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श्री काली चालीसा लिरिक्स ( MAHAKALI CHALISA Lyrics in Hindi ) - Pamela Jain Kali Mata Bhajan Kali Mata Chalisa - Bhaktilok

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

श्री काली चालीसा लिरिक्स ( MAHAKALI CHALISA Lyrics in Hindi ) -

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

॥ दोहा ॥

जय जय सीताराम के मध्यवासिनी अम्ब ।

देहु दर्श जगदम्ब अब करहु न मातु विलम्ब ॥

जय तारा जय कालिका जय दश विद्या वृन्द ।

काली चालीसा रचत एक सिद्धि कवि हिन्द ॥

प्रातः काल उठ जो पढ़े दुपहरिया या शाम ।

दुःख दरिद्रता दूर हों सिद्धि होय सब काम ॥

॥ चौपाई ॥

जय काली कंकाल मालिनी जय मंगला महाकपालिनी ॥१॥

रक्तबीज वधकारिणी माता सदा भक्तन की सुखदाता ॥२॥

शिरो मालिका भूषित अंगे जय काली जय मद्य मतंगे ॥३॥

हर हृदयारविन्द सुविलासिनी जय जगदम्बा सकल दुःख नाशिनी ॥४॥


ह्रीं काली श्रीं महाकाराली क्रीं कल्याणी दक्षिणाकाली ॥५॥

जय कलावती जय विद्यावति जय तारासुन्दरी महामति ॥६॥

देहु सुबुद्धि हरहु सब संकट होहु भक्त के आगे परगट ॥७॥

जय ॐ कारे जय हुंकारे महाशक्ति जय अपरम्पारे ॥८॥


कमला कलियुग दर्प विनाशिनी सदा भक्तजन की भयनाशिनी ॥९॥

अब जगदम्ब न देर लगावहु दुख दरिद्रता मोर हटावहु ॥१०॥

जयति कराल कालिका माता कालानल समान घुतिगाता ॥११॥

जयशंकरी सुरेशि सनातनि कोटि सिद्धि कवि मातु पुरातनी ॥१२॥

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कपर्दिनी कलि कल्प विमोचनि जय विकसित नव नलिन विलोचनी ॥१३॥

आनन्दा करणी आनन्द निधाना देहुमातु मोहि निर्मल ज्ञाना ॥१४॥

करूणामृत सागरा कृपामयी होहु दुष्ट जन पर अब निर्दयी ॥१५॥

सकल जीव तोहि परम पियारा सकल विश्व तोरे आधारा ॥१६॥


प्रलय काल में नर्तन कारिणि जग जननी सब जग की पालिनी ॥१७॥

महोदरी माहेश्वरी माया हिमगिरि सुता विश्व की छाया ॥१८॥

स्वछन्द रद मारद धुनि माही गर्जत तुम्ही और कोउ नाहि ॥१९॥

स्फुरति मणिगणाकार प्रताने तारागण तू व्योम विताने ॥२०॥


श्रीधारे सन्तन हितकारिणी अग्निपाणि अति दुष्ट विदारिणि ॥२१॥

धूम्र विलोचनि प्राण विमोचिनी शुम्भ निशुम्भ मथनि वर लोचनि ॥२२॥

सहस भुजी सरोरूह मालिनी चामुण्डे मरघट की वासिनी ॥२३॥

खप्पर मध्य सुशोणित साजी मारेहु माँ महिषासुर पाजी ॥२४॥


अम्ब अम्बिका चण्ड चण्डिका सब एके तुम आदि कालिका ॥२५॥

अजा एकरूपा बहुरूपा अकथ चरित्रा शक्ति अनूपा ॥२६॥

कलकत्ता के दक्षिण द्वारे मूरति तोरि महेशि अपारे ॥२७॥

कादम्बरी पानरत श्यामा जय माँतगी काम के धामा ॥२८॥


कमलासन वासिनी कमलायनि जय श्यामा जय जय श्यामायनि ॥२९॥

मातंगी जय जयति प्रकृति हे जयति भक्ति उर कुमति सुमति हे ॥३०॥

कोटि ब्रह्मा शिव विष्णु कामदा जयति अहिंसा धर्म जन्मदा ॥३१॥

जलथल नभ मण्डल में व्यापिनी सौदामिनी मध्य आलापिनि ॥३२॥


झननन तच्छु मरिरिन नादिनी जय सरस्वती वीणा वादिनी ॥३३॥

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे कलित कण्ठ शोभित नरमुण्डा ॥३४॥

जय ब्रह्माण्ड सिद्धि कवि माता कामाख्या और काली माता ॥३५॥


हिंगलाज विन्ध्याचल वासिनी अटठहासिनि अरु अघन नाशिनी ॥३६॥


कितनी स्तुति करूँ अखण्डे तू ब्रह्माण्डे शक्तिजित चण्डे ॥३७॥

करहु कृपा सब पे जगदम्बा रहहिं निशंक तोर अवलम्बा ॥३८॥

चतुर्भुजी काली तुम श्यामा रूप तुम्हार महा अभिरामा ॥३९॥

खड्ग और खप्पर कर सोहत सुर नर मुनि सबको मन मोहत ॥४०॥


तुम्हारी कृपा पावे जो कोई रोग शोक नहिं ताकहँ होई ॥४१॥

जो यह पाठ करै चालीसा तापर कृपा करहिं गौरीशा ॥४२॥


॥ दोहा ॥

जय कपालिनी जय शिवा जय जय जय जगदम्ब ।

सदा भक्तजन केरि दुःख हरहु मातु अविलम्ब ॥


Title - Mahakali Chalisa

Singer - Pamela Jain

Lyricist: Traditional

Album - Devotional Bhakti Songs Vol. 3

MUSIC COMPOSERS - Avijit Das



🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्री काली चालीसा लिरिक्स ( MAHAKALI CHALISA Lyrics in Hindi ) - Pamela Jain Kali Mata Bhajan Kali Mata Chalisa - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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