26 जनवरी गणतंत्र दिवस (Republic Day Lyrics in Hindi) - गणतंत्र दिवस गीत 26 जनवरी के गीत Desh Bhakti Geet - Bhaktilok
26 जनवरी गणतंत्र दिवस (Republic Day Lyrics in Hindi) - गणतंत्र दिवस गीत 26 जनवरी के गीत Desh Bhakti Geet -
26 जनवरी गणतंत्र दिवस (Republic Day Lyrics in Hindi) -
26 january 2023 | 74th republic day : भारतीय गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी पर मनाया जाता है | यह दिन हमारे देश और हम सब भारतीय नागरिकों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन हमारे देश का सविंधान जारी किया गया था| गणतंत्र दिवस के उपलक्ष पर स्कूल, कॉलेज के बच्चे अपने विद्यालय में स्कूल फंक्शन में freedom fighters की ड्रेस पेहेन कर cultural program को celebrate करते हैं ||
गणतंत्र दिवस पर गीत -
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं -
अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं हमने सदियों में ये आज़ादी की नेमत पाई है सैकड़ों क़ुरबानियाँ देकर ये दौलत पाई है मुस्कराकर खाई हैं सीनों पे अपने गोलियाँ कितने वीरानों से गुज़रे हैं तो जन्नत पाई है ख़ाक में हम अपनी इज़्ज़त को मिला सकते नहीं क्या चलेगी ज़ुल्म की अहले वफ़ा के सामने जा नहीं सकता कोई शोला हवा के सामने लाख फ़ौजें ले के आई अमन का दुश्मन कोई रुक नहीं सकता हमारी एकता के सामने हम वो पत्थर हैं जिसे दुश्मन हिला सकते नहीं वक़्त की आज़ादी के हम साथ चलते जाएंगे हर क़दम पर ज़िंदगी का रुख़ बदलते जाएंगे गर वतन में भी मिलेगा कोई गद्दार-ए-वतन अपनी ताक़त से हम उसका सर कुचलते जाएंगे एक धोखा खा चुके हैं और खा सकते नहीं
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "26 जनवरी गणतंत्र दिवस (Republic Day Lyrics in Hindi) - गणतंत्र दिवस गीत 26 जनवरी के गीत Desh Bhakti Geet - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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