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मोहे छठ का बरत मनभावन लागे (Mohe Chhath Ka Barat) - Chhath Pooja Geet ANINDITA BANERJEE - Bhaktilok

55 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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छठ मैया का आशीर्वाद: मोहे छठ का वरत

इस भजन के माध्यम से छठ पूजा की महिमा का अनुभव करें और छठ मैया से कृपा की प्रार्थना करें।

मोहे छठ का बरत मनभावन लागे मोहे छठ का बरत मनभावन लागे सूरज देवता की आरती उठे हैं सभी सामानी दुनियारे छठ का बरत मनभावन लागे मोहे छठ का बरत मनभावन लागे तट पर खड़ी मैं करूँ प्रार्थना धन संपत्ति का हो संचारना भक्तिपूर्वक करूँ मैं आह्वान छठ माता का मोहे छठ का बरत मनभावन लागे मोहे छठ का बरत मनभावन लागे खुद के साथ सखा रे संग है भाई बहनों की सुखदायी भावना है आओ सजे मिलकर छठ पूजा के रंग में मोहे छठ का बरत मनभावन लागे मोहे छठ का बरत मनभावन लागे उठे छठ मैया का नाम जपो प्रभु का आशीर्वाद सबको मिले छठ पूजा का पर्व ल्यावे शुभ रंग बरसे मोहे छठ का बरत मनभावन लागे मोहे छठ का बरत मनभावन लागे

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन 'मोहे छठ का बरत मनभावन लागे' छठ पूजा के प्रति भक्ति और कर्तव्य का प्रतीक है। भजन की शुरुआत में भक्ति भाव प्रदर्शित करते हुए, गीत कार टहलील करता है कि कैसे छठ माता की उपासना करना भक्तों के लिए अत्यंत मनभावन है। भजन में सूरज देवता की आरती का संदर्भ है, जो कि छठ पर्व का एक मूल तत्व है। यह दर्शाता है कि कैसे सूरज देव के प्रति श्रद्धा अति महत्वपूर्ण है। भक्त अपने मन की गहराई से प्रार्थना करता है कि छठ माता धन और संपत्ति का संचार करें। इस प्रकार, भजन के माध्यम से भक्तों की आस्था और भक्ति की गहराई को व्यक्त किया गया है।

इस भजन का गूढ़ भावार्थ यह है कि छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि परिवार एवं समाज के बीच में एकता और प्रेम का प्रतीक है। भक्त इस दिन अपने सभी परिजनों और सखा-Sंगठनों के साथ मिलकर विशेष भाव से पूजा करते हैं। भजन की पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि छठ माता की कृपा से ही जीवन में खुशियां और समृद्धि का संचार होता है। यहाँ पर सखा-संगठन का भी महत्व बताया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सामूहिक भक्ति से सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। इस प्रकार, भक्ति का यह पर्व न केवल आध्यात्मिक बल्कि सामाजिक भी है।

भक्तिमार्ग के संदर्भ में, यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति और श्रद्धा के साथ की गई उपासना का फल अवश्य प्राप्त होता है। छठ पूजा का सही कारण केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि समाज में प्रेम और समरसता का बढ़ावा देना है। भक्ति में समर्पण, विश्वास, और श्रद्धा के साथ किया गया हर कार्य परिपूर्णता में परिवर्तित होता है। इस प्रकार, भक्ति का यह मार्ग हमें आत्मा की शुद्धि एवं ईश्वर प्राप्ति की दिशा में ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

छठ पूजा भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है, विशेषतः बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में। यह पर्व सूर्य देवता और छठ माता को समर्पित किया जाता है, जिसके अंतर्गत व्रति महिलाएं उपवास रखती हैं और विशेष अनुष्ठान करती हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्य देवता के प्रति श्रद्धा प्रकट करना जीवन में सुख और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। महाभारत और अन्य पुराणों में भी सूर्य को जीवन दाता के रूप में वर्णित किया गया है। इस भजन में छठ माता के प्रति भक्ति और श्रद्धा की गहराई को समझने का प्रयास किया गया है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का निरंतर पाठ करने से भक्त को मानसिक शांति, आध्यात्मिक विकास और पारिवारिक संबंधों में सुधार देखने को मिलता है। छठ माता की कृपा से सम्पन्नता और खुशहाली का संचार होता है। विशेषकर जो लोग इस उपासना को श्रद्धा भाव से करते हैं, उनकी सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं और जीवित में कठिनाइयाँ दूर होती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सूर्योदय या सूर्यास्त के समय किया जाना चाहिए, क्योंकि यह समय सूर्य देवता की उपासना के लिए सबसे अति शुभ माना जाता है। पूजा के समय एक दिया जलाकर उसके चारों तरफ गोबर के दीये सजाएं और छठ माता के प्रति अर्घ्य अर्पित करें। मानसिक शांति के लिए सही आसन में बैठकर इस भजन का गहरा भाव से पाठ करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

छठ पूजा कब मनाई जाती है?

छठ पूजा कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाई जाती है। यह पर्व सूर्य और छठ माता की उपासना के लिए प्रसिद्ध है।

मोहे छठ का बरत मनभावन लागे भजन का महत्व क्या है?

यह भजन छठ पूजा की महिमा को बयान करता है, जिसमें भक्त अपने मन से सूर्य देवता और छठ माता से धन-संपत्ति और सुख की प्रार्थना करता है।

छठ पूजा में कौन-कौन से उपाय किये जाते हैं?

छठ पूजा में उपवासी रहने के साथ चढ़ावे के रूप में ठेकुआ, फल, और दूध का प्रयोग किया जाता है। भक्तजन सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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