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सर्व सिद्ध श्री श्याम महिमा (Sarv Siddh Shri Shyam Mahima Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Bhajan - Bhaktilok

71 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

सर्व सिद्ध श्री श्याम महिमा (Sarv Siddh Shri Shyam Mahima Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Bhajan - Bhaktilok

सर्व सिद्ध श्री श्याम महिमा (Sarv Siddh Shri Shyam Mahima Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Bhajan - 

सजधज के बैठा बाबा मंद मंद मुस्काये 

इत्र सुगंध भरपूर बाबा सबके मन है भाये 


खाटू वाले श्याम बाबा तुम्हे मानावे मेरे बाबा 

पूरण करना काम बाबा मेरा रखना मान बाबा 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


श्याम तेरा श्रृंगार निराला 

गाल पुष्पों की पहने माला 

सिर सोने का मुकुट बिराजे 

उस पर मोर पंखुड़ियां साजे 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


घिस घिस चन्दन तोहे लगावे 

लड्डू पैदा भोग लगावे 

खीचड़ भी है शोक से खावे 

नित्य भाव जो भोग लगावे 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


एकादशी को भीड़ भारी 

दर पे पहुंचे नर और नारी 

भावों को भजनो में सुनाये 

श्याम धणी तेरी महिमा गायें 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


बारस की है धोक है लगती 

जगमग तेरी ज्योत है जगती 

इत्र सुगंध उड़े भरपूर 

चरणों से ना करना दूर 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


अमावस्या को शीश दर्शन 

मन हो जाता है ये प्रसन्न 

दीन दुखी दुखिया हैं आते 

मोर छड़ी का झाड़ा लगाते 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


रींगस से निशाँ लेके 

तोरण द्वार पे माथा टेके 

पेट पलनीया आते हैं लेटे 

सब के दुःख को आप हैं मेटे 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


फागुन का जब मेला आया 

तेरा मंदिर मिलके सजाया 

देस्ग विदेश से फूल हैं आया 

जब  तेरा श्रृंगार कराया 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


बाबा जन्मदिन तेरा आया

मावे का प्रसाद बनाया 

फिर तुमको है भोग लगाया 

फिर भक्तों ने मिलकर खाया 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


श्याम कुंड स्नान जो करते 

उसके रोगों को बाबा हरते

बाबा को नित फूल जो चढ़ते 

श्याम बगीची में वो उगते 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


सूरज गढ़ निशान चढ़ाया 

 शिखर ध्वजा पे ये लहराया 

मंदिर पे जो ताला लगा था 

मोरछड़ी से ताला खुला था 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


बदल बदल नित बागा पहने 

रत्नो के ये पहने गहने 

लीले की असवारी हो 

महिमा थारी भारी हो 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


आलू सिंह महाराज हमारे 

श्याम बहादुर श्याम निहारे 

परिजन इनके चंवर डुलाये 

शाम सवेरे मंगल गायें 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए '


प्रेमी संग फागण ये खेले 

लखदातार के लगते मेले 

जय श्री श्याम का लगे है नारा 

खाटू गूँज रहा है सारा 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


सामने राधे कृष्ण विराजे 

देहली पे हनुमान विराजे 

तरह सीढ़ी चढ़ के देखा 

हारे का सहारा देखा 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


पांडव कुल में जनम लियो 

बर्बरीक फिर नाम दियो 

माधव ने है दान लियो 

शीश का दानी नाम कियो 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए 


हारे का सहारा श्याम हमारा 

पूरण करना काम हमारा 

मोनू तुमको आन पुकारा 

महिमा गाये ये जग सारा 

श्याम महिमा गाये भव सागर तर जाए



 

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "सर्व सिद्ध श्री श्याम महिमा (Sarv Siddh Shri Shyam Mahima Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

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