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मैया को अपने घर बुलायेंगे लिरिक्स (MAIYA KO APANE GHAR BULAYENGE LYRICS in Hindi) - Mata Rani Bhajan - Bhaktilok

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मैया का स्वागत: मां भगवती का विशेष भजन

इस भजन में माता रानी का स्वागत करने की दिव्य भावना है, जो भक्ति और प्रेम का प्रतीक है।

मैया को अपने घर बुलायेंगे लिरिक्स (MAIYA KO APANE GHAR BULAYENGE LYRICS in Hindi) - माता रानी भजन - मैया को अपने घर बुलायेंगे सारे मिलकर माँ का लाड लड़ायेंगे। सोने की झारी में गंगा जल मँगवाया माँ के स्वागत में चन्दन चौक पूराया हाथों से चरणों को धुलायेंगे हाथों से चरणों को धुलायेंगे सारे मिलकर माँ का लाड लड़ायेंगे। मैया की प्यारी सी चुनरी है बनवाई चाँदी के प्याले में मेहंदी है घुलवाई माँ के हाथों मेहंदी रचायेंगे माँ के हाथों मेहंदी रचाएंगे सारे मिलकर माँ का लाड लड़ायेंगे। मैया की नथली में हिरा है जड़वाया माथे की बिंदी को सोने में घड़वाया चाँदी की पायलिया पहनायेंगे चाँदी की पायलिया पहनाएंगे सारे मिलकर माँ का लाड लड़ायेंगे। फूलों के प्यारे से गजरे है मंगवाए हर्ष कहे थाली में रोली मोली लाए हाथों से माँ को हम सजायेंगे हाथों से माँ को हम सजाएंगे सारे मिलकर माँ का लाड लड़ायेंगे। मैया को अपने घर बुलाएंगे सारे मिलकर माँ का लाड लड़ायेंगे।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय मां भगवती का स्वागत है। भक्त इस भजन के माध्यम से मां को अपने घर बुलाने का आग्रह करते हैं। पहले चरण में, यह कहा गया है कि मां को अपने घर बुलाने के लिए सभी मिलकर उनकी लाड़ प्यार से स्वागत करेंगे। इस पंक्ति में 'लाड' शब्द का उपयोग परिवारिक स्नेह का प्रतीक है, जो मां के प्रति असीम प्रेम और श्रद्धा को दर्शाता है। भावार्थ में मां का स्वागत करने के लिए विशेष तैयारी की गई है, जैसे सोने की झारी में गंगा जल लाना और चन्दन चौक को पूरना। यह संकेत करता है कि मां का आगमन केवल आनंद का नहीं, बल्कि दिव्यता और पवित्रता का भी एक अवसर है।

भावानुवाद में, भक्त मां को सजाने के लिए कई प्रकार से तैयारियों का उल्लेख करते हैं, जैसे मां के हाथों में मेहंदी रचाना और उन्हें चांदी की पायल पहनाना। ये सब क्रियाएँ मां के प्रति भक्तों के असीम श्रद्धा और भक्ति को दर्शाती हैं। इसमें हमें माता के प्रति भक्ति की गहराई और उनकी कृपा प्राप्त करने की भावना दिखाई देती है। प्रत्येक पंक्ति में भक्तों की यह इच्छा है कि वे मां की सेवा करें और उन्हें खुश करें। यह भाव हमें दिखाता है कि माता हमेशा हमारे साथ होती हैं, और उनकी कृपा हमें हर कठिनाई से उबारती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहराई देखने को मिलती है। जब भक्त मिलकर मां का स्वागत करते हैं, तो यह दिखाता है कि भक्ति केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक है। इस भक्ति में एकता का संदेश है। “सारे मिलकर माँ का लाड़ लड़ायेंगे” इस भावना को और मजबूत करता है कि जब एकत्र होकर किसी देवता की पूजा की जाती हैं, तो उसकी शक्ति और प्रभाव भी समाहित होता है। शास्त्रीय तत्त्वज्ञान के अनुसार, जब भक्त सच्चे दिल से भक्ति करते हैं, तो उन्हें मां भगवती की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन को गाने का संदर्भ और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम इसे भक्तिपूर्ण परंपराओं के संदर्भ में देखते हैं। भारतीय पौराणिक कथाओं में, माता भगवती को हर तरह की दुख-दर्द की उपाय के रूप में माना जाता है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में भी माताओं की महिमा का बखान किया गया है। भक्तजन जब मां का स्वागत करते हैं, तो वे देवी में अपने विश्वास और श्रद्धा को दर्शाते हैं। यह भजन एकता और सामूहिकता का प्रतीक है और यह दिखाता है कि समर्पण और प्रेम से भरे मन से भक्ति करने पर देवी कृपा प्राप्त होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित आवाहन सकारात्मकता और मानसिक शांति प्रदान करता है। यह भक्तों को आंतरिक बल और आत्मविश्वास से भर देता है। मां भगवती के प्रति की गई भक्ति के व्यक्तित्व से सकारात्मक ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है। इसके अलावा, यह भजन नकारात्मकता से मुक्ति दिलाने और जीवन में सुख और समृद्धि लाने में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

यह भजन सुबह या शाम की पूजा के समय गाना उपयुक्त है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे पूजन स्थान पर एक दीप जलाएं, और मां के सामने ताजे फुलों और मेहंदी के साथ अपने प्रेम का इजहार करें। इस भजन का जाप करते समय एकाग्रता और श्रद्धा का भाव बनाए रखें। साधक को हृदय से मां की कृपा के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य विषय क्या है?

इस भजन का मुख्य विषय माता भगवती का स्वागत करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है। भक्त मिलकर मां का लाड़ प्यार से स्वागत करते हैं।

क्या इस भजन को किसी विशेष अवसर पर गाया जाता है?

हाँ, यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा या किसी अन्य धार्मिक उत्सव के दौरान गाया जाता है, जब भक्त माता का स्वागत करते हैं।

इस भजन का गान करने से क्या लाभ होता है?

इस भजन का गान करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा मां भगवती की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

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“यह भजन माता रानी के स्वागत की दिव्यता का प्रतीक है, जो भक्तों के प्रेम और भक्ति को दर्शाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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