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पकड़ लो हाथ भोलेनाथ शिव भजन लीरिक्स (Pakad Lo Hath Bholenath Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilok

243 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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पकड़ लो हाथ भोलेनाथ शिव भजन लीरिक्स (Pakad Lo Hath Bholenath Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilok


पकड़ लो हाथ भोलेनाथ शिव भजन लीरिक्स (Pakad Lo Hath Bholenath Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - 


पकड़ लो हाथ भोलेनाथ शिव भजन लीरिक्स (Pakad Lo Hath Bholenath Lyrics in Hindi) - 


पकड़ लो हाथ भोलेनाथ नहीं तो डूब जाएंगे

हमारा कुछ ना बिगड़ेगा तुम्हारी लाज जाएगी

पकड़ लो हाथ भोलेनाथ नहीं तो डूब जाएंगे………

धरी है पाप की गठरी हमारे सर पे ये भारी

वजन पापो का है भारी इसे कैसे उठाऐंगे

पकड़ लो हाथ भोलेनाथ नहीं तो डूब जाएंगे………

फसी है भवँर में नैया प्रभु अब डूब जाएगी

खिवैया आप बन जाओ तो बेड़ा पार हो जाये

पकड़ लो हाथ भोलेनाथ नहीं तो डूब जाएंगे………

तुम्हारे ही भरोसे पर जमाना छोड़ बैठे है

जमाने की तरफ देखो इसे कैसे निभाएंगे

पकड़ लो हाथ भोलेनाथ नहीं तो डूब जाएंगे………

दर्दे दिल की कहे किससे सहारा ना कोई देगा

सुनोगे आप ही मोहन और किसको सुनाऐंगे

पकड़ लो हाथ भोलेनाथ नहीं तो डूब जाएंगे………

पकड़ लो हाथ भोलेनाथ नहीं तो डूब जाएंगे

हमारा कुछ ना बिगड़ेगा तुम्हारी लाज जाएगी

पकड़ लो हाथ भोलेनाथ नहीं तो डूब जाएंगे………


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🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "पकड़ लो हाथ भोलेनाथ शिव भजन लीरिक्स (Pakad Lo Hath Bholenath Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।

शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?

शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?

सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?

हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 13 Aug 2026

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