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भोला भंडारी आया, मोहन तेरी गली में (हरि-हर मिलन) भजन लिरिक्स | Bhola Bhandari Aaya Mohan Teri Gali Mein Hari Har Milan Bhajan Lyrics

215 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 भोला भंडारी आया – मोहन तेरी गली में

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Bhola Bhandari Aaya – Mohan Teri Gali Mein) – हरि-हर मिलन भजन

🕉️ शंकर जी का ब्रज में आगमन – कान्हा के दर्शन की आतुरता

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: शिव-कृष्ण भजन / हरि-हर मिलन / लोकगीत
🎶 भाव: आस्था, प्रार्थना, उल्लास, एकता
📍 विशेषता: भगवान शिव (भोला भंडारी) का कृष्ण (मोहन) के दर्शन के लिए ब्रज आगमन
📀 प्रचलन: हरि-हर भक्ति में प्रिय, विशेषकर ब्रज क्षेत्र और शिवरात्रि पर

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

है खुशियों की भरमार,
ब्रज की गलियों में।
नाचे-गाए हर इंसान,
ब्रज की गलियों में।
आए शंकर जी भगवान,
ब्रज की गलियों में।
करने कान्हा का दीदार,
ब्रज की गलियों में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में।
मोहन तेरी गली में,
कान्हा तेरी गली में।
इक झलक पाने आया हूँ मैं भी,
इक झलक पाने आया,
मोहन तेरी गली में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में॥

दीदार हो तो जानूँ,
स्वीकार हो तो मानूँ।
विश्वास मुझको लाया है मोहन,
विश्वास मुझको लाया,
मोहन तेरी गली में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में।
मोहन तेरी गली में,
कान्हा तेरी गली में॥

मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम।
मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम॥

हमने सुना है मोहन,
तुम तो दयानिधि हो।
आशा में लेकर आया हूँ, कृष्णा,
आशा में लेकर आया,
मोहन तेरी गली में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में।
मोहन तेरी गली में,
कान्हा तेरी गली में॥

मैया मुझे दिखा दे,
लाला की एक झलकी।
दर्शन मैं करके जाऊँ, मैया,
दर्शन मैं करके जाऊँ,
मैया तेरी गली में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में।
मोहन तेरी गली में,
कान्हा तेरी गली में॥

मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम।
मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम॥

मुझको अगर मिली न,
भिक्षा तेरे दर्शन की।
दिल को न चैन आया है, मोहन,
दिल को न चैन आया,
मोहन तेरी गली में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में।
मोहन तेरी गली में,
कान्हा तेरी गली में॥

मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम।
मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम॥

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / हरि-हर मिलन भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अद्भुत हरि-हर मिलन भजन भगवान शिव (भोला भंडारी) के ब्रज की गलियों में कृष्ण (मोहन) के दर्शन के लिए आगमन का वर्णन करता है। “भोला भंडारी आया, मोहन तेरी गली में” – शिव स्वयं मोहन की गली में आए हैं। “इक झलक पाने आया हूँ मैं भी” – भक्त भी शिव के साथ खड़ा होकर कहता है कि मैं भी कृष्ण की एक झलक पाने आया हूँ।

प्रस्तावना में – ब्रज की गलियों में खुशियों की भरमार है, हर इंसान नाच-गा रहा है क्योंकि शंकर जी कान्हा के दर्शन करने आए हैं।

पहले अंतरे में – “दीदार हो तो जानूँ, स्वीकार हो तो मानूँ” – भक्त कहता है कि अगर दर्शन होंगे तो मैं जानूंगा, अगर स्वीकार होगा तो मानूंगा। विश्वास ही उसे मोहन की गली में लाया है।

“मेरे वंशी वाले श्याम” – यह जप बार-बार आता है, जो कृष्ण के बाँसुरी वाले रूप का स्मरण है।

दूसरे अंतरे में – भक्त कहता है कि मोहन दयानिधि (दया के भंडार) हैं, इसलिए आशा लेकर आया हूँ। तीसरे अंतरे में – मैया (यशोदा) से लाला (बाल कृष्ण) की एक झलक दिखाने की प्रार्थना।

अंतिम अंतरे में – “मुझको अगर मिली न भिक्षा तेरे दर्शन की, दिल को न चैन आया है” – यदि दर्शन की भिक्षा नहीं मिली तो दिल को चैन नहीं आएगा।

यह भजन शिव और कृष्ण के अद्भुत मिलन और भक्त की उस मिलन को देखने की आतुरता का सजीव चित्रण है। यह बताता है कि देवता भी कृष्ण के दर्शन को तरसते हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

हरि-हर मिलन का भाव: यह भजन हिंदू धर्म के दो सर्वोच्च देवताओं – विष्णु (कृष्ण) और शिव के मिलन का उत्सव है। शिव को कृष्ण का परम भक्त भी माना जाता है।

ब्रज की गलियाँ: बार-बार “ब्रज की गलियों में” और “मोहन तेरी गली में” का उल्लेख ब्रजभूमि की पवित्रता और वहाँ की रस-लीलाओं को दर्शाता है।

दयानिधि मोहन: कृष्ण को दयानिधि कहकर भक्त उनसे दया की भीख माँगता है – दर्शन की भिक्षा।

💖 हरि-हर एकता का प्रतीक

🎯 संदेश

शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं – दोनों एक ही परम सत्ता के स्वरूप हैं। शिव स्वयं कृष्ण के दर्शन को आते हैं, और भक्त को भी उसी आतुरता से कृष्ण को पुकारना चाहिए।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हरि-हर भक्ति के अद्भुत समन्वय को दर्शाता है। यह भक्तों को याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति में कोई द्वैत नहीं – शिव और कृष्ण एक हैं।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। हरे कृष्णा ।। भोला भंडारी आया मोहन तेरी गली में ।।

॥ इति हरि-हर मिलन भजनम् ॥
॥ भोला भंडारी आया, मोहन तेरी गली में – इक झलक पाने आया हूँ मैं भी ॥
श्रेणियां: Bholenath Bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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