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Hanuman Bhajan

दुनिया के मालिक को भगवान् कहते हैं संकट के साथी को हनुमान कहते हैं

40 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हनुमान की भक्ति: संकट के साथी का महिमा

हनुमान जी की कृपा से संकटों से मुक्त होकर सुख की प्राप्ति करें।

दुनिया के मालिक को भगवान् कहते हैं संकट के साथी को हनुमान कहते हैं संकटमोचन हनुमान मेरी एक बिनती सुनो जो भी माँगे तेरा नाम लेके वो तेरा हो जाए जो भी हृदय से तेरा स्मरण करता वो तेरे पास आए आँखों में आँसू लेकर, मन में विश्वास लेकर दुनिया के मालिक को भगवान् कहते हैं संकट के साथी को हनुमान कहते हैं जा कहो जगत में जीते जी कोई मरे ना, जो तेरा ध्यान करे वो तुझसे न हटे न जिसके शरण में आ जाये, उसका तो उद्धार करो कृपा वर दे, प्यार दे, सीता राम का वास दे दुनिया के मालिक को भगवान् कहते हैं संकट के साथी को हनुमान कहते हैं हरि ओम हरि ओम, हरि ओम हरि ओम।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन हनुमान जी की महिमा और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है। पहले ही चरण में कहते हैं कि 'दुनिया के मालिक को भगवान् कहते हैं' यह दिखाता है कि भगवान का स्वरूप सबके लिए अटल है और हनुमान जी की पूजा करके हम उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। 'संकट के साथी' के माध्यम से भजन संकट के समय में भगवान पर विश्वास करने की प्रेरणा देता है। जब हम हनुमान जी का नाम लेते हैं, तब हमारे सभी दुख और संकट समाप्त करने में उन्हें सहायता प्राप्त होती है। 'जो भी हृदय से तेरा स्मरण करता' यह दिखाता है कि सच्ची निष्ठा और भक्ति से हनुमान जी अपनी कृपा बरसाते हैं।

इस भजन का भावार्थ हमसे यह है कि हमें हर परिस्थिति में हनुमान जी पर भरोसा रखना चाहिए। जब भी जीवन में चुनौतियाँ आएं, तब हमें हनुमान का नाम लेना चाहिए। भजन में कहा गया है, 'जिसके शरण में आ जाए, उसका तो उद्धार करो'। यह दर्शाता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से हनुमान जी की शरण में आता है, उसकी सभी कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं। हनुमान जी की कृपा से हमें साहस और शक्ति मिलती है, जिससे हम विपरीत परिस्थितियों का सामना कर सकें। यह भक्ति हमारे जीवन को सकारात्मकता से भर देती है।

हनुमान जी को भक्तिभाव से संबोधित करने का यह भजन भक्ति मार्ग की एक श्रेष्ठ उदाहरण है। यह हमें सिखाता है कि केवल भक्ति द्वारा ही हम भगवान को प्रसन्न कर सकते हैं। हनुमान जी का चरित्र साहस, प्यार और भक्ति का प्रतिक है। जब भजन में कहा जाता है कि 'जो भी माँगे तेरा नाम लेके वो तेरा हो जाए', इसका अर्थ है कि जो भी व्यक्ति मन से हनुमान का नाम लेता है, वह भगवान के अनुग्रह को प्राप्त करता है। यह भक्ति मार्ग के सिद्धांत को प्रदर्शित करता है, जिसमें ज्ञान, विश्वास और समर्पण महत्वपूर्ण हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान जी का ध्यान भारतीय पौराणिक कथाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। रामायण में, हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त हैं, जिन्होंने माता सीता को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हनुमान चालीसा जैसे भजनों में उनकी स्तुति की जाती है। संकटमोचन की उपाधि उन पर इसलिए है क्योंकि वे संकट में भक्तों का उद्धार करते हैं। ऐसे भजनों के माध्यम से भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। यह भजन हनुमान के अद्वितीय गुणों और भक्तों के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान जी का नाम लेने से कई लाभ होते हैं। मानसिक शांति, साहस और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है। रोगों से मुक्ति तथा संकटों से सुरक्षा की अनुभूति होती है। जब भक्त मन से हनुमान का ध्यान करते हैं, तो वे आध्यात्मिक और शारीरिक शांति प्राप्त करते हैं। यह भजन सुनने या गाने से भाग्य में सुधार और जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप preferably सुबह या शाम को करना उत्तम है। सुबह का समय आदर्श है क्यों कि दिन की शुरुआत सकारात्मकता से होती है। जो भक्त इस भजन का पाठ करते हैं, उन्हें एक शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर ध्यान लगाना चाहिए। एक दीप जलाना तथा अपने सामने कुछ पुष्प रखकर नेत्र बंद करके हनुमान जी का ध्यान करें। इससे भक्तों का मन एकत्रित होता है और भक्ति की भावना प्रबल होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान ji को संकटमोचन क्यों कहा जाता है?

हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों के सभी संकटों को दूर करते हैं। रामायण में उनके कार्यों से यह सिद्ध होता है।

क्या हनुमान भजन सुनने से मानसिक शांति मिलती है?

हाँ, हनुमान भजन सुनने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है, जिससे मन में सकारात्मकता बढ़ती है।

हनुमान जी की साधना का सही समय क्या है?

हनुमान जी की साधना सुबह के समय श्रेष्ठ मानी जाती है, यद्यपि संध्या समय भी कारगर होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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