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Parvati Stotram

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है (Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Raha Hai Lyrics) - Jaya Kishori Ji Bhajan - Bhaktilok

71 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण कृपा: जीवन में सुख का स्रोत

इस भजन के माध्यम से कृष्ण की कृपा का अनुभव करें और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए श्रद्धा से गाएँ।

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है। करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है॥ पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है। हैरान है ज़माना मंजिल भी मिल रही है। करता नहीं मैं कुछ भी सब काम हो रहा है॥ तुम साथ हो जो मेरे किस चीज की कमी है। किसी और चीज की अब दरकार ही नहीं है। तेरे साथ से गुलाम अब गुलफाम हो रहा है॥ मैं तो नहीं हूँ काबिल तेरा पार कैसे पाऊं। टूटी हुयी वाणी से गुणगान कैसे गाऊं। तेरी प्रेरणा से ही सब ये कमाल हो रहा हैं॥ मुझे हर कदम कदम पर तूने दिया सहारा। मेरी ज़िन्दगी बदल दी तूने करके एक इशारा। एहसान पे तेरा ये एहसान हो रहा है॥ तूफ़ान आंधियों में तूने ही मुझको थामा। तुम कृष्ण बन के आए मैं जब बना सुदामा। तेरे करम से अब ये सरेआम हो रहा है॥ मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है। करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय कृष्ण जी की अनुकंपा और कृपा पर आधारित है। भजन की पहली पुस्तक से ही परमात्मा की महानता का गुणगान होता है। 'मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है' इस पंक्ति में यह संकेत है कि मनुष्य के सभी कार्य और अनुभव भगवान की कृपा से ही संभव होते हैं। जब भक्त कहता है 'करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है,' तो यह दर्शाता है कि भगवान का नाम लेने से भक्त की पहचान और अस्तित्व का सम्मान होता है। यहाँ पर यह भी दर्शाया गया है कि कठिनाइयों के बावजूद, जैसे 'पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है,' वह निरंतर आगे बढ़ता है। यह इस बात का प्रतीक है कि जब अदृश्य बलों का साथ होता है, तो किसी भी चुनौती का सामना करना संभव बन जाता है।

भावार्थ के स्तर पर यह भजन भक्त की भक्ति और उसके द्वारा प्राप्त आश्रय को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। जब वह कहता है 'तुम साथ हो जो मेरे किस चीज की कमी है,' तो यह एक गहरी आत्मीयता का बोध कराता है। इसमें भक्त का अहंकार समाप्त हो जाता है और वह अपनी निर्भरता को स्वीकारता है। साथ ही, 'तेरे साथ से गुलाम अब गुलफाम हो रहा है' इस वाक्य में यह भावना प्रकट होती है कि कृष्ण की संगति से भक्त न केवल अपमानित नहीं होता बल्कि उसके जीवन में नए रंग भरता है। यह भक्त की अंतरात्मा की गहराईयों से प्रकट होती है और कृष्ण की अद्भुत कृपा का अनुभव करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहराइयों को खोजा जा सकता है। भक्त और भगवान के बीच का संबंध विशुद्ध प्रेम और भक्ति में बंधा होता है। इस संदर्भ में, 'मैं तो नहीं हूँ काबिल' का अर्थ है कि व्यक्ति अपने आप को अयोग्य मानता है लेकिन भगवान की कृपा से वह अपने कठिन पथ पर चलता है। कृष्ण का नाम लेने से रूपांतरित होता है। कृष्ण का नाम लेने से भक्त की आत्मा की शुद्धता होती है और वह आत्मा के कलंक को धोने का कार्य करता है। भक्ति मार्ग में चलने में, भक्त आत्मसमर्पण करता है और अपनी सामर्थ्य को भगवान के सामने रखता है, जिससे उसकी यात्रा सहज और सफल होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

कृष्ण की कृपा और समर्थन पर आधारित इस भजन का महत्वपूर्ण संदर्भ है कि हर भक्त के जीवन में कृष्ण की उपस्थिति को अनिवार्य रूप से समझा जाता है। भारतीय पौराणिक कथाओं में, जैसे कि महाभारत और श्रीभागवत गीता, भगवान श्री कृष्ण भक्तों के प्रति अपनी निष्काम सेवा और आशीर्वाद प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त को संजीवनी मिलती है और विश्वास बढ़ता है कि ईश्वर हमेशा उनकी यात्रा में साथ हैं। यह अनंत कृपा का प्रतीक है, जो धार्मिक परंपराओं में गहराई से मौजूद है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ मानसिक और आत्मिक सुकून प्रदान करता है। इसे गाने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे व्यक्तित्व में निखार आता है। भक्त की स्वयं पर आस्था और विश्वास बढ़ता है, जिससे जीवन में स्थिरता और सुख का अनुभव होता है। यह भजन भगवान कृष्ण की कृपा का अनुभव कराने वाला महत्वपूर्ण साधन है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या संध्या के समय करना सर्वोत्तम होता है। ऐसा करने से मन में शांति की अनुभूति होती है। पूजा करते समय एक दीया जलाना और राजा कृष्ण को फूल चढ़ाना चाहिए। साधक को ध्यान केंद्रित करके भजन का पाठ करना चाहिए, जिससे मन और आत्मा में एकात्मता का अनुभव हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को किस विशेष अवसर पर गाना चाहिए?

इस भजन को सुबह-सुबह या शाम को गाकर भक्ति का वातावरण बनाना चाहिए, विशेष रूप से जब मन में शांति और ध्यान की आवश्यकता होती है।

इस भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ है कि सब कार्य भगवान की कृपा से संपन्न होते हैं, भक्त कृष्ण की आस्था और समर्थन को व्यक्त करता है।

भजन का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, विश्वास में वृद्धि और कठिनाइयों को पार करने का साहस मिलता है। यह कृपा का अनुभव कराता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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