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Hanuman Bhajan

आरती कीजै हनुमान लला की (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki Lyrics in Hindi) - LAKHBIR SINGH LAKKHA Aartiyan Hi Aartiyan - Bhaktilok

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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आरती कीजै हनुमान लला की (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki Lyrics in Hindi) - LAKHBIR SINGH LAKKHA Aartiyan Hi Aartiyan - Bhaktilok




आरती कीजै हनुमान लला की (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki Lyrics in Hindi) - LAKHBIR SINGH LAKKHA Aartiyan Hi Aartiyan - 


आरती कीजै हनुमान लला की (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki Lyrics in Hindi) -



आरती कीजै हनुमान लला की 
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की

जाके बल से गिरिवर काँपै
रोग दोष जाके निकट न झाँके। 
अंजनि पुत्र महा बलदायी 
संतन के प्रभु सदा सहायी॥ 
आरती कीजै हनुमान लला की । 

दे बीरा  रघुनाथ पठाये 
लंका जारी सिया सुधि लाये । 
लंका सौ कोटि समुद्र सी खाई 
जात पवनसुत बार न लाई ॥ 
आरति कीजै हनुमान लला की । 

लंका जारि असुर संघारे 
सिया रामजी के काज संवारे । 
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे 
आन संजीवन प्राण उबारे ॥ 
आरती कीजै हनुमान लला की । 

पैठि पाताल तोरी जम कारे 
अहिरावन की भुजा उखारे । 
बाँये भुजा असुरदल मारे 
दाहिने भुजा संत जन तारे ॥ 
आरति कीजै हनुमान लला की । 

सुर नर मुनि जन आरति उतारे 
जय जय जय हनुमान उचारे । 
कंचन थार कपूर लौ छाई 
आरती करती अंजना माई ॥ 
आरती कीजै हनुमान लला की । 

जो हनुमान जी की आरति गावे 
बसि वैकुण्ठ परम पद पावे । 
आरती कीजै हनुमान लला की। 
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की 




🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "आरती कीजै हनुमान लला की (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki Lyrics in Hindi) - LAKHBIR SINGH LAKKHA Aartiyan Hi Aartiyan - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 14 Aug 2026

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