' पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त की आस्था केवल भगवान में है, क्योंकि उसके अलावा कोई अन्य सहारा नहीं है। जीवन के अनेक दुखों और परेशानियों के बावजूद, यह भक्ति भाव और विश्वास का संचार करती है कि भगवान हर परिस्थिति में साथ हैं। इस भजन में अनेकों भावनाएँ समाहित हैं, जो भक्त की आस्था और भक्ति की गहराई को बयां करती हैं।

इस भजन का भावार्थ यह है कि भक्त अपने जीवन के सौ वर्षों के अनुभवों को भगवान के सामने रखते हुए, उनसे सहायता की कामना करता है। 'कई दुःख से जूझती, फिर भी मैं हंसती' पंक्ति यह दर्शाती है कि किसी भी प्रकार की कठिनाइयाँ आने पर भी भक्त की हिम्मत और धैर्य को बनाए रखता है। भगवान की कृपा से ही वह तटस्थ रहकर हंसता है। जब भक्त कहता है कि 'तेरे बिना मेरा क्या है', तो यह उस गहरे वैराग्य की भावना को भी व्यक्त करता है, जहाँ भक्त ने सारी बुराइयों और कठिनाइयों को भगवान के सामने प्रस्तुत कर दिया है। इस प्रकार के समर्पण में भक्त की भक्ति और समर्पण की महानता का अहसास होता है।

भक्ति मार्ग का यह भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन में आस्था के बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते। 'हर परिस्थिति, हर खतरे में, तू ही है जो संजीवनी' यह पंक्ति दर्शाती है कि भगवान का स्मरण ही हमें जीवन की कठिनाइयों से पार जाने की शक्ति देता है। भक्ति मार्ग पर चलकर भक्त भगवान की ओर अग्रसर होते हैं और यह भजन इस पथ का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें न केवल भगवान की कृपा की कामना है, बल्कि भक्त की भक्ति और समर्पण का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति और धार्मिक साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसका उल्लेख अद्वितीय संस्कृतियों और परंपराओं की समृद्धि को दर्शाता है। विभिन्न पुराणों और उपनिषदों में भगवान की कृपा को प्राप्त करने की महत्ता बताई गई है। जैसे कि भगवद्गीता में अर्जुन की भगवान श्रीकृष्ण से सहायता की प्रार्थना की गई है, उसी प्रकार यह भजन भी भक्त को कठिनाई में भगवान पर निर्भर रहने की प्रेरणा देता है। यह भक्ति की शक्ति का प्रतीक बनकर, भक्तों को एकजुट करने का कार्य करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति और शारीरिक स्फूर्ति मिलती है। भक्त भगवान को याद करते हुए सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं, जिससे जीवन में उत्साह और नयी शक्ति का संचार होता है। इसके नियमित जाप से मन की अशांति और चिंताओं का समाधान होता है। भजन सुनने और गाने से भक्त की भक्ति और सच्चाई में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ करने का आदर्श समय सुबह का है, जब मन शांत होता है और दिन की शुरुआत होती है। पूजा करते समय एक दीया जलाना और फूलों की माला अर्पित करना शुभ होता है। ध्यान मुद्रा में बैठकर, पूर्ण ध्यान और विश्वास के साथ इस भजन का जाप करना चाहिए। यह कार्य भक्त को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है भगवान को संकट के समय अपनी नैया यानी जीवन की कठिनाईयों में सहारा मानते हुए प्रार्थना करना। यह भक्ति भाव और विश्वास को दर्शाता है।

इस भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन में भक्त भगवान से प्रार्थना कर रहा है कि वह उसे जीवन की कठिनाइयों से उबारें और हर संकट में उनका साथ दें। यह भगवान पर अवलंबन की भावना को प्रकट करता है।

इस भजन का गुणगान क्यों किया जाता है?

यह भजन भक्तों को आशा और विश्वास प्रदान करता है, जिससे वे जीवन की मुश्किलों का सामना कर सकें। यह श्रद्धा और भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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