मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
हनुमान अष्टक (HANUMAN ASHTAK Lyrics in Hindi) - SURESH WADKAR Hanuman Bhajan Hanuman Chalisa - Bhaktilok
हनुमान अष्टक (HANUMAN ASHTAK Lyrics in Hindi) - SURESH WADKAR Hanuman Bhajan Hanuman Chalisa -
Title - HANUMAN ASHTAK
Singer - Suresh Wadkar
Lyricist: Traditional
Album - Enchanting Bhajans by Suresh Wadkar
Composer - Vivek Prakash
दोहा -
लाल देह लाले लसे अरु धारी लाल लंगूर |
बजर देह दानव डालन जय जय जय कपी सूर ||
(संकट मोचन हनुमान अष्टक Lyrics in Hindi) -
बाल समय रवि भक्त लियो टैब तीनाहु लोका भायो अंधियारो |
ताही सो ट्रैस भायो जग को यह संकट कहु सो जात न तारो |
दीवान आनी करी बिनती टैब चढी दीयो रवि कश्त निवारो ||
को नहीं जानात है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ||1||
बाली की ट्रैस कापी बसई गिरी जाट महाप्रभु पंथ निहारो |
चौंकी महा मुनि साप दीयो तब चुनी कौन बेचार बेचारो |
काई द्विज रूप लिए महा प्रभु सो तुम दास के सो निवारो ||
को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ||2||
अंगद के संग लेने गए सिया खोज कापीस यह बनने ऊंचारो |
जीवन न बचाउ हम सो जो बिना सुधी लाए एहान पागु धारो |
हायरी थे तत सिंधु सबाई तब लाए सिया-सुधी प्राण उबारो ||
को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ||3||
रावण त्रास दया सिया को सब राक्षसी तो कहीं सोक निवारो |
ताहि समय हनुमान महाप्रभु जय महा रजनीचर मारो ||
चाहत सीया अशोक पुत्र आगी सुदाई प्रभु मुद्रा सो निवारो ||
को नहीं जानात है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ||4||
बाण लगाओ उर लचिमन के तब प्राण ताजे सुत रावण मारो |
लाई गृह बैद्य सुशेन समेट तबाई गिरी द्रोण सु बीयर ऊपर |
आनी सजीवन हाथ दया तब लछीमन के तुम प्राण उबारो|
को नहीं जानात है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ||5||
रावण जुड अजान कियो टैब नाग की फास सबाई सर दारो |
श्री रघुनाथ समीत सबाई दाल मोह भयो ये संकट भारो |
आनी खगेस तबाई हनुमान जू बंधन काटी सूत्र निवारो |
को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ||6||
बंधु समैत जबाई अहिरावण लाई रघुनाथ पाताल सिद्धारो |
देबिही पूजा भालि विधि सो बाली देउ सबाई मिल मंत्र विचारो |
जय सहाय भायो तब ही अहिरावण सैन्य समेत संहारो |
को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ||7||
काज कियो बरह दीवान के तुम बीयर महाप्रभु देखी बिचारो |
कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुम नहीं जात है तारो |
बेगी हारो हनुमान महाप्रभु जो कुछ संकट हो हमरो |
को नहीं जानात है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ||8||
संकट मोचन हनुमान अष्टक – हनुमान मंत्र
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "हनुमान अष्टक (HANUMAN ASHTAK Lyrics in Hindi) - SURESH WADKAR Hanuman Bhajan Hanuman Chalisa - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।
भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?
शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।
क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?
हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।
शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?
हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें