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लगा दे मोरछड़ी का झाड़ा बेडा पार हो जाए (Laga De Morachhani Lyrics in Hindi) - Shyam Baba Bhajan - Bhaktilok

45 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम बाबा की कृपा: भक्तों का उद्धार

इस भजन के माध्यम से श्याम बाबा की अनुकंपा प्राप्त करने की प्रार्थना की जाती है।

लगा दे मोरछड़ी का झाड़ा बेडा पार हो जाए (Laga De Morachhani Lyrics in Hindi) - आज तेरे भक्तों पे दयासरकार हो जाए लगा दें मोरछड़ी का झाड़ा बेड़ा पार हो जाए।। काम करती है ऐसा जो कोई कर ना पाए बिना झाड़े के किस्मत कभी भी संवर ना पाए आज तेरे दरबार मेरा उद्धार हो जाए लगा दें मोरछड़ी का झाड़ा बेड़ा पार हो जाए।। मोरछड़ी आगे आगे ज़माना पीछे पीछे देख कर हो जाती है ये गर्दन नीचे नीचे इक झाड़े से हर सपना साकार हो जाए लगा दें मोरछड़ी का झाड़ा बेड़ा पार हो जाए।। ये झाड़ा मोरछड़ी का लगाकर अपने हाथों से कर दे पूजा इसकी श्याम मेरे हाथों से थामे मोरछड़ी तेरा दीदार हो जाए लगा दें मोरछड़ी का झाड़ा बेड़ा पार हो जाए।। काम अटके जो तेरा कभी जो नैया भटके अगर जो गाड़ी तेरी खाये ‘बनवारी’ झटके लेकर मोरछड़ी लिए असवार हो जाए लगा दें मोरछड़ी का झाड़ा बेड़ा पार हो जाए।। आज तेरे भक्तों पे दयासरकार हो जाए लगा दे मोरछड़ी का झाड़ा बेड़ा पार हो जाए।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में 'मोरछड़ी' का प्रतीकात्मक अर्थ अत्यंत महत्वपूर्ण है। मोरछड़ी, जिसे अद्भुत शक्ति का प्रतीक माना जाता है, भक्त को मार्गदर्शन और सुरक्षा प्रदान करती है। भजन में यह कहा गया है, "काम करती है ऐसा जो कोई कर ना पाए," जिसका आशय यह है कि मोरछड़ी के माध्यम से ऐसी शक्तियाँ जागृत होती हैं, जो जीवन के संकटों को सुलझाने में सक्षम हैं। इसीलिए भक्त श्याम बाबा से प्रार्थना कर रहा है कि उनकी कृपा से जीवन के समस्त दु:ख दूर हों और वे संकटमय स्थितियों से बाहर निकल सकें। इस भजन का एक और महत्वपूर्ण भाव है, "आज तेरे दरबार मेरा उद्धार हो जाए," जो सहजता से भक्त की विनम्रता और भरोसे को दर्शाता है।

भजन की भावनात्मक गहराई का अनुभव इससे होता है कि भक्त अपनी दु:ख-दर्द की कथा सुनाते हुए मोरछड़ी की शक्ति और प्रभाव को याद करता है। भक्त का सरलता से यह विश्वास है कि "बिना झाड़े के किस्मत कभी भी संवर ना पाए," यह दर्शाता है कि आध्यात्मिक जीवन में सही मार्गदर्शन और प्रस्तान की आवश्यकता होती है। मोरछड़ी, जो भक्त की समस्त इच्छाओं के सम्पूर्ण होने का प्रतीक है, उसे अपने जीवन की नवीनीकरण की उम्मीद देती है। क्योंकि श्याम बाबा की उपासना से उनकी ध्यान में जो विस्मयकारी सामर्थ्य होती है, उसे पहचाना जा सकता है। इस तरह, भक्त की भक्ति विधि में , मोरछड़ी की अनुकंपा की चाह देखकर उसकी आत्मा की प्यास शांत होती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का दर्शन होता है, जहाँ भक्त भगवान के प्रति अपने समर्पण को व्यक्त करता है। भक्ति का भाव यह है कि कठिनाइयों में भी विश्वास न टूटे और श्रध्दा का दीप जलता रहे। मोरछड़ी के माध्यम से श्याम बाबा का आशीर्वाद पाकर भक्ते की समस्याएँ हल करने में मदद मिलती है। भारतीय दर्शन में, यही भक्ति का मूल तत्व है: ईश्वर के प्रति आस्था को प्रस्तुत करना और आशीर्वाद प्राप्त करना। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी आत्मा की पवित्रता और ईश्वर के साथ जोड़ी गई एकात्मता की भावनाएं प्रकट करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भजन का मूल आधार भारतीय पौराणिक कथाओं की शिक्षाओं में पाया जा सकता है। श्याम बाबा का व्यक्तित्व, जो भगवान कृष्ण की अद्भुत लीलाओं से जुड़ा है, भक्तों के जीवन में शक्ति और सौंदर्य का संचार करता है। इसे अधिक पवित्र बनाने हेतु, भक्त इस भजन के मध्यम से श्याम बाबा के प्रति अपनी भक्ति को प्रकट करता है, जो कि पुराणों में उनकी कथाओं से प्रेरित है। विशेष रूप से, भगवती उपासना और श्रवण का महत्व यहाँ प्रमुख है, जो जीवात्मा की उन्नति के लिए आवश्यक मानी जाती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति में सहायक होता है। इसे गाने से भक्त में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो दैनिक जीवन में आरोग्य और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। भक्त की आस्था और विश्वास को मजबूत करता है, जिससे निजी और आध्यात्मिक दोनों ही कठिनाइयों का सामना किया जा सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम को करना उत्तम रहता है। पूजा स्थल पर दीया जलाकर, धूप और पुष्प अर्पित करना चाहिए। शांत मन से और प्रेम के साथ श्याम बाबा का स्मरण करके इस भजन का गायन करना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर ध्यान के साथ गाते समय मन विशेषत: संतुलित और समर्पित रहना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मोरछड़ी क्या है और इसका महत्व क्या है?

मोरछड़ी, भक्तों के लिए शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है। यह मोर के पंखों से बनी होती है, जो शुभ और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

इस भजन का चुनाव क्यों करें?

इस भजन को इसलिए चुना जाता है क्योंकि यह श्याम बाबा की शक्ति को सम्मानित करता है और भक्तों के जीवन में समस्या समाधान की सहायता करता है।

भजन सुनने का समय क्या है?

भजन को सुबह सूर्योदय या संध्या समय में गाना अधिक प्रभावी होता है। यह समय भक्ति और ध्यान के लिए उपयुक्त माना जाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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