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काल भैरव अष्टकम (Kaal Bhairav Ashtakam Lyrics in Hindi) - कालभैरवाष्टकम् कालभैरव जयंती - Bhaktilok

61 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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काल भैरव की आराधना: मुक्ति का मार्ग

काल भैरव अष्टकम का पाठ करने से भक्तों को ज्ञान, मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

काल भैरव अष्टकम (Kaal Bhairav Ashtakam Lyrics in Hindi) - कालभैरवाष्टकम् कालभैरव जयंती - ( कालभैरवाष्टकम् लिरिक्स इन हिंदी ) -ॐ देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजंव्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरमनारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ १॥भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परंनीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम ।कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरंकाशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥२॥शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणंश्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम ।भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियंकाशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥३॥भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहंभक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम ।विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥४॥धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकंकर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम ।स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ ५॥रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकंनित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम ।मृत्युदर्पनाशनं कराळदंष्ट्रमोक्षणंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥६॥अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिंदृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम ।अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकन्धरंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥७॥भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकंकाशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम ।नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥८॥कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरंज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम ।शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनंते प्रयान्ति कालभैरवाङ्घ्रिसन्निधिं ध्रुवम ॥९॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

काल भैरव अष्टकम की आरंभिक पंक्ति में भगवान काल भैरव का दिव्य स्वरूप और उनकी कृपा का वर्णन किया गया है। 'देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं' से यह सिद्ध होता है कि वे भक्तों के लिए सदैव उपलब्ध हैं। काल भैरव का नाम लेते ही भक्ति का संचार होता है, जिससे साधक को त्रास और दुख से मुक्ति मिलती है। 'व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं' पंक्ति में उनके अनंत शक्तियों का गुणगान किया गया है। काल भैरव को ज्योति और ज्ञान का दाता माना गया है, जो जीवन के अंधकार को दूर करता है। आगे की पंक्तियों में उनका शूल और तांत्रिक पक्ष भी विस्तार में आता है, जो यह दर्शाता है कि वे केवल एक देवता नहीं बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के नियंत्रक और हर संकट का समाधानकर्ता हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, काल भैरव अष्टकम भक्तों के मन में विश्वास और शांति भरता है। 'भक्तवत्सलं स्थितं' इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि भगवान अपने भक्तों पर विशेष कृपा रखते हैं। भक्तों में प्रेम की भावना को जागृत करने में भैरव का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे दिगंबर के रूप में कल्पित हैं, जो सभी प्रकार के भूत-प्रेत और दुष्टात्माओं से रक्षा करते हैं। इस प्रकार, 'कालकालमंबुजाक्ष' यह संकेत करता है कि वे समय और अस्तित्व के प्रति समर्पित हैं। उनकी कृपा का अनुभव भक्तों के लिए मुक्ति के द्वार खोलता है, जिससे भक्तों का शोक और मोह का नाश होता है।

अधिकतम धार्मिक ग्रंथों में भगवान काल भैरव को अष्ट सिद्धियों का दाता माना गया है। 'अष्टसिद्धिदायकं' पंक्ति इस बात को प्रमाणित करती है कि उनका ध्यान साधक को आत्मिक सिद्धियों की ओर मार्गदर्शन करता है। काल चक्र से मुक्त होकर व्यक्ति को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल होने की प्रेरणा मिलती है। यहाँ विद्यमान ध्रुवता का संकेत है, जो भक्त की आस्था और भगवान के प्रति समर्पण को दर्शाता है। भक्ति मार्ग पर चलने वाले विरले ही होते हैं, लेकिन जो लोग सच्चे दिल से भैरव का ध्यान करते हैं, वे हमेशा सिद्धि की ओर अग्रसर होते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

काल भैरव अष्टकम का अत्यंत महत्व है। यह गान मुख्यतः काशी काशी में काल भैरव की आराधना के लिए अत्यधिक प्रचलित है। भारतीय पुराणों में काल भैरव का प्रमुख स्थान है। इनका उल्लेख महाभारत और विभिन्न उपनिषदों में भी मिलता है। विशेषकर, भक्तों की कठिनाइयों को दूर करने और उनकी भक्ति को स्थिर करने में भैरव की अनन्य कृपा का वर्णन मिलता है। काल भैरव का आशीर्वाद भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने में सहायता करता है। उनकी आराधना से जीवन में सुख, शांति और सुमति प्राप्त होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। काल भैरव अष्टकम का जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। यह भक्ति साधन से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, जिससे जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। भक्तों की भक्ति में वृद्धि होती है और उनके भीतर अदम्य आत्मविश्वास जागृत होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

काल भैरव अष्टकम का पाठ सुबह के समय करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस समय भक्त को शांत एवं सुखद वातावरण में रहना चाहिए। दीप जलाकर और भैरव जी को पुष्प अर्पित करके इस गीत का पाठ करना आवश्यक है। समर्पण और श्रद्धा के साथ इस भजन का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ध्यानपूर्ण मुद्रा में बैठकर ध्यान करते हुए इस भजन का पाठ करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

काल भैरव अष्टकम का पाठ कब करना चाहिए?

काल भैरव अष्टकम का पाठ सुबह के समय या रात के गोधूलि वेला में करना चाहिए, जब वातावरण शांति से भरा होता है।

इस भजन का महत्व क्या है?

यह भजन मानसिक शांति, भूत-प्रेतों से सुरक्षा और मुक्ति का साधन माना जाता है। भक्तों को यह जीवन में दिशा और प्रेरणा प्रदान करता है।

काल भैरव की पूजा में क्या विशेष ध्यान रखा जाए?

पूजा में भक्त को निश्चित समय पर ध्यान और समर्पण से पूजा करनी चाहिए तथा भैरव जी को विशेष सामान जैसे चावल, फल और पुष्प अर्पित करने चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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