खाटू वाले श्याम बिहारी कलिकाल में तेरी महिमा हे न्यारी (Khatu Vale Shyam Bihari Kalikal Me Teri Mahima Hai Nyari Lyrics in Hindi) -
खाटू वाले श्याम बिहारी,
कलिकाल में तेरी महिमा हे न्यारी,
खाटू वाले श्याम बिहारी....
हारे हुए का तुम हो सहारा,
कहलाये जग में प्रभु कष्टहारी,
मैं भीशरण में तुम्हारी पड़ा हु,
तारो न तारो मर्जी तुम्हारी,
खाटू वाले श्याम बिहारी........
मेरे ह्रदय का अरमान हे ये,
निगाहो में बस जाये सूरत तुम्हारी,
आठों प्रहर में तुम्हे ही निहारु,
बाते करू तो करू तुम्हारी,
खाटू वाले श्याम बिहारी.......
हमें प्रीत तुमसे हुई श्याम प्यारे,
तुम्हे प्रीत भाई तो होगी हमारी,
माया में लिपटे हुए जिव हे हम,
दया की नजर हम पर करना मुरारी,
खाटू वाले श्याम बिहारी.......
जब भी जनम लू बनु दास तेरा,
सेवा में अपनी लगाना बिहारी,
नंदू ह्रदय कुञ्ज में गूंज गूंजे,
श्री राधे श्री राधे श्री राधे प्यारी,
खाटू वाले श्याम बिहारी....
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन " खाटू वाले श्याम बिहारी कलिकाल में तेरी महिमा हे न्यारी (Khatu Vale Shyam Bihari Kalikal Me Teri Mahima Hai Nyari Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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